
अन्नदाताओं की समस्याओं पर चल रहे संवाद के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने आज ‘आवासदाताओं’ यानी आवास उपलब्ध कराने वाले रियल एस्टेट क्षेत्र की लंबित व्यावहारिक कठिनाइयों पर चर्चा की। वल्लभ भवन में मुख्य सचिव श्री अशोक बर्णवाल के साथ क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज सिंह मीक के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल की लगभग एक घंटे चली बैठक में नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे भी उपस्थित रहे।
क्रेडाई ने मुख्य सचिव को 10 पृष्ठ का 29 सूत्रीय प्रतिवेदन सौंपकर भोपाल मास्टर प्लान, रेरा, कलेक्टर गाइडलाइन से जुड़े शुल्क, स्टाम्प एवं पंजीयन शुल्क, संपत्ति कर, बिजली, पर्यावरण, एसटीपी, एफएआर और विकास अनुमतियों की समस्याओं से अवगत कराया।
सभी विभागों के साथ होगा समाधान सम्मेलन
बैठक का प्रमुख परिणाम रियल एस्टेट एवं शहरी विकास से जुड़े सभी विभागों की सहभागिता वाला एक दिवसीय राज्यस्तरीय समाधान सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय रहा। मुख्य सचिव ने श्री दुबे को इसकी रूपरेखा बनाने के निर्देश दिए। सम्मेलन में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, क्रेडाई मध्यप्रदेश और सभी नगर अध्यायों के पदाधिकारी शामिल होंगे। राष्ट्रीय क्रेडाई से अन्य राज्यों की नीतियां, श्रेष्ठ कार्यप्रणालियां और प्रतिनिधि आमंत्रित किए जाएंगे।
रेरा नियुक्तियां शीघ्र, एनओसी घटकर तीन
मुख्य सचिव ने रेरा अध्यक्ष एवं तकनीकी सदस्य की नियुक्ति शीघ्र करने, सीए प्रमाणपत्र की गणना संबंधी त्रुटियां सुधारने और परियोजना समाप्त करने की समय-सीमा पर व्यावहारिक निर्णय लेने का आश्वासन दिया। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि कारोबार सुगमता के अंतर्गत अनुमतियों के लिए पूर्व में आवश्यक 12 से अधिक एनओसी घटाकर तीन कर दी गई हैं और इसकी अधिसूचना जारी हो चुकी है।
भोपाल मास्टर प्लान पर नहीं मिली समय-सीमा
क्रेडाई ने कहा कि 2005 के बाद नया मास्टर प्लान प्रकाशित नहीं होने से राजधानी का नियोजित विस्तार और किफायती आवास प्रभावित हो रहे हैं। उपयोगी भूमि उपयोग सीमित होने तथा जमीन और अनुमतियों की लागत बढ़ने से नए आवासीय क्षेत्रों का विकास कठिन हो गया है। विस्तृत चर्चा के बावजूद शासन ने मास्टर प्लान के प्रकाशन की कोई निश्चित समय-सीमा नहीं बताई। विभाग ने कहा कि मास्टर प्लान के विलंब से शहरी सुधार न रुकें, इसके लिए भूमि विकास नियमों को व्यापक रूप से लागू करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
गाइडलाइन से जुड़े शुल्कों का बनेगा तुलनात्मक विवरण
क्रेडाई ने बताया कि कलेक्टर गाइडलाइन से जुड़े विकास शुल्कों और दरों की वार्षिक वृद्धि का भार अंततः मकान खरीदारों पर पड़ रहा है। क्रेडाई को विभिन्न शुल्कों एवं अन्य राज्यों की व्यवस्थाओं का तुलनात्मक विवरण विभाग को देने का सुझाव मिला। अपर मुख्य सचिव ने परियोजनाओं में एसटीपी का नियमित संचालन और अग्नि सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया। अमृत योजना की सीवरेज लाइन के निकट स्थित परियोजनाएं निर्धारित शुल्क देकर उससे जुड़ सकेंगी।
‘कमाल का भोपाल’ रिपोर्ट और राजा भोज की प्रतिमा भेंट
मनोज सिंह मीक ने मुख्य सचिव को राजधानी की सकारात्मक पहचान और आर्थिक विकास पर केंद्रित ‘कमाल का भोपाल’ रिपोर्ट सौंपकर अभियान और भावी संभावनाओं से अवगत कराया। पूर्व मुख्य सचिव के निर्देश पर तैयार इस रिपोर्ट के कुछ सुझावों पर काम प्रारंभ हुआ है, जबकि व्यापक क्रियान्वयन शेष है। मुख्यमंत्री द्वारा नागरिकों को समर्पित यह अभियान राजधानी के गौरव, नागरिक सहभागिता और विकास की आकांक्षाओं को एक मंच देता है। मुख्य सचिव को राजा भोज की नव-सृजित कलात्मक प्रतिमा भी भेंट की गई।
श्री मीक ने कहा, “अन्नदाताओं की तरह आवासदाता भी लंबे समय से अपनी व्यावहारिक कठिनाइयों से सरकार को अवगत कराते रहे हैं। आवास क्षेत्र की बाधाओं का सीधा प्रभाव घर खरीदारों, निर्माण श्रमिकों, रोजगार, निवेश और शहरी अधोसंरचना पर पड़ता है। इनका समयबद्ध समाधान व्यापक जनहित और प्रदेश के आर्थिक विकास से जुड़ा है।”
प्रतिनिधिमंडल में सचिव सुनील कुमार गुप्ता, कोषाध्यक्ष संजीव सिंह ठाकुर, उपाध्यक्ष जयंत भंडारी तथा यूथ क्रेडाई से रौनक साहिता शामिल थे।

