बच्चे मोबाईल का उपयोग करें, लेकिन अभिभावक उन पर नज़र रखें – श्यामा गुप्ता ।

भोपाल । वरिष्ठ बाल साहित्यकार श्रीमती श्यामा गुप्ता ‘ दर्शना ‘ ने कहा है कि बच्चों को मोबाईल का उपयोग करना चाहिए, लेकिन बड़ों का कर्तव्य है कि वे इस दौरान बच्चों पर नज़र जरूर रखें । यह भी ध्यान रखा जाए कि बच्चों का स्क्रीन टाइम सीमित हो । श्रीमती गुप्ता ने उक्त विचार बाल साहित्य शोध केन्द्र में साक्षात्कार श्रृंखला ‘ बाल साहित्य संवाद – 2’ में उनसे किए गए प्रश्नों के उत्तर में व्यक्त किए ।
वरिष्ठ कवि/लेखक श्री गोकुल सोनी द्वारा लिए गए साक्षात्कार में उन्होंने अपनी साहित्यिक यात्रा और जीवन में इसके प्रभाव पर विस्तार से चर्चा की । उन्होंने बताया कि उनका बचपन आदिवासी बहुल इलाक़े जुन्नारदेव में बीता था । वहाँ आदिवासी बच्चों की दयनीय स्थिति ने मेरी जीवन पर बड़ा प्रभाव डाला । उन बच्चों की मैं अपने स्तर पर मदद किया करती थी । वहीं से मुझे इनके दर्द और पीड़ा को बाल साहित्य के माध्यम समाज के सामने रखने की प्रेरणा मिली । उन्होंने आगे कहा कि लोरी और प्रभाती बच्चों पर भावनात्मक प्रभाव डालती हैं, इसलिए बच्चों को इनसे जोड़े रखना चाहिए । यह पूछे जाने पर कि अच्छे बाल साहित्य के क्या गुण होते हैं, श्रीमती गुप्ता ने कहा कि वो साहित्य सबसे अच्छा होता है जो बच्चों के मनोविज्ञान को समझते हुए रोचकता से लिखा जाए । उन्होंने बाल विद्यार्थियों के साथ हो रहीं मारपीट की घटनाओं पर चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चों से मारपीट कोई हल नहीं है । उन्हें तर्कों के साथ प्यार से समझाया जाना चाहिए । मारपीट से बच्चों में उद्दंडता आ जाती है । साथ ही उन्होंने चेताया कि अपने बच्चे की तुलना किसी अन्य बच्चे से नहीं करना चाहिए । इससे बच्चे में हीनभावना आती है ।
श्रीमती गुप्ता ने बाल साहित्य के लिए सरकारी प्रयासों को नाकाफ़ी बताते हुए कहा कि सरकार को बच्चों में मानसिक विकास और बाल साहित्य के संवर्धन के लिए बाल साहित्य मेलों का आयोजन और गांवों में लाइब्रेरी खोली जानी चाहिए । इस अवसर कार्यक्रम में मौजूद लोगों के आग्रह पर श्रीमती गुप्ता ने अपनी तीन प्रिय बाल कविताओं ” हम ज़मीन के नन्हें तारे, सुगंध बन महको और बेरहम वर्षा ” का वाचन किया । यहां यह उल्लेख करना आवश्यक है कि श्रीमती श्यामा गुप्ता “दर्शना” की बाल साहित्य पर 12 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और उन्हें कई सम्मानों से नवाज़ा का चुका है । उन्हें बाल साहित्य की पत्रिका ‘ देवपुत्र ‘ और ‘ बाल वाटिका ‘ पढ़ना अच्छा लगता है ।
कार्यक्रम में उपस्थित वरिष्ठ कवि अशोक धमेनियां और संगीता भारद्वाज ने श्रीमती गुप्ता से बाल साहित्य के सम्बन्ध में अनेक प्रश्न पूछे ।
कार्यक्रम की शुरुआत में बाल साहित्य शोध केन्द्र के निदेशक और वरिष्ठ साहित्यकार श्री महेश सक्सेना जी ने आमंत्रित अतिथियों का स्वागत किया और साक्षात्कार श्रृंखला की आगामी कड़ियों की जानकारी दी । अंत में वरिष्ठ लेखिका डॉ रंजना शर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया । कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ रामवल्लभ आचार्य, चर्चित नवगीतकार और ” वागर्थ ” समूह के संस्थापक मनोज जैन ‘ मधुर ‘,
बाल साहित्यकार डॉ मीनू पाण्डेय ‘ नयन ‘, लेखिका संघ की अध्यक्ष साधना गंगराड़े, मालती बसंत, कुमकुम गुप्ता, बिहारीलाल सोनी सहित कई साहित्यधर्मी मौजूद थे ।
प्रस्तुति
– सुनील चतुर्वेदी




