आशुतोष रांका और सौरभ दास को शर्तों के साथ रिहा करने का आदेश
50,000 रुपये का व्यक्तिगत बॉन्ड और उतनी ही राशि का जमानती बॉन्ड जमा करना पड़ा

नई दिल्ली: दिल्ली की एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत ने बुधवार को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रमुख नेताओं आशुतोष रांका और सौरभ दास को शर्तों के साथ रिहा करने का आदेश जारी कर दिया है। इन दोनों नेताओं को सात दिन पहले जंतर-मंतर पर बिना अनुमति प्रदर्शन करने और पुलिस कार्रवाई में बाधा डालने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। दिल्ली हाई कोर्ट से अपनी याचिका वापस लेने के बाद मजिस्ट्रेट अदालत ने उन्हें यह राहत दी है। मजिस्ट्रेट अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 135(3) के तहत एहतियाती कदम उठाते हुए दोनों नेताओं की रिहाई के आदेश दिए। इसके लिए उन्हें 50,000 रुपये का व्यक्तिगत बॉन्ड और उतनी ही राशि का जमानती बॉन्ड जमा करना पड़ा है। इसके साथ ही अदालत ने सख्त निर्देश दिया है कि वे जांच पूरी होने तक सुनवाई की हर तारीख पर कोर्ट में हाजिर रहेंगे और शांति व्यवस्था बनाए रखेंगे। अदालत में जमा किए गए अपने लिखित हलफनामे में आशुतोष रांका और सौरभ दास ने न्यायपालिका के प्रति पूरा विश्वास जताया है। उन्होंने लिखित रूप में यह वचन दिया है कि जब तक जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए आधिकारिक मंजूरी नहीं मिलती, तब तक वे वहाँ किसी भी आंदोलन का आह्वान नहीं करेंगे। साथ ही, उन्होंने यह आश्वासन भी दिया है कि उनके द्वारा भविष्य में आयोजित किए जाने वाले सभी विरोध प्रदर्शन पूरी तरह से भारतीय संविधान के दायरे और मर्यादा में ही रहेंगे।
क्यों गिरफ्तार हुए थे आशुतोष रांका और सौरभ दास
आपको बता दें कि यह पूरा मामला 13 अक्टूबर का है, जब CJP नेताओं ने मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ में गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी। आशुतोष रांका और सौरभ दास अपनी पार्टी के 12 अन्य सदस्यों के साथ जंतर-मंतर पहुंच गए थे, जो अब प्रदर्शनों के लिए अधिकृत जगह नहीं है। उन पर आरोप लगा था कि उन्होंने पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डाली, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।




