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भारतीय घरों में पड़ा है 415 लाख करोड़ का सोना! दुनिया के टॉप 10 केंद्रीय बैंकों से भी बड़ा है खजाना

ये बात तो पूरी दुनिया मानती है कि भारतीयों का सोने से बहुत पुराना और बेहद गहरा नाता रहा है. भारत यूं ही नहीं सोने की चिड़िया कहा जाता रहा है. सदियों तक लूट-खसोट के बावजूद सोने (Gold) के मामले में भारत दुनिया के टॉप 10 बैंकों से भी रईस है. जी हां, गोल्‍ड रिजर्व को लेकर एक ऐसी रिपोर्ट आई है जो दुनिया को हैरान कर सकती है. एसोचैम (Assocham) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय परिवारों के पास मौजूद सोने की कुल वैल्यू अब दुनिया के टॉप 10 केंद्रीय बैंकों के सामूहिक स्‍वर्ण भंडार से भी ज्यादा हो गई है.

$5 ट्रिलियन का खजाना भारतीय घरों में 

रिपोर्ट के अनुसार, 2024 से लेकर 2026 की शुरुआत तक सोने की कीमतों में आए जबरदस्त उछाल ने भारतीय घरों में रखे सोने की कीमत को $5 ट्रिलियन (करीब 415 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंचा दिया है. यह निजी संपत्ति का दुनिया का सबसे बड़ा भंडार बनकर उभरा है.

सोना ला सकता है ‘आर्थिक समृद्धि’

एसोचैम का विश्लेषण कहता है कि अगर भारतीय घरों में रखे इस सोने का सिर्फ 2 प्रतिशत हिस्सा भी हर साल वित्तीय सिस्टम (जैसे गोल्ड बॉन्ड्स या स्कीम) में लाया जाए, तो ये देश की GDP में क्रांति ला सकता है.

अगर ये ट्रेंड बना रहा, तो 2047 तक भारत की अनुमानित $34 ट्रिलियन की GDP में यह सोना $7.5 ट्रिलियन का एक्स्ट्रा योगदान दे सकता है. इससे भारतीय अर्थव्यवस्था $40 ट्रिलियन के जादुई आंकड़े को भी पार कर सकती है.

सिर्फ गहना नहीं, अब ‘पूंजी’ बन रहा है सोना 

रिपोर्ट में इस बात पर चिंता जताई गई है कि इतना बड़ा खजाना आज भी औपचारिक बैंकिंग सिस्टम से बाहर है. इसे उत्पादक कार्यों में लगाने के लिए गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम और सोने के बदले कर्ज जैसे विकल्पों को बढ़ावा देने की जरूरत है.

नवंबर 2025 तक भारत में सोने और जेवरों के बदले दिया गया कर्ज 24.34 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो बताता है कि लोग अब सोने को निवेश के रूप में देख रहे हैं.

सरकारी खजाना Vs घर का खजाना

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, भारत सरकार के पास आधिकारिक तौर पर 880 टन सोना है और इस मामले में भारत दुनिया में 8वें नंबर पर है. लेकिन, जब बात ‘प्राइवेट होल्डिंग’ यानी घरों में रखे सोने की आती है, तो भारत दुनिया का ‘राजा’ है. हम आज भी दुनिया में सोने के गहनों के सबसे बड़े उपभोक्ता हैं.

सोने की बढ़ती कीमतों ने भारतीय परिवारों की बैलेंस शीट को तो मजबूत किया ही है, साथ ही यह मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और खेती जैसे सेक्टरों के लिए संजीवनी बन सकता है. बस जरूरत है अलमारी में रखे इस ‘ठंडे’ सोने को अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में ‘गरम’ करने की.

 

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