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मेडिकल टूरिज्म कॉरिडोर में राजधानी भोपाल को मिले समान महत्व: मनोज मीक

भोपाल–उज्जैन–इंदौर सर्किट से मजबूत होगा मध्यप्रदेश का मेडिकल वेलनेस विज़न

डिविजनल कमिश्नर इंदौर डॉ. सुदाम खाड़े के निर्देशानुसार साझा किए गए इंदौर–उज्जैन मेडिकल टूरिज्म एंड वेलनेस कॉरिडोर के कॉन्सेप्ट मेल के उत्तर में क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने लिखित रूप से सुझाव दिया है कि इस पहल को केवल इंदौर–उज्जैन तक सीमित न रखकर भोपाल–उज्जैन–इंदौर मेडिकल टूरिज्म एंड वेलनेस सर्किट के रूप में देखा जाना चाहिए ताकि देश के मध्य में एक सशक्त ट्विन मेट्रोपॉलिटन आर्क की अवधारणा को आगे बढ़ाया जा सके। अपने ईमेल जवाब में मनोज मीक ने कहा है कि राजधानी भोपाल रीजन को इस प्रस्ताव में समान स्ट्रैटेजिक महत्व मिलना चाहिए। उन्होंने लिखा कि ऐसा ढांचा मध्यप्रदेश को अधिक संतुलित और प्रभावशाली रीजनल मॉडल देगा, जिसमें एडवांस्ड मेडिकल केयर, स्पिरिचुअल वेलनेस, प्रिवेंटिव हेल्थ, नेचर-बेस्ड रिकवरी और लॉन्ग-स्टे रिहैबिलिटेशन तीनों प्रमुख शहरों के माध्यम से एक साथ जोड़े जा सकते हैं। मीक ने कहा कि भोपाल रीजन एम्स सहित बड़े मेडिकल संस्थानों, एयर कनेक्टिविटी, ऑक्सी-रिच नेचुरल सराउंडिंग्स, आसपास के वन क्षेत्रों, नेशनल पार्क, टाइगर रिजर्व लैंडस्केप और वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स के कारण इस सर्किट का एक स्वाभाविक और मजबूत स्तंभ बन सकता है। सिंहस्थ जैसे आयोजनों में उत्तर भारत से आने वाले बड़ी संख्या में यात्री रेल व सड़क मार्ग का उपयोग करते हैं, और इस दृष्टि से भोपाल स्वाभाविक रूप से एक मजबूत एंट्री, ट्रांजिट और स्टे बेस बनता है। इसलिए उज्जैन-केंद्रित किसी भी मेडिकल टूरिज्म और वेलनेस सर्किट में भोपाल को जोड़ना व्यवहारिक कनेक्टिविटी और इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षमता का भी विषय है। ‘कमाल का भोपाल’ अभियान के फाउंडर मीक ने कहा, “यदि राज्य के लिए मेडिकल टूरिज्म और वेलनेस का बड़ा विज़न बनाया जा रहा है, तो राजधानी भोपाल को उसमें बराबरी का स्थान मिलना चाहिए। मध्यप्रदेश का विकास केवल चंद चुनिंदा शहरों तक सीमित सोच की बजाय, बहु-केंद्रित और संतुलित क्षेत्रीय मॉडल पर आधारित होना चाहिए।”

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