भोपाल के मास्टर प्लान 2047 के परिप्रेक्ष्य में साहित्य, कला संस्कृति संबद्ध संस्थाओं की बैठक

भोपाल 1 अक्टूबर। भोपाल के मास्टर प्लान 2047 के घोषित होने के बाद इसमें साहित्य, कला एवं संस्कृति हेतु उपयुक्त व्यवस्थाओं के न होने पर डॉ देवेंद्र दीपक ने साहित्यिक संस्थाओं के अध्यक्षों का ध्यान इस ओर दिलाया कि अभी सही समय है, जब संस्थाएं अपनी उचित व्यवस्थाओं हेतु प्लान के संदर्भ में शासन के समक्ष अपनी बात रख सकती हैं।
इस हेतु सभी संस्थाओं की अध्यक्षों की बैठक का आयोजन दुष्यंत संग्रहालय के सभागार में किया गया। बैठक में साहित्य अकादमी के निदेशक एवं हिन्दी भवन के मंत्री संचालक डॉ विकास दवे, दुष्यंत संग्रहालय के अध्यक्ष श्री रामराव वामनकर, उपाध्यक्ष एवं क्रेडाई के अध्यक्ष श्री मनोज मीक, सचिव करुणा राजुरकर, बाल कल्याण एवं बाल साहित्य शोध केंद्र के निदेशक श्री महेश सक्सेना, रामायण शोध संस्थान के निदेशक डॉ राजेश श्रीवास्तव, मध्य प्रदेश लेखक संघ के अध्यक्ष राजेंद्र गट्टानी, लेखिका संघ अध्यक्ष डॉ साधना गंगराड़े, बैंकर्स साहित्य एवं कला परिषद के अध्यक्ष श्री गोकुल सोनी, वरिष्ठ नागरिक काव्य मंच की अध्यक्ष जया आर्य ने साहित्य, कला, एवं संस्कृति के क्षेत्र में नये प्लान में क्या क्या वांछित है। इस पर अपने अपने सुझाव दिए। इस संदर्भ में दुष्यंत संग्रहालय, बैंकर्स साहित्य एवं कला परिषद, लेखिका संघ द्वारा जो लिखित मांगपत्र/प्रस्ताव पत्र तैयार किए गए थे, उनको भी प्रस्तुत किया। बैठक इस निष्कर्ष पर पहुंची की प्रत्येक संस्था अपना पृथक मांगपत्र तैयार करे साथ ही एक संयुक्त मांगपत्र श्री मनोज मीक जी तैयार कराकर संयुक्त रूप से शासन को दिए जाएं ताकि संस्थाओं हेतु भवन, सभागार, साहित्यकार आवास एवं थियेटर्स आदि की उपयुक्त व्यवस्था होकर प्लान में शामिल हो। इस कार्य में सभी संस्थाओं का सहयोग अपेक्षित है एवं शासन से भी अपेक्षा हैं कि इन मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार कर उपयुक्त व्यवस्थाओं हेतु प्रावधान किए जाएं।




