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मिस्बाह ने उठाए सवाल: क्या पाकिस्तान में विदेशी और घरेलू कोच के साथ होता है अलग बर्ताव? पूर्व कप्तान ने घेरा

पाकिस्तान क्रिकेट की मुख्य समस्या बताई
मिस्बाह ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान क्रिकेट की मुख्य समस्या यह है कि वहां निरंतरता, धैर्य और एक लंबी अवधि की योजना की कमी है। उन्होंने कहा, हमें दबाव में आकर घबराना नहीं चाहिए और दिखावे के बदलाव नहीं करने चाहिए। हमें प्रदर्शन और स्थिति का विश्लेषण करना चाहिए और उसके बाद आगे बढ़ने का फैसला लेना चाहिए। दुर्भाग्य से, हम पाकिस्तान क्रिकेट में प्रतिक्रियावादी फैसले लेने के आदी हो चुके हैं।भारतीय क्रिकेट का दिया उदाहरण
भारतीय क्रिकेट की मिसाल देते हुए मिसबाह ने कहा कि भारत इसलिए आगे बढ़ गया क्योंकि वे घबराते नहीं हैं और अपनी योजनाओं पर कायम रहते हैं। उन्होंने भारतीय सेटअप में रोहित शर्मा और विराट कोहली का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक, भारत आज पाकिस्तान पर हावी इसलिए है क्योंकि उनके खिलाड़ियों को ज्यादा एक्सपोजर मिलता है और वे दबाव में प्रदर्शन करने के लिए मानसिक रूप से अधिक मजबूत होते हैं।
मिस्बाह ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान क्रिकेट की मुख्य समस्या यह है कि वहां निरंतरता, धैर्य और एक लंबी अवधि की योजना की कमी है। उन्होंने कहा, हमें दबाव में आकर घबराना नहीं चाहिए और दिखावे के बदलाव नहीं करने चाहिए। हमें प्रदर्शन और स्थिति का विश्लेषण करना चाहिए और उसके बाद आगे बढ़ने का फैसला लेना चाहिए। दुर्भाग्य से, हम पाकिस्तान क्रिकेट में प्रतिक्रियावादी फैसले लेने के आदी हो चुके हैं।भारतीय क्रिकेट का दिया उदाहरण
भारतीय क्रिकेट की मिसाल देते हुए मिसबाह ने कहा कि भारत इसलिए आगे बढ़ गया क्योंकि वे घबराते नहीं हैं और अपनी योजनाओं पर कायम रहते हैं। उन्होंने भारतीय सेटअप में रोहित शर्मा और विराट कोहली का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक, भारत आज पाकिस्तान पर हावी इसलिए है क्योंकि उनके खिलाड़ियों को ज्यादा एक्सपोजर मिलता है और वे दबाव में प्रदर्शन करने के लिए मानसिक रूप से अधिक मजबूत होते हैं।
उन्होंने कहा, ‘हमारे युवा खिलाड़ी बहुत ज्यादा सफेद गेंद का क्रिकेट खेल रहे हैं और लाल गेंद के क्रिकेट से उनका परिचय सीमित है। चार दिवसीय क्रिकेट पर्याप्त नहीं खेला जा रहा है, जिसका मतलब है कि दबाव में उनके बिखरने की संभावना अधिक होती है।’ मिस्बाह ने कहा कि भारत को आगे बढ़ने और खुद को ढालने में समय लगा है और उन्होंने 90 के दशक के बाद अपनी व्यवस्था में क्रमिक निवेश किया है, क्योंकि इस व्यवस्था का कोई तुरंत समाधान नहीं है।




