कामधेनु मंगल वाटिका में आयोजित तीन दिवसीय ओशो ध्यान शिविर “आनंदम” का सफल समापन महर्षि आलोक और योगाचार्य डॉ. श्याम सिंह के सानिध्य में साधकों ने सीखीं योग एवं ध्यान साधना की बारीकियां

विदिशा:
मध्य प्रदेश स्वर्णकार समाज कल्याण समिति के प्रादेशिक अध्यक्ष लायन अरुण कुमार सोनी ने जानकारी देते हुए बताया कि विदिशा स्थित कामधेनु मंगल वाटिका में 25 सितंबर से 27 सितंबर तक तीन दिवसीय ओशो ध्यान शिविर “आनंदम” का भव्य एवं सफल आयोजन किया गया। इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं समाजबंधुओं ने हिस्सा लेकर योग, प्राणायाम और ध्यान साधना का लाभ उठाया।
प्रातःकालीन सत्रों में डॉ. श्याम सिंह जी का सराहनीय योगदान:
शिविर के दौरान प्रातःकालीन सत्रों में योगाचार्य डॉ. श्याम सिंह जी द्वारा योग एवं प्राणायाम की विशेष आरोग्य कक्षाएं संचालित की गईं। डॉ. श्याम सिंह जी ने साधकों को शरीर को निरोगी रखने, प्राणायाम के माध्यम से मानसिक शांति प्राप्त करने तथा स्वांस-प्रश्वास की सही विधियों का व्यावहारिक अभ्यास कराया। शिविर में डॉ. श्याम सिंह जी और महर्षि आलोक द्वारा साझा की गई स्वांस विधियों और साधना तकनीकों का अद्भुत समन्वय देखने को मिला, जिससे उपस्थित साधक अत्यधिक लाभान्वित हुए।
महर्षि आलोक के आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक सूत्र:
गोल्ड मेडलिस्ट इंजीनियर एवं पूर्व उच्च रेल अधिकारी महर्षि आलोक ने वैज्ञानिक सिद्धांतों के माध्यम से ध्यान और आत्म-जागृति का प्रशिक्षण दिया:
शिवत्व के 5 वैज्ञानिक नियम: शिविर में Law of Emptiness, Law of Attraction, Law of Conservation of Energy, Law of Transformation तथा Law of Resonance जैसे सिद्धांतों पर विस्तार से चर्चा की गई।
ध्यान और समाधि: साक्षी भाव (Body and Breath Awareness) के ज़रिए विचारों को शांत कर अंतरात्मा से जुड़ने का मार्ग दिखाया गया।
चक्र जागरण व हार्मोनल संतुलन: शरीर के 7 चक्रों के जागरण तथा मस्तिष्क के न्यूरोट्रांसमीटरों (डोपामाइन, सेरोटोनिन, ऑक्सीटोसिन, एंडोर्फिन) को संतुलित कर तनावमुक्त जीवन जीने के सूत्र दिए गए।
लायन अरुण कुमार सोनी ने बताया कि शिविर में सम्मिलित लोगों ने स्वामी जी के सानिध्य में बहुत ही तन्मयता एवं समर्पण के साथ तीन दिन तक ध्यान भजन कीर्तन नृत्य में डुबकियां लगाई। यहां तक कि उन्हें अपने होने का एहसास भी ना रहा। कुछ लोगों ने अपने आप में अलौकिक ऊर्जा को महसूस किया। कुछ लोगों ने अपने आप को रूपांतरित पाया।
पंकज आर्य स्वामी ने महर्षि आलोक जी का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में स्वास्थ्य और आध्यात्मिक चेतना का नया संचार होता है। आप लोगों ने अपना अमूल्य समय एवं सहयोग प्रदान कर हम विदिशा नगर वासियों को कृतार्थ किया है।अंत में सभी सहभागियों को सम्मानित कर शिविर का समापन किया गया।




