महिला आरक्षण विधेयक का स्वागत, भारतीय योग संसद में पहले से ही 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू — डॉ. विनीत तिवारी


भोपाल .भारतीय योग संसद के अध्यक्ष डॉ. विनीत तिवारी ने केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) का हार्दिक स्वागत किया है। उन्होंने इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कदम बताया।
डॉ. विनीत तिवारी ने कहा कि यह विधेयक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करके उन्हें राष्ट्र की मुख्यधारा में लाएगा तथा राजनीतिक निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करेगा। भारतीय योग संसद इस सकारात्मक पहल का पूर्ण समर्थन करती है।
उन्होंने आगे कहा कि भारतीय योग संसद अपनी स्थापना के समय से ही महिला सशक्तिकरण के प्रति कृतसंकल्पित है। हमने गठन के साथ ही अपने संगठन में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को व्यावहारिक रूप से लागू कर दिया था। डॉ. तिवारी ने बताया कि भारतीय योग संसद के उद्देश्यों में योग के माध्यम से महिला सशक्तिकरण को विशेष स्थान दिया गया है। इसमें महिलाओं में आत्मविश्वास, संकल्प शक्ति, निर्णय लेने की क्षमता, नेतृत्व गुण, शारीरिक-मानसिक-आध्यात्मिक स्वास्थ्य तथा समग्र विकास को बढ़ावा देकर उन्हें परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए सशक्त बनाना शामिल है।भारतीय योग संसद देश के प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र में योग जागरूकता अभियान चलाएगी, जिसमें योग के माध्यम से महिला सशक्तिकरण पर विशेष बल दिया जाएगा। डॉ. विनीत तिवारी ने पुनः दोहराया कि योग आधारित महिला सशक्तिकरण ही सच्चा और स्थायी सशक्तिकरण है। आरक्षण केवल सीटों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि महिलाओं को योग के माध्यम से आत्मनिर्भर, स्वावलंबी और सशक्त भी बनाना चाहिए।
भारतीय योग संसद की महिला योग सांसदों ने महिला आरक्षण विधेयक का स्वागत करते हुए कहा कि यह विधेयक निश्चित रूप से महिलाओं को राजनीतिक क्षेत्र में आरक्षण प्रदान करके उनके राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे महिलाओं की आवाज संसद और विधानसभाओं में अधिक मजबूती से सुनाई देगी और नीति निर्माण में उनकी भागीदारी बढ़ेगी।
हालांकि, महिला योग सांसदों का मानना है कि राजनीतिक आरक्षण अकेला पर्याप्त नहीं है। सच्चा और समग्र सशक्तिकरण तब तक संभव नहीं होगा जब तक महिलाओं को आर्थिक, शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से भी मजबूत नहीं बनाया जाता। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार को महिला आरक्षण विधेयक के साथ-साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
महिला योग सांसदों ने अपील की कि योग को राष्ट्रीय महिला सशक्तिकरण नीति का अभिन्न अंग बनाया जाए। योग महिलाओं को शारीरिक क्षमता, मानसिक दृढ़ता, भावनात्मक संतुलन और आध्यात्मिक बल प्रदान करता है, जिससे वे न केवल राजनीति में बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण में भी प्रभावी और नेतृत्वकारी भूमिका निभा सकें।
उन्होंने कहा, “जब नारी शक्ति योग शक्ति से जुड़ेगी, तभी महिलाएं वास्तविक अर्थों में सशक्त होंगी। योग उन्हें घर से लेकर संसद तक हर क्षेत्र में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की क्षमता देगा। इसलिए केंद्र सरकार से हमारी मजबूत अपील है कि महिला आरक्षण के साथ योग को भी राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए प्रोत्साहित किया जाए। नारी शक्ति जब योग शक्ति से संयुक्त होगी, तब ही भारत सच्चे अर्थों में विश्वगुरु बन सकेगा।”



