मध्य प्रदेश

ताहिर अली के 3 अक्टूबर को 73वें जन्मदिवस पर विशेष छवि निर्माण कार्य को अपने अंदाज में करने वाले, ताहिर अली

ताहिर अली सबसे अलग तो हैं। उनसे मेरी पहली मुलाकात वर्ष 1990 में हुई। हम लोग जिलों में पदस्थ थे। मुख्यालय की एक बैठक में हम मिले थे। पहली ही भेंट में ताहिर भाई की जिस बात ने मुझे प्रभावित किया वो था उनका सौम्य, सहज और सरल व्यवहार। वरिष्ठ मंत्रियों के प्रचार का दायित्व बखूबी संभालने वाले ताहिर जी संपर्क के मामले में तत्पर रहा करते हैं।
दूरभाष का उन्होंने उस युग में सुविचारित उपयोग किया था जब ये उपकरण बहुत कम लोगों के पास होता था और मोबाइल तो हुआ ही नहीं करते थे। तत्कालीन संचार मंत्री श्री शंकरदयाल दादा से विशेष कनेक्शन प्राप्त करने की कहानी भी वे सुनाते हैं। दौर बदला। बीसवीं सदी के आखिरी वर्षों में मोबाइल आने के बाद तो गत तीन दशक में उन्होंने सफलता के नए झंडे ही गाड़ दिए। इसमें तारीफ सिर्फ मोबाइल उपकरण की नहीं है, बल्कि व्यक्ति की सजगता और अपने आसपास के वातावरण के प्रति चैकन्ना बने रहकर या यूं कहें कि प्रासंगिक रहकर समाचार माध्यमों से जुड़ाव रखना मायने रखता है।

संबंध निभाने में माहिर है ताहिर भाई

ताहिर भाई को व्यक्तिगत संबंधों को महत्व देने का पहलू सबसे अलग बनाता है। शिक्षित परिवार की पृष्ठभूमि का भी लाभ उन्हें मिला है। इस प्रोफेशन में अब अध्ययनशीलता में कमी स्वीकार्य है, लेकिन व्यवहारिक जीवन में सक्रिय, सजग रहकर जनसंपर्क क्षेत्र में सफलता प्राप्त करना सरल हो जाता है। प्रबंधन गुण उन्हें भी आगे ले गया। ताहिर भाई ने संबंधों के लिए व्यक्ति को समुचित समय देने की नीति को अपनाया है। ताहिर भाई भोपाल के पुराने शहर में रहते हुए भी नए भोपाल शहर से उसी तरह जुड़े होते हैं जैसे उस घटना या व्यक्ति से मुलाकात के स्वयं साक्षी हों। ये उनका अपना अंदाज है। उनकी इस कुशलता को अनुभव किया गया है। प्रचार-प्रसार के लिए अखबारों के साथ रेडियो, दूरदर्शन और टीवी चैनलों के उपयोग में वे माहिर हैं, इसलिए कहा जाता है कि वे सिर्फ ताहिर नहीं बल्कि माहिर भी हैं। मेरे कुछ मित्र उन्हें ताहिर अली की जगह इंतजाम अली भी कहते हैं।

बेमिसाल प्रबंधन के व्यक्ति है ताहिर भाई

एक बार कोई वीआईपी फ्लाइट से आ रहे थे। एक दो लोग उनके स्वागत के लिए हाथ में बढ़िया से बुके लेकर खड़े थे। तब मेरे साथ श्री ताहिर अली प्रख्यात पत्रकार कुलदीप नैयर के नई दिल्ली से भोपाल आगमन के समय ड्यूटी पर थे। हम दोनों बुके विहीन थे। नैयर साहब राज्य सभा के नामांकित सदस्य हैं,जब उन्हें ये बात बताई तो उनकी आँखों में चमक आ गई। बोले, अशोक भाई मैं कुछ करता हूं। वे अनायास आगे बढ़े और एक अनजान व्यक्ति से उनका बुके प्राप्त कर हमारे अतिथि का स्वागत कर दिया था। बाद में नैयर साहब का वो बुके कार से उठाकर, दौड़कर गए और तत्काल उन सज्जन को धन्यवाद देते हुए बुके वापस भी कर आए। मैं इस घटना का साक्षी हूं। श्री ताहिर भाई द्वारा एअरपोर्ट पर वीआईपी के स्वागत के लिए अपरिचित व्यक्ति का सहयोग प्राप्त कर लेना मेरे लिए एक अजूबे की तरह था। वास्तव में देखें तो हम सभी का जीवन आपसी सहयोग से ही सही चलता है, लेकिन कब कहां कैसे सहयोग लेना है यह एक कला है। जीवन में कहां-कहां किस-किस तरह से बेमिसाल प्रबंधन व्यक्ति कर सकता है, यह अध्ययन का विषय है।

ताहिर भाई की जन्म वर्षगांठ पर हार्दिक बधाई और उनके दीर्घ जीवन के लिए शुभकामनाएं।  ताहिर अली 3 अक्टूबर को जीवन के 73वें बसंत में प्रवेश कर रहे ताहिर अली जी वर्तमान में उपमुख्यमंत्री  राजेंद्र शुक्ला जी के मीडिया सलाहकार हैं।

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