
वायरल पोस्ट में दावा किया गया है कि देश में बार-बार हो रही परीक्षा पेपर लीक की घटनाओं और छात्रों के बढ़ते तनाव को रोकने में असफल रहने के कारण धर्मेंद्र प्रधान ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. इतना ही नहीं, पत्र में यह भी लिखा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस स्थिति की जिम्मेदारी लेनी चाहिए.
पीटीआई फैक्ट चेक में दावा पूरी तरह फर्जी पाया गया
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा पत्र वाले पोस्ट को लेकर पीटीआई ने फैक्ट चेक किया. जांच में कथित इस्तीफे का पत्र फर्जी पाया गया. पीटीआई ने जांच में पाया कि यह दस्तावेज न तो शिक्षा मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट या सोशल मीडिया हैंडल पर प्रकाशित हुआ था और न ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर। इसके अलावा, कथित लेटरहेड और हस्ताक्षर मंत्री के आधिकारिक पत्राचार में इस्तेमाल किए गए लेटरहेड और हस्ताक्षर से मेल नहीं खाते थे.
सोशल मीडिया पर किया गया था यह दावा
23 जुलाई को ‘अमरजीत राव’ (@AmarjeetRa95545) नामक एक एक्स यूजर ने इस कथित पत्र को शेयर किया था. इसके बाद देखते ही देखते यह पत्र कई अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी शेयर किया जाने लगा. मालूम हो सीजेपी और अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. सीजेपी के समर्थन में बॉलीवुड के कई कलाकार और विपक्षी नेता भी उतर गए हैं. सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगा.


