बाहर बाहर भटक रहे हम, छाया को अपनाने को। मृग तृष्णा के रेगिस्तान में, अपनी प्यास बुझाने को।। —कवि लायन अरुण कुमार सोनी।
प्रभात साहित्य परिषद द्वारा महाराणा प्रताप कॉलेज में हिंदी दिवस पर काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ

विदिशा (मध्य प्रदेश)।प्रभात साहित्य परिषद (भोपाल) की जिला इकाई विदिशा द्वारा 14 सितंबर ‘हिंदी दिवस’ के पावन अवसर पर स्थानीय महाराणा प्रताप कॉलेज में एक भव्य कवि गोष्ठी का सफल आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद के अध्यक्ष दिनेश मोहन श्रीवास्तव ने की, जबकि कुशल मंच संचालन परिषद के सचिव सत्येंद्र ‘सत्यज’ द्वारा किया गया। जिनके संचालन ने लोगों को आखिरी तक बांधकर रखा। जिसकी सराहना की गई।
सरस्वती वंदना से काव्य संध्या का शुभारंभ
कवि गोष्ठी की शुरुआत देवी सरस्वती की वंदना “हे शारदे मां…” से हुई, जिसका सुमधुर गायन प्रदीप जैन ‘पारस’ ने किया। इसके पश्चात उपस्थित रचनाकारों ने अपनी-अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया:
के.एन. शर्मा: हिंदी के गौरव पर बल देते हुए पढ़ा — “हिंदी के बिना सब अधूरा है… बदलती जिंदगी का आधार…”
कालूराम ‘पथिक’: सामाजिक चेतना जगाते हुए कहा — “अजीब शहर के रास्ते और गलियाँ…”
अरुण कुमार सोनी: आध्यात्मिक भाव व्यक्त करते हुए कहा — “सुख तो अपने भीतर है…”
डॉक्टर शीलचंद पालीवाल:’—पर्यावरण पर का महत्व के ऊपर आपने कहा- पेड़ हमें देते मिट्टी पानी और…. ।
मंच पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रख्यात कवि शील चंद्र पालीवाल, युगल श्रीवास्तव, कालूराम ‘पथिक’, के.एन. शर्मा तथा लायन अरुण कुमार सोनी मंचासीन रहे।
कार्यक्रम में गोवर्धन राजेरिया, हरगोविंद मैथिल, रूद्र शर्मा, जगमोहन शर्मा, सोवरन सिंह, अभिषेक सोनी, नज़ीर नूरी, कोमल सिंह कोमल, सुरेंद्र सिंह, श्रवण सिंह राठौड़, डाॅ. श्याम सिंह, संतोष सागर, संजय चतुर्वेदी, उदय ढोली, विवेक श्रीवास्तव, सुमिता सिंह, योगेंद्र सिंह, प्रियम आचार्य, दीपक रघुवंशी एवं शिवानी राठौर ने भी अपनी रचनाओं से माहौल को सुमधुर बना दिया।
कार्यक्रम में में दिवंगत स्व. जगदीश श्रीवास्तव एवं श्रीमती शशिप्रभा चावला को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। तत्पश्चात परिषद अध्यक्ष दिनेश मोहन श्रीवास्तव द्वारा उपस्थित अतिथियों, साहित्यकारों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया गया।



