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मानवता की मिसाल: रवींद्र जैन ने जाते-जाते दो जिंदगी रोशन की, स्वर्णकार समाज और लायंस क्लब ने सराहा

विदिशा। “परहित सरिस धर्म नहिं भाई” की उक्ति को चरितार्थ करते हुए, समाज सेवी स्व. रवींद्र जैन बासल (हिरनई वाले) ने दुनिया से विदा लेते हुए भी समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाकर एक अनुपम उदाहरण पेश किया है। उनके निधन के पश्चात परिजनों द्वारा लिए गए नेत्रदान के साहसिक निर्णय से दो दृष्टिहीन व्यक्तियों के जीवन में नया सवेरा आएगा।
​इस पुनीत कार्य और मानवता के प्रति इस समर्पण की राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अखिल भारतीय स्वर्णकार महासभा एवं पूर्व लायंस अध्यक्ष लायन अरुण कुमार सोनी ने भूरि-भूरि प्रशंसा की है।

​शोक की घड़ी में उदारता का परिचय

​रविवार को रवींद्र जैन के दुखद निधन के बाद, नीता चिपिन सराफ की पहल पर परिवार ने नेत्रदान का संकल्प लिया। लायन अरुण कुमार सोनी ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
​”दुख की इस घड़ी में परिवार द्वारा दिखाया गया धैर्य और यह उदार निर्णय वंदनीय है। स्वर्णकार समाज और लायंस परिवार ऐसे महान कार्यों का सदैव समर्थन करता है। नेत्रदान महादान है, और रवींद्र जी आज हमारे बीच न होकर भी दो आँखों के जरिए इस दुनिया को देखते रहेंगे।”
​मेडिकल टीम ने पूरी की प्रक्रिया
​सूचना मिलते ही मेडिकल कॉलेज की विशेषज्ञ टीम निजी अस्पताल पहुँची और पूरी संवेदनशीलता के साथ नेत्रदान की प्रक्रिया को संपन्न किया। इस पुनीत कार्य में आदेश जैन एवं चिपिन सराफ का विशेष सहयोग रहा।

​समाज के लिए प्रेरणा

​अखिल भारतीय स्वर्णकार महासभा की ओर से अरुण कुमार सोनी ने कहा कि समाज को ऐसे प्रेरक प्रसंगों से सीख लेनी चाहिए। उन्होंने समाज के अन्य वर्गों से भी अंगदान और नेत्रदान जैसे संकल्प लेने का आह्वान किया ताकि मृत्यु के पश्चात भी किसी का जीवन रोशन किया जा सके।

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