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तीन टेररिस्ट ढेर: टायसन ने ठोकी आतंकियों के ताबूत में कील, गोली लगी पर नहीं टूटे हौसले; पढ़ें बहादुरी की कहानी
यह सिर्फ एक ऑपरेशन की कहानी नहीं है। यह उस जाबांज योद्धा की गाथा है, जिसने गोली खाने के बाद भी अपने कर्तव्य से पीछे हटना नहीं सीखा। टायसन ने दिखा दिया कि वर्दी सिर्फ इंसान ही नहीं पहनते-वफादारी और बहादुरी की मिसाल कभी-कभी चार पैरों पर भी खड़ी होती है।


जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के छात्रू के घने जंगलों में 36 दिन से चल रहे ऑपरेशन में आखिरकार वह पल आया, जब भारतीय सेना के एक जाबांज योद्धा ने अपनी बहादुरी से पूरे मिशन की दिशा बदल दी। बर्फ से ढके पहाड़, पथरीले रास्ते और दुर्गम इलाके… लेकिन हौसला बुलंद था। इसी हौसले का नाम है-टायसन।सेना को दी आतंकियों की सटीक लोकेशन
छात्रू के नायदगाम-वानीपुरा (पासरकुट) इलाके में आतंकियों की मौजूदगी की पुख्ता जानकारी मिलने के बाद सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ ने संयुक्त घेराबंदी की। आतंकवादी एक पहाड़ी की तलहटी में बने कच्चे ढोक में छिपे थे। शक तो था, लेकिन सटीक लोकेशन चाहिए थी। यहीं से शुरू होती है टायसन की कहानी।


