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क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, भोपाल के सभागार में अंतर्राष्ट्रीय मातृ-भाषा दिवस का आयोजन

आज गुजराती साहित्य अकादमी, गांधीनगर और क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता साहित्यकार एवं कला संस्थान भारत-भवन के प्रशासनिक अधिकारी डाॅ. प्रेम शंकर शुक्ल रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भाषा मनुष्य की भावनाओं के अभिव्यक्ति का साधन है और मातृभाषा उसमें भी सबसे सशक्त। काव्यात्मक भाषा सामाजिक सरोकारों का आइना होती है। कवि वही होगा जिसके अंदर गहरी संवेदना होगी। इसलिए कविता लेखन बहुत तपस्या का काम है। जब कोई व्यक्ति समाज या व्यक्ति की टीस को स्वयं महसूस कर पाता तब कविता का जन्म होता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के प्राचार्य प्रो.शिव कुमार गुप्त ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने मातृ-भाषा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि मातृ भाषा में ही व्यक्ति की सहज आत्मानुभूति होती है। जो अनजान जगह पर उसे आत्मीयता का आभास कराती है। इस अवसर पर संस्थान की वरिष्ठ आचार्या व साहित्यकार प्रो.चित्रा सिंह से अपना काव्य पाठ किया। भाषा विभाग के अध्यक्ष डाॅ.सुरेश कुमार मकवाना ने गुजराती व डाॅ.संजय कुमार पंडागले, डाॅ.व्यंकट सूर्यवंशी ने मराठी व डाॅ.कुलवीर सिंह ने क्रमशः मराठी व हिन्दी में कविताओं का वाचन किया। एनसीईआरटी मुख्यालय से भी आभासी माध्यम से एक विशेष व्याख्यान से संस्थान के संकाय सदस्य जुड़े।संस्थान के विद्यार्थियों ने भी अपनी मातृभाषाओं में कवितापाठ किया। इस अवसर पर संस्थान के अधिष्ठाता प्रो.जयदीप मंडल, प्रो.अश्वनी कुमार गर्ग, डाॅ.आर.पी.प्रजापति, डाॅ.पवन कुमार व डाॅ.गंगा महतो सहित संस्थान के प्रशासनिक अधिकारी महेश आसुदानी सहित अनेक संकाय सदस्य व विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन समन्वयक डाॅ.शिवालिका सरकार ने किया।

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