एजुकेशनमध्य प्रदेश

वैभव सिसिन्टी के की-नोट सेशन के साथ नवोन्मेष 2026 की प्रतियोगिताओं का आगाज

इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भव्य समापन, 7 देशों के एआई विशेषज्ञों ने साझा किए विचार

भोपाल। मध्य भारत के पहले कौशल विश्वविद्यालय स्कोप ग्लोबल स्किल्सयूनिवर्सिटी, भोपाल में आयोजित दो दिवसीय इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (आईसीएआई) का गुरुवार को भव्य समापन हुआ। इसी अवसर पर एआई एक्सपर्ट वैभव सिसिन्टी के “How to Win in the AI Race” विषय पर आयोजित की-नोट सेशन के साथ नवोन्मेष 2026 की प्रतियोगिताओं का औपचारिक शुभारंभ भी हुआ।

समापन सत्र के मुख्य अतिथियों में डॉ. आर. पी. दुबे, कुलपति, रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, प्रो. अमिताभ सक्सेना, कार्यकारी निदेशक, आईटीडीपीआर, डॉ. एस. के. जैन, कुलपति, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी, चांसलर, स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय तथा डॉ. विजय सिंह कुलपति, स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय विशेष रूप से उपस्थित रहे।

इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रो. अमिताभ सक्सेना ने तकनीक के विकास की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्रारंभिक दौर में कंप्यूटर सी-प्रॉम्प्ट, वर्डस्टार और बूटिंग प्रक्रिया के माध्यम से संचालित होते थे। समय के साथ ग्राफिकल यूज़र इंटरफेस (जीयूआई) और इंटरनेट के आगमन ने तकनीकी दुनिया को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि आज के समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा विश्लेषण और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ज्ञान और अनुसंधान के नए आयाम विकसित हो रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. एस. के. जैन ने कहा कि वर्तमान समय में गहन अधिगम (डीप लर्निंग) और बहुविषयक शिक्षण (मल्टीडिसिप्लिनरी लर्निंग) की आवश्यकता बढ़ गई है। एआई के माध्यम से शिक्षण-अधिगम की प्रक्रियाएँ अधिक प्रभावी और व्यापक बनाई जा सकती हैं। विश्वविद्यालयों में एआई आधारित अध्ययन मॉड्यूल विकसित किए जा रहे हैं, जिससे विद्यार्थी आधुनिक तकनीक से बेहतर तरीके से जुड़ सकें और विभिन्न विषयों के समन्वय से एक सशक्त शैक्षणिक पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया जा सके।

स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय के चांसलर डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने अपने संबोधन में कहा कि आईसीएआई-2026 जैसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शिक्षा, शोध और उद्योग के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दे रही है, जिससे व्यक्तिगत शिक्षण, शोध नवाचार और कौशल विकास को बढ़ावा मिल रहा है।

वहीं स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विजय सिंह ने कहा कि आईसीएआई-2026 जैसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करते हैं, जहां वे उभरती तकनीकों पर अपने विचार साझा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज के दौर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता तेजी से विभिन्न क्षेत्रों में परिवर्तन ला रही है, इसलिए विश्वविद्यालयों को छात्रों को नई तकनीकों और शोध के अवसरों से जोड़ना आवश्यक है।

सम्मेलन के दौरान एआई से संबंधित विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिसमें 12 एआई टूल्स का प्रदर्शन, 21 पोस्टर प्रस्तुतियाँ तथा लगभग 200 ऑफलाइन और 200 ऑनलाइन शोध प्रस्तुतियाँ शामिल रहीं। इसके अतिरिक्त लगभग 200 शोध-पत्रों में से 6 श्रेष्ठ शोध-पत्रों का चयन किया गया। इनमें प्रकाश कुमार नागर (शिलांग), तनिया राजकुमारी, समृद्धि राजेश, राम सिंह बिश्नोई तथा डॉ. श्रवणी सुंदरासन के शोध-पत्रों को विशेष सराहना प्राप्त हुई।

एआई विषय पर सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति के लिए प्रियंशु कुशवाह एवं निशांत चौधरी को प्रथम स्थान, काशिश सिंह को द्वितीय स्थान तथा अभिषेक राठौर को तृतीय स्थान प्रदान किया गया। इस अवसर पर “इंटरनेशनल जर्नल ऑफ रिसर्च एंड फ्यूचर स्किल एंड एप्लाइड रिसर्च” के पोस्टर का लोकार्पण किया गया तथा कंप्यूटर और एआई से संबंधित एक पुस्तक का भी विमोचन किया गया।
कॉन्फ्रेंस में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ-साथ सिंगापुर, जर्मनी, मलेशिया, वियतनाम सहित सात देशों के एआई विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और उद्योग विशेषज्ञों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विभिन्न आयामों पर अपने विचार साझा किए।
इससे पूर्व सुबह के सत्रों की शुरुआत प्लीनरी सेशन से हुई। इसमें डॉ. मनीष भारद्वाज, प्रिंसिपल साइंटिस्ट, सीएसआईआर मुख्यालय, नई दिल्ली ने “AI for Smarter, Sustainable, Ethical and Inclusive Future” विषय पर अपने विचार रखते हुए बताया कि एआई का जिम्मेदार और समावेशी उपयोग भविष्य के विकास का आधार बनेगा। डॉ. च. न. ए. ब. शंकर, साइंटिस्ट ‘G’, रिसर्च सेंटर इमारत (RCI), डीआरडीओ, हैदराबाद ने “AI in Defence: Foundations, Capabilities and Future” विषय पर प्रस्तुति देते हुए रक्षा क्षेत्र में एआई की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। डॉ. सदानंद मिश्र, प्रिंसिपल साइंटिस्ट, सीएसआईआर-एएमपीआरआई, भोपाल ने आईओटी और एआई के माध्यम से डैम की रियल टाइम स्ट्रक्चरल हेल्थ मॉनिटरिंग पर अपना शोध प्रस्तुत किया। वहीं डॉ. नीरज गोयल, एसोसिएट प्रोफेसर, आईआईटी रोपड़ ने “AI Meets Systems: How Computer Systems are Revolutionizing AI” विषय पर अपने विचार रखते हुए बताया कि आधुनिक कंप्यूटिंग सिस्टम एआई के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसके अलावा डॉ. शशि रावत, प्रिंसिपल साइंटिस्ट, सीआईएई भोपाल ने कृषि क्षेत्र में एआई के उपयोग, जबकि डॉ. हारून आर. लोन, असिस्टेंट प्रोफेसर, आईआईएसईआर भोपाल ने स्वास्थ्य और वेलबीइंग के क्षेत्र में एआई की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। इसके पश्चात आयोजित तकनीकी सत्र में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने अपने शोध और अनुभव साझा किए। इनमें डॉ. अतुल कुमार सिंह (सॉफ्टवेयर आर्किटेक्ट, जर्मनी), राहुल जायसवाल (Vymo, बेंगलुरु), डॉ. अब्दुल समद हसन बसारी (प्रोफेसर, मलेशिया), डॉ. बुई थान हुई (वियतनाम) सहित कई प्रमुख विशेषज्ञ शामिल रहे।

वैभव सिसिनटी ने चार स्टेप में बताए एआई नेटिव फ्रेशर बनने के गुर

कॉन्फ्रेंस के समापन के साथ ही नवोन्मेष 2026 की प्रतियोगिताओं की औपचारिक शुरुआत वैभव सिसिन्टी, एआई एक्सपर्ट एवं फाउंडर-सीईओ, GrowthSchool और Outskill के प्रेरक की-नोट सेशन से हुई।

अपने संबोधन में उन्होंने युवाओं से कहा कि एआई के दौर में केवल तकनीक सीखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समस्या समाधान की क्षमता, रचनात्मक सोच और निरंतर सीखने की मानसिकता ही सफलता की असली कुंजी है। उन्होंने युवाओं को एआई को अवसर के रूप में अपनाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने के लिए तैयार रहने का संदेश दिया।
वैभव सिसिनटी ने अपने की-नोट सेशन में युवाओं से एआई नेटिव फ्रेशर बनने की बात की। एआई नेटिव फ्रेशर वह व्यक्ति है जो एआई टूल्स को ट्राय करता है और बहुत सारी प्रॉब्लम को लगातार सॉल्व करने की कोशिश करता है। वैभव ने कहा कि 1 एआई नेटिव फ्रेशर 3 मिड लेवल एम्प्लाई के बराबर होता है। ऐसे में यह आवश्यक है कि सभी एआई को अपनी लाइफ में अपनाएं और लगातार सीखें।

आगे उन्होंने कहा कि पहले जॉब में अनुभवी होने को महत्वपूर्ण माना जाता था। परंतु आज एआई के आने से अनुभवी व्यक्ति के लिए यह डिसएडवांटेज बन गया है क्योंकि वह अपने पुराने तरीकों को छोड़कर एआई को अपनाने में हिचकता है। वहीं नए फ्रेशर के लिए पुराने लिगेसी तरीकों को अपनाने का कोई दवाब नहीं होता ऐसे में वह एआई को खेल-खेल में जल्दी और आसानी से सीखता है।

वैभव ने अपने वक्तव्य में एआई को अपनाने के चार स्टेप बताए। इसमें पहला स्टेप फ्लूएंसी है जिसका अर्थ है जो भी एआई टूल दिखाई दे उसे ट्राय करके जरूर देखें। जिससे आपका नॉलेज और प्रोफिशिएंसी बढ़ती जाती है। दूसरा स्टेप आर्केस्ट्रेशन है जिसका तात्पर्य है आप नई-नई प्रॉब्लम्स को अलग-अलग टूल के प्रयोग से सॉल्व करके देखो। तीसरा स्टेप बिल्ड – से तात्पर्य है जहां जरूरी है वहां स्वयं के छोटे-छोटे एप, सॉफ्टवेयर एआई टूल्स की सहायता से बनाएं। इसमें ध्यान रखें फेल होने से न डरें क्योंकि जितना फेल होंगे उतने बेहतर होंगे। अंतिम स्टेप डॉक्यूमेंट जिसका अर्थ है कंटेंट क्रिएशन की शुरुआत करें और उसे सोशल मीडिया पर शेयर करिए। वैभव ने बताया आज उनका सारा सोशल मीडिया उनके एआई अवतार से चलता है। इस प्रकार के प्रयोगों से कोई भी आय का स्रोत भी बना सकता है और एआई में प्रोफिशिएंसी पा सकता है।

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