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नौनिहालों में भारतीय संस्कारों के बीजारोपण के लिए 15 दिवसीय विद्यार्थी संस्कार शिविर का शुभारंभ


भोपाल। नौनिहालों में भारतीय संस्कृति एवं श्रेष्ठ जीवन मूल्यों के बीजारोपण हेतु मंदाकिनी कॉलोनी, कोलार रोड स्थित जवाहरलाल नेहरू विद्यालय में 15 दिवसीय विद्यार्थी संस्कार शिविर का शुभारंभ शनिवार, 2 मई से किया गया। यह शिविर 16 मई तक प्रतिदिन प्रातः 8:30 से 10:30 बजे तक आयोजित किया जाएगा। शिविर के शुभारंभ अवसर पर वरिष्ठ प्रज्ञा परिजन  के. पी. सेन ने संस्कारों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्कार व्यक्ति के जीवन को विकसित करने और उसे उत्तम बनाने का आधार हैं। इनके माध्यम से अच्छे गुण, मानवीय मूल्य एवं ज्ञान का विकास होता है, जिससे व्यक्ति एक श्रेष्ठ मानव बनता है। उन्होंने अभिभावकों से विश्वास दिलाया कि 15 दिनों में बच्चों में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा। प्रथम दिवस शिविर में प्रज्ञा पाक्षिक मीडिया प्रभारी  देवेन्द्र श्रीवास्तव ने “पॉजिटिविटी इन, नेगेटिविटी आउट” सूत्र वाक्य के अंतर्गत प्रार्थना, मंत्रजाप, प्राणायाम, अभिव्यक्ति एवं प्रश्नोत्तरी का अभ्यास कराया। साथ ही बच्चों को प्रतिदिन प्रातः उठकर माता-पिता के चरण स्पर्श करने का संकल्प दिलाया गया। विद्यालय की प्राचार्या चेतना ने गायत्री परिवार के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि देश की भावी पीढ़ी को संस्कारित करने हेतु इस प्रकार के आयोजन अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने शिविर संचालन हेतु विद्यालय के दो कक्ष उपलब्ध कराए। प्रथम दिन शिविर में 31 विद्यार्थियों ने भागीदारी की। शिविर में बच्चों को आनंदमय वातावरण देने हेतु इनडोर गेम्स एवं हास्यासन का भी अभ्यास कराया गया। संचालन अम्बरीश पाठक एवं व्यस्था विष्णु पटेल द्वारा की गई। द्वितीय दिवस की गतिविधियाँ: दूसरे दिन विद्यार्थियों को योगाभ्यास में ताड़ासन, वृक्षासन, गणेश मुद्रा एवं योग मुद्रा का अभ्यास कराया गया। साथ ही अभिभावकों से अनुरोध किया गया कि वे बच्चों को दैनिक संस्कारों की स्मृति दिलाते रहें। संस्कारों के अंतर्गत बच्चों को निम्न श्लोक एवं दिनचर्या सिखाई गई—
प्रातःकाल उठकर माता-पिता एवं बड़ों के चरण स्पर्श करना
“कराग्रे वसते लक्ष्मी…” मंत्र के साथ हथेली दर्शन
आत्मचिंतन एवं दिनभर के श्रेष्ठ कार्यों का संकल्प
पृथ्वी माता को प्रणाम कर दिन की शुरुआत
प्रातःकाल तांबे के पात्र का जल (ऊषापान) ग्रहण करना
जल सदैव बैठकर पीना
स्नान के पश्चात शरीर को तौलिया से रगड़कर पोंछना
इस प्रकार शिविर में बच्चों के शारीरिक, मानसिक एवं नैतिक विकास पर विशेष ध्यान दिया गया।

 

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