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2 बेटियों का जिम्मा, नौकरी, खाना बनाते हुए की तैयारी, छठी बार में अफसर बनीं बरेली की बहू हुमा

कहते हैं ‘आप तब तक नहीं हारते, जब तक आप खुद अपनी हार नहीं मान लेते।’ उत्तर प्रदेश के बरेली में रहने वाली हुमा परवीन की सक्सेस स्टोरी हार न मानने की जज्बे और लगातार कोशिश करने की है। उनका कहना है कि लगे रहिए, छोड़िए मत, बस हार मत मानिए, एक दिन हो जाएगा। वे खुद भी तब तक नहीं रुकीं जब तक उन्होंने अपनी मंजिल हासिल नहीं कर ली। हुमा परवीन उत्तर प्रदेश के बरेली के बहेड़ी गांव के साधारण परिवार से आती हैं। उनके पति फरीदाबाद में एक प्राइवेट कंपनी में असिस्टेंट मैनेजर हैं। हुमा खुद भी हरियाणा की एक मल्टीनेशनल कंपनी में फंक्शनल टेस्टर रही हैं। उन्होंने आईटी इंडस्ट्री में लगभग 10 साल काम किया। इस बीच उनकी शादी हुई और वे मां बनीं। बेटी को जन्म देने से पहले उनकी जिंदगी में ऐसा पहलू जुड़ा जिसने उनकी लाइफ बदलकर रख दी।

मैटरनिटी लीव के दौरान शुरू की UP PCS की तैयारी

हुमा ने अपने पहले बच्चे को जन्म देने से ठीक पहले उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPCS) की संयुक्त राज्य/उच्च अधीनस्थ सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की थी। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब वे मैनरनिटी लीव पर थीं तब उनके पति ने उन्हें कुछ नया ट्राई करने की सलाह दी थी। तब उन्होंने पहली बार यूपी पीसीएस एग्जाम के बारे में सोचा और तैयारी शुरू कर दी।

प्राइवेट जॉब के साथ की तैयारी, लगातार दो साल असफल

हुमा परवीन ने साल 2019 में पहली बार उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित सिविल सेवा या संयुक्त राज्य/उच्च अधीनस्थ सेवा परीक्षा दी। पहले अटेंप्ट में प्रीलिम्स क्लियर नहीं हुआ। मैटरनिटी लीव के बाद जॉब शुरू हो गई थी। एक तरफ प्राइवेट नौकरी और दूसरी तरफ वो सपना जो उन्होंने अपने पति के साथ देखा था। नौकरी करते-करते तैयारी की और साल 2020 में दूसरी बार यूपी पीसीएस परीक्षा दी। फिर से निराशा हाथ लगी। इसके बाद भी उनके कदम डगमगाए नहीं।

2021 में कुछ नंबरों से रह गया मेन्स

दो साल लगातार असफलता के बाद साल 2021 में हुमा को प्रीलिम्स में सफलता मिली। यूपी पीसीएस मेन्स की तैयारी के लिए सबकुछ लगा दिया। कई-कई घंटे तैयारी की। लेकिन कुछ नंबरों की कमी के चलते असफल रहीं। इसी बीच वे दूसरी बार मां बनीं और दूसरी बेटी को जन्म दिया। एक तरफ दो बेटियों की जिम्मेदारी और दूसरी तरफ पीसीएस की प्रिपरेशन। 2022 और 2023 में भी पीसीएस एग्जाम दिया, लेकिन प्रीलिम्स भी क्लियर नहीं हुआ। अब भी उनका हौसला और जज्बा कम नहीं हुआ था।

खाना बनाते-बनाते की तैयारी और अफसर बनीं

5 बार असफलताओं के बाद भी हुमा ने हिम्मत नहीं हारी थी और यही उनकी ताकत बन गई। वे लगातार अपनी कमियों को सुधारने पर काम करती रहीं। सुबह जल्द उठकर काम करना। दोनों बेटियों और घर-परिवार की जिम्मेदारियों के साथ पीसीएस क्रैक करने का सपना। उन्होंने बताया था कि 9 बजे तक जॉब थी। इसके बाद खाना बनाते-बनाते ऑनलाइन वीडियो लगा लेती थी। किचन में काम करते हुए वीडियो से सुनकर कॉन्सेप्ट समझती थी। इस दौरान पति ने काफी साथ दिया। कई बार वो भी खाना बनाने में मदद करते थे। रात को 10:30 बजे तक बच्चों को सुलाने के बाद एक कप स्ट्रॉग कॉफी के साथ पढ़ाई करती थी। इस तरह 24 घंटे में 2 से 3 घंटे पढ़ाई के लिए निकाल पाती थी।

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