8वां डॉ. वी. जी. पटेल स्मृति व्याख्यान एवं राष्ट्रीय एंटरप्रेन्योर ट्रेनर-मोटिवेटर पुरस्कार
इस श्रृंखला के आठवें व्याख्यान का आयोजन संस्थान में ‘स्थानीय सामर्थ्य से राष्ट्रीय समृद्धि की ओर’ विषय पर किया गया। • इस अवसर पर राष्ट्रीय एंटरप्रेन्योरशिप ट्रेनर/एजुकेटर/मेंटर पुरस्कार भी प्रदान किया गया।

अहमदाबाद, 7 सितंबर, 2026: एसोसिएशन ऑफ लेडी एंटरप्रेन्योर्स ऑफ इंडिया की अध्यक्ष श्रीमती रमा देवी कन्नेगंटी ने वी. जी. पटेल स्मृति व्याख्यान श्रृंखला के 8वें व्याख्यान में ‘स्थानीय सामर्थ्य से राष्ट्रीय समृद्धि की ओर’ विषय पर अपना संबोधन दिया।
इस अवसर पर पी. पी. सवानी ग्रुप के चेयरपर्सन श्री महेश सवानी भी उपस्थित रहे।
ईडीआईआई ने 4 अप्रैल, 2019 को अपने संस्थापक पद्म श्री डॉ. वी. जी. पटेल को खो दिया था। उद्यमिता के क्षेत्र में डॉ. पटेल के उल्लेखनीय योगदान को स्मरण करने के लिए संस्थान ने 2019 में वार्षिक व्याख्यान श्रृंखला की शुरुआत की। प्रत्येक वर्ष यह दिन उद्यमिता से जुड़े किसी विषय और भारतीय संदर्भ में उसकी प्रासंगिकता पर विचार-विमर्श के लिए समर्पित किया जाता है।
ईडीआईआई के महानिदेशक डॉ. सुनील शुक्ला ने उद्यमिता को एक व्यवस्थित और सीखे जा सकने वाले विज्ञान के रूप में स्थापित करने में डॉ. पटेल के असाधारण योगदान को याद किया और देश के सामाजिक एवं आर्थिक कल्याण में इस क्षेत्र के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “उद्यमिता ने एक लंबा सफर तय किया है और आज इसे विकास के इंजन के रूप में मान्यता मिली है। सरकार, उद्योग और शिक्षा जगत के समन्वय तथा अनुकूल नीतिगत व्यवस्था के माध्यम से देश एक बेहतर स्टार्टअप इकोसिस्टम तैयार करने के लिए लगातार कदम उठा रहा है। इन सभी प्रयासों के बीच, ईडीआईआई शिक्षा जगत, सरकार और कॉरपोरेट्स के सहयोग से परिणाम-केंद्रित पहलों के माध्यम से उद्यमियों और उनकी इनोवेटिव सोच को प्रोत्साहित करने की बड़ी जिम्मेदारी निभा रहा है।”
ईडीआईआई के महानिदेशक डॉ. सुनील शुक्ला ने उद्यमिता को एक सुव्यवस्थित और सीखे जा सकने वाले विज्ञान के रूप में स्थापित करने में डॉ. पटेल के असाधारण योगदान को याद किया और देश के सामाजिक एवं आर्थिक कल्याण में उद्यमिता के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “उद्यमिता ने एक लंबा सफर तय किया है और अब इसे विकास के इंजन के रूप में मान्यता मिल चुकी है। सरकार, उद्योग और शिक्षा जगत के समन्वय तथा अनुकूल नीतिगत व्यवस्था के माध्यम से देश एक अनुकूल स्टार्टअप इकोसिस्टम तैयार करने के लिए लगातार कदम उठा रहा है। इन सभी प्रयासों के बीच, ईडीआईआई शिक्षा जगत, सरकार और कॉरपोरेट्स के सहयोग से परिणाम-केंद्रित पहलों के माध्यम से उद्यमियों और उनकी इनोवेटिव सोच को प्रोत्साहित करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहा है।”
‘स्थानीय सामर्थ्य से राष्ट्रीय समृद्धि की ओर’ विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए विशिष्ट वक्ता सुश्री रमा देवी ने कहा, “भारत आज अपनी आर्थिक यात्रा के एक बेहद महत्वपूर्ण पड़ाव पर खड़ा है। एक मजबूत घरेलू बाजार, डिजिटल अर्थव्यवस्था में तेज़ वृद्धि, जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्टम और युवा आबादी के साथ हमारे पास विकास के अगले चरण की मजबूत नींव मौजूद है। हमारा घरेलू बाजार अपने आप में हमारी एक बहुत बड़ी ताकत है। साथ ही, मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसी पहलें उद्यमियों को इनोवेशन करने, अपने व्यवसायों को औपचारिक स्वरूप देने और उनका विस्तार करने के नए अवसर प्रदान कर रही हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म गांवों और छोटे शहरों के छोटे व्यवसायों को भी देशभर के ग्राहकों और तेजी से बढ़ते वैश्विक बाजारों तक पहुंचने में सक्षम बना रहे हैं। भारत की अर्थव्यवस्था पहले ही लगभग $3.9 ट्रिलियन की हो चुकी है और देश दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यदि हम मजबूत विकास की इस गति को बनाए रखते हैं और अपनी घरेलू ताकत को मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटलाइजेशन, इनोवेशन और निर्यात के साथ जोड़ते हैं, तो हमारे सामने अवसरों की अपार संभावनाएं हैं। विभिन्न अनुमानों और दीर्घकालिक आकांक्षाओं से संकेत मिलता है कि अगले लगभग एक दशक में भारत के $10–12 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने की संभावना है।”
विशिष्ट अतिथि श्री महेश सवानी ने प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किए और उपस्थित लोगों को संबोधित भी किया। उन्होंने कहा, “उद्यमिता व्यक्ति की सर्वश्रेष्ठ क्षमताओं को सामने लाती है। यह संपदा सृजन में मदद करती है, जिसका उपयोग समाज की प्रगति के लिए सार्थक रूप से किया जा सकता है। प्रत्येक उद्यमी को समाज को कुछ वापस देने की अपनी जिम्मेदारी के प्रति सजग रहना चाहिए। यदि प्रत्येक सफल उद्यमी सोच-समझकर अपने तरीके से समाज के हित में योगदान देने का निर्णय ले, तो सकारात्मक प्रभाव का एक निरंतर चक्र आसानी से बनाया जा सकता है। समय के साथ एक छोटा-सा प्रयास भी बहुत बड़ा प्रभाव पैदा कर सकता है। इसलिए मेरा मानना है कि एक उद्यमी को उत्कृष्टता हासिल करने के लिए निरंतर इनोवेशन करते रहना चाहिए और साथ ही समाज में उन कमियों और जरूरतों पर भी ध्यान देना चाहिए, जहां वह सार्थक योगदान दे सकता है। ऐसा दृष्टिकोण ही एक स्थायी विरासत का निर्माण कर सकता है। सही मूल्यों और नैतिकता से युक्त उद्यमियों को तैयार करने के लिए मैं ईडीआईआई को बधाई देता हूं।”


