डिजिटल समृद्धि का लाभ जनता को मिले, भुगतान पर नया बोझ क्यों: मनोज मीक
यूपीआई शुल्क की समीक्षा हो; बिक्री पर मामूली दिखने वाली दर मुनाफे का बड़ा हिस्सा ले सकती है
फेडरेशन ऑफ मध्यप्रदेश चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रबंधकारिणी सदस्य एवं क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने नई यूपीआई एमडीआर व्यवस्था के आर्थिक प्रभाव की सार्वजनिक समीक्षा की मांग की है। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान की लागत तय करते समय व्यापारियों की वास्तविक कमाई, उपभोक्ताओं की क्रयशक्ति और अर्थव्यवस्था को मिलने वाले व्यापक लाभों का आकलन आवश्यक है।
मीक ने कहा, “अप्रैल–जून 2026 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.8% रही, लेकिन अगस्त में खुदरा महंगाई 4.82% और खाद्य महंगाई 5.95% दर्ज हुई। तेज आर्थिक विकास का लाभ परिवारों की बचत और छोटे कारोबार की कमाई में भी दिखाई देना चाहिए। लागू करों, उपकरों और अनुपालन की लागत के बीच नया भुगतान शुल्क जोड़ने का समय और औचित्य सवालों के घेरे में है।”
नई व्यवस्था में 15 अक्टूबर से पात्र ₹2,000 से अधिक के व्यापारी भुगतानों पर 0.4% एमडीआर, अधिकतम ₹300 प्रति लेन-देन, लागू होगा। ₹2,000 तक के भुगतान तथा निर्धारित छोटे-व्यापारी श्रेणी में मासिक ₹1 लाख तक यूपीआई प्राप्तियां रखने वालों को छूट है। कुछ क्षेत्रों के लिए विशेष दरें निर्धारित हैं।
उन्होंने उदाहरण दिया, “किसी पात्र ₹10,000 की बिक्री पर शुल्क से पहले शुद्ध लाभ 2%, अर्थात ₹200 हो, तो ₹40 एमडीआर के बाद ₹160 बचेंगे। बिक्री पर 0.4% दिखने वाला शुल्क उस बिक्री के लाभ का 20% ले लेगा। यह उदाहरण है; पूरे कारोबार पर असर उसकी पात्र बिक्री, वास्तविक मार्जिन और उपलब्ध छूट पर निर्भर करेगा। अधिक कारोबार होना, अधिक कमाई होने का प्रमाण नहीं है।”
सरकार के अनुसार लगभग 96% व्यापारी लेन-देन अप्रभावित रहेंगे। मीक ने कहा कि यह लेन-देन की संख्या का आंकड़ा है; इससे प्रभावित कारोबार की रकम या मुनाफे में हिस्सेदारी स्पष्ट नहीं होती। क्षेत्रवार प्रभाव सामने आना चाहिए। ग्राहक से सीधे एमडीआर वसूलने पर रोक जरूरी है, लेकिन उससे व्यापार की लागत समाप्त नहीं होती। प्रतिस्पर्धा और मांग के अनुसार उसका हिस्सा कम मुनाफे, घटती छूट अथवा कीमतों में समायोजन के रूप में सामने आ सकता है।
उन्होंने कहा, “एआई से उत्पादकता बढ़ाने और सार्वभौमिक बुनियादी आय जैसे विचारों पर चर्चा के दौर में तकनीकी प्रगति से नागरिकों की आर्थिक सुरक्षा मजबूत होनी चाहिए। ऐसी आय अपने-आप सुनिश्चित नहीं होगी; उसके लिए नीतिगत विकल्प चुनने होंगे।” एआई के लाभ व्यापक बनाने के लिए सामाजिक सुरक्षा और राजकोषीय नीति की भूमिका पर आईएमएफ के शोधकर्ताओं ने भी जोर दिया है।
मीक ने कहा कि सुरक्षित भुगतान प्रणाली के संचालन की वास्तविक लागत है। सरकार को उसका स्वतंत्र परीक्षण, शुल्क-संग्रह का उपयोग और सेवा-सुधार के लक्ष्य सार्वजनिक करने चाहिए। कम मार्जिन वाले कारोबार के लिए रियायती या सीमित निश्चित शुल्क, छोटे व्यापारियों की छूट का पुनर्मूल्यांकन और पारदर्शी बजटीय सहायता के विकल्प परखे जाएं। उन्होंने कहा, “यूपीआई को अपनाने वाले नागरिकों और व्यापारियों का भरोसा हमारी आर्थिक पूंजी है। नई शुल्क व्यवस्था को इस भरोसे, कारोबार की व्यवहार्यता और जनता की क्रयशक्ति की कसौटी पर परखा जाना चाहिए।”
— मनोज मीक
प्रबंधकारिणी सदस्य, फेडरेशन ऑफ मध्यप्रदेश चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफएमपीसीसीआई)
कार्याकारिणी सदस्य, भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (बीसीसीआई)
अध्यक्ष, क्रेडाई भोपाल



