खबरमध्य प्रदेश

भोपाल में भारतीय साहित्य एवं कला परिषद का 37वाँ विशेष वार्षिक कार्यक्रम संपन्न

विदिशा/भारतीय साहित्य एवं कला परिषद साहित्यिक संस्था द्वारा संस्था अध्यक्ष  बिहारीलाल सोनी ‘अनुज’ के आवास पर उनके माता-पिता स्व.  बाबूलाल सोनी एवं स्व.  लीला देवी सोनी की स्मृति में 37वें विशेष वार्षिक कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। यह वृहद कार्यक्रम दो सत्रों में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

पहला सत्र: विचार और काव्य की त्रिवेणी

प्रथम सत्र की अध्यक्षता बैंकर्स साहित्य एवं कला परिषद के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ साहित्यकार श्री गोकुल सोनी ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में रामायण शोध केंद्र के निदेशक एवं तीर्थ एवं मेला विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. राजेश श्रीवास्तव मंचासीन रहे। कार्यक्रम का सफल एवं सरस संचालन वरिष्ठ गीतकार श्री विमल भंडारी ने किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रतिभा द्विवेदी द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना और श्री बिहारीलाल सोनी के स्वागत उद्बोधन से हुआ। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री सोनी ने कहा कि आज के पारिवारिक विखंडन के दौर में ऐसे आयोजन माता-पिता की स्मृति को सदा जीवित रखते हैं और प्रेरणा देते हैं। डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने भी ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पर बल दिया।

गज़ल और कविताओं की अनूठी प्रस्तुतियाँ

इस दौरान विदिशा से पधारे कवि लायन अरुण कुमार सोनी ने अपनी सुंदर गज़ल—
> “दिल-ए-नादाँ पे हम अपना मलाल-ए-यार लिखते हैं, उदासी में भी हम अपना ख़ुशी से हाल लिखते हैं।”
>
—की शानदार प्रस्तुति से श्रोताओं का मन मोह लिया। इसके अलावा कालापीपल से आए कवि राकेश कुमार सोनी ‘बिंदास’ ने अपनी रचना “सुखनबरों की सोहबत में निखर रहा हूं” प्रस्तुत की। साथ ही अनिशा जैन, डॉ. अमित मालवीय हर्ष, कमलेश नूर, दिनेश गुप्ता ‘मकरंद’, उमेश तिवारी ‘आरोही’, अशोक गौतम ‘घायल’, राममोहन चौकसे, रामकुमार सोनी ‘राही’, अशोक निर्मल, हरिओम श्रीवास्तव, महेश अग्रवाल, किशन तिवारी, सत्यदेव सोनी, डॉ. प्रमोद सक्सेना ‘पुष्कर’, प्रदीप मोहबे, शिवकुमार दीवान और चंद्रभान सिंह पवार ‘चंदर’ आदि कवियों ने अपनी कविताओं से समां बांध दिया। कार्यक्रम के मध्य में ‘लाफ्टर चैलेंज’ फेम श्री ओ.पी. द्विवेदी ने अपनी हास्य व्यंग्य क्षणिकाओं और मिमिक्री से सभी को लोटपोट कर दिया।

दूसरा सत्र: भव्य काव्य गोष्ठी
द्वितीय सत्र की अध्यक्षता हिन्दी भवन के उप मंत्री संचालक डॉ. संजय सक्सेना ने की और मुख्य अतिथि के रूप में मनासा के वरिष्ठ कवि श्री भेरूंलाल सुनार मंचासीन रहे। इस सत्र का काव्याममय एवं सुंदर संचालन कवि सत्यदेव सोनी ‘सत्य’ ने किया।

दूसरे दौर में तुलसी साहित्य अकादमी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मोहन तिवारी ‘आनंद’, सुरेश पटवा, डॉ. राजेश तिवारी, अशोक धमैनिया, वी.के. श्रीवास्तव, श्रीराम माहेश्वरी, होशियार सिंह पटेल, हरिओम श्रीवास्तव, कविता सिरोले, अशोक व्यास, उमेश तिवारी, सुषमा अनिल श्रीवास्तव, प्रतिभा द्विवेदी, प्रमिला झरबडे, क्षमा निमौरे, रामकिशोर श्रीवास्तव ‘रवि’, डॉ. रमेश भूमरकर, प्रवीण शर्मा, भंवरलाल श्रीवास, कैलाश श्रीवास्तव ‘आदमी’, चन्द्रहास शुक्ल और डॉ. अशोक व्यास सहित अनेक रचनाकारों ने अपनी रचनाओं से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।

शहर और दूर-दराज से पधारे अनेक साहित्य प्रेमियों एवं परिजनों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया। देर रात तक चले इस आयोजन में शहर एवं बाहर से पधारे लगभग 80 कवियों ने अपनी काव्य रचना शानदार एवं सुरीले स्वर में काव्य पाठ किया। कवि बिहारी लाल सोनी ‘अनुज’ के इस ऐतिहासिक कार्यक्रम की सभी लोगों ने भूरी भूरी सराहना की।अंत में वरिष्ठ पत्रकार श्री राममोहन चौकसे ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

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