
गणेश चतुर्थी का त्योहार आज यानी 14 सितंबर को देशभर में श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। इस दिन भक्त भगवान गणेश की प्रतिमा को घर लाकर विधि-विधान से उनकी पूजा करते हैं और उन्हें तरह-तरह के भोग अर्पित करते हैं। मान्यता है कि बप्पा को उनकी पसंदीदा चीजों का भोग लगाने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं। अगर आप भी इस गणेश चतुर्थी घर में गणपति जी की स्थापना कर रहे हैं तो पूजा की थाली में इन प्रिय भोगों को जरूर शामिल करें।
भगवान गणेश को प्रिय हैं ये भोग
गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश को भोग लगाते समय सात्विकता का विशेष ध्यान रखा जाता है। ज्योतिष एक्सपर्ट और वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, बप्पा को कुछ खास चीजें बेहद प्रिय मानी जाती हैं। मान्यता के अनुसार, इन चीजों का भोग श्रद्धा के साथ अर्पित करने से घर में सुख-शांति और सकारात्मकता बनी रहती है।

मोदक
भगवान गणेश का नाम आते ही सबसे पहले मोदक का ध्यान आता है। धार्मिक मान्यताओं में मोदक को बप्पा का सबसे प्रिय भोग माना जाता है। गणेश चतुर्थी पर चावल के आटे, ताजे नारियल और गुड़ से बने 21 उकडीचे मोदक भगवान गणेश को अर्पित किए जा सकते हैं। माना जाता है कि मोदक का भोग लगाने से बप्पा प्रसन्न होते हैं।
लड्डू
गणेश जी को लड्डू भी बेहद प्रिय माने जाते हैं। इस दिन आप शुद्ध देसी घी से बने बेसन या मोतीचूर के लड्डू का भोग लगा सकते हैं। मान्यता के अनुसार, लड्डू का पीला रंग गुरु यानी बृहस्पति से जुड़ा माना जाता है और इसे शुभता व सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इसे गणपति जी को अर्पित करना शुभ माना जाता है।
केले का जोड़ा
गणेश जी को भोग लगाते समय केले का भी इस्तेमाल किया जाता है। मान्यता है कि बप्पा को एक अकेला केला नहीं, बल्कि दो पके हुए केले का जोड़ा अर्पित करना चाहिए। इसलिए अगर आप पूजा की थाली में केला रख रहे हैं तो हमेशा जोड़े में ही रखें।

दूर्वा, गुड़ और नारियल
भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा का खास महत्व माना जाता है। भोग की थाली में 21 गांठ दूर्वा के साथ शुद्ध गुड़ और ताजे नारियल की गिरी भी रख सकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दूर्वा भगवान गणेश को बहुत प्रिय है और इसे पूजा में अर्पित करने से बप्पा की कृपा प्राप्त होती है।
केसरिया खीर और पंचामृत
गणेश चतुर्थी पर बप्पा को दूध, मखाने और चावल से बनी केसरिया खीर का भोग भी लगाया जा सकता है। इसके साथ पंचामृत भी अर्पित करें। मान्यता है कि भगवान गणेश को यह भोग प्रिय है। श्रद्धा के साथ इसे अर्पित करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहने की कामना की जाती है।
पूरन पोली
महाराष्ट्र समेत कई जगहों पर गणेश उत्सव के दौरान पूरन पोली भी बनाई जाती है। चना दाल, गुड़ और शुद्ध घी से तैयार पूरन पोली भगवान गणेश को भोग में अर्पित की जा सकती है। ज्योतिष एक्सपर्ट मान्या के अनुसार, धार्मिक मान्यता में इस भोग को बुद्धि और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। इसे अर्पित करने से परिवार के सदस्यों के लिए तरक्की और सफलता की कामना की जाती है।
सूजी का शीरा
गणेश जी को सूजी का शीरा यानी हलवा भी भोग में चढ़ाया जा सकता है। इसे सूजी, शुद्ध घी, चीनी और ड्राई फ्रूट्स से आसानी से तैयार किया जाता है। घर में बना यह सात्विक भोग भगवान गणेश को श्रद्धा से अर्पित करें। मान्यता है कि इससे परिवार में प्रेम, सुख और शांति का माहौल बना रहता है।

बप्पा को भोग लगाते समय इन बातों का रखें ध्यान
गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश को भोग लगाते समय कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना भी जरूरी माना जाता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, भोग लगाते समय पूजा करने वाले व्यक्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है। भोग रखने के लिए चांदी, पीतल, तांबे या केले के पत्ते का इस्तेमाल किया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं में कांच, प्लास्टिक या लोहे के बर्तन में भगवान को भोग लगाने से बचने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा गणेश जी की पूजा में तुलसी दल का इस्तेमाल नहीं किया जाता। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश को तुलसी चढ़ाना वर्जित माना गया है। इसलिए भोग और पूजा की सामग्री तैयार करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें।
आखिर में सबसे जरूरी बात यह है कि भगवान को भोग लगाते समय मन में श्रद्धा और भक्ति का भाव होना चाहिए। मान्यता है कि सच्चे मन से अर्पित किया गया सात्विक भोग ही बप्पा को सबसे अधिक प्रिय होता है।

