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पृथ्वी से उतना ही ग्रहण करें, जितनी हमें जरूरत है: बीके डॉ. रीना दीदी

ब्रह्माकुमारीज़ का संदेश—“प्रकृति बचाओ, पृथ्वी बचाओ, भविष्य संवारो”

भोपाल. ब्रह्माकुमारीज ब्लेसिंग हाउस सेवाकेंद्र में “हमारी शक्ति, हमारा ग्रह” की थीम के अंतर्गत विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर बहुत ही सुन्दर कार्यकम का आयोजन किया गया। धरती माता नाटक के माध्यम से दिया गया पृथ्वी के संरक्षण का संदेश।
सेवाकेंद्र प्रभारी बीके डॉ. रीना दीदी ने कहा की पृथ्वी को हरा भरा रखने के लिए देखभाल, संतुलन और पर्यावरणीय जागरूकता के महत्व को समाज में उजागर कर, साथ ही लोगों को प्रकृति और आंतरिक जागरूकता से पृथ्वी की रक्षा के लिए सभी को प्रेरित करना होगा। समाज को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक कर हर एक को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझकर निभाना पड़ेगा।आध्यात्मिक दृष्टिकोण से संदेश दिया कि स्व परिवर्तन से प्रकृति के प्रति जागरूक होकर पृथ्वी को बचाया जा सकता है।

दीदी ने आध्यात्मिकता और धरती संरक्षण को मिलाते हुए संदेश दिया गया कि धरती की रक्षा के लिए स्वयं में बदलाव और सभी का प्रयास आवश्यक है। आज हमें जलवायु संकट के प्रति चेतावनी को समझकर आगे कदम बढ़ाना होगा।
दीदी ने सभी से आह्वान किया कि उतना ही ग्रहण करें, जितनी हमें जरूरत है, अनावश्यक उपयोग को जीवन से दूर करें।
दीदी ने आगे कहा कि हम धरती से उतना ही ग्रहण करें जितनी हमें जरूरत है, आज हमारे अनाप-शनाप गतिविधियों का धरती और पर्यावरण पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ा रहा है। हवा, पानी, भोजन सब प्रदूषण की चपेट में आ चुके हैं, इसलिए यह समय की मांग है कि हम ‘सादा जीवन उच्च विचार’ के रास्ते पर चलें। अगर मनुष्य को अपना जीवन बचाए रखना है, तो पृथ्वी के महत्व को समझना होगा। मिट्टी, पानी, वृक्षों को बचाना ही होगा।
दीदी ने कहा कि भारत में नदियों की पूजा करते हैं, फिर उन्हीं को प्रदूषित भी करते हैं, हमें पौधे लगाने के साथ ऊर्जा के नए स्रोतों का इस्तेमाल करना चाहिए। इसकी जिम्मेदारी सिर्फ भारत सरकार की नहीं है। हम भी अपने स्तर पर घरों में सोलर पैनल और सोलर कुकर जैसी चीजें लगा कर पृथ्वी को बचाने में अपना अमूल्य सहयोग योगदान दे सकते हैं। धरती के स्रोत सीमित हैं, लेकिन उनका दोहन सारी सीमाएं पार कर रहा है, हम हमेशा धरती से लेते ही आए हैं, हमने कभी यह नहीं सोचा कि हम धरती को वापस क्या दे रहे हैं। लेकिन अब इसके बारे में सोचना ही होगा, यदि हमने पृथ्वी को नहीं बचाया तो हम खुद भी नहीं बचेंगे।

दीदी ने सभी को पृथ्वी को बचाने के लिए प्रतिज्ञा एवं दृढ़ संकल्प कराया।

कार्यक्रम में बच्चों के द्वारा पृथ्वी को बचाने के लिए बहुत ही सुंदर नाटक की प्रस्तुति दी गई, जिसमें भारत माता ने स्वयं कहा कि हमें पृथ्वी को पुनः हरा-भरा बनाने के लिए पर्यावरण का संरक्षण, जल का बचाव कर अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना होगा।
साथ साथ मेडिटेशन, आध्यात्मिक ज्ञान, एक्टिविटी और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियां शामिल रहीं।

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