अध्यात्म

पंचांग और ज्योतिष विज्ञान का महत्व मानव जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक: पंडित गंगा प्रसाद आचार्य

 

भोपाल। श्री परम शक्ति ज्योतिष परामर्श केंद्र, भोपाल के ज्योतिषाचार्य पंडित गंगा प्रसाद आचार्य ने ज्योतिष विज्ञान एवं पंचांग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सृष्टि रचना के समय ब्रह्मदेव ने मनुष्यों के लिए धर्म व्यवस्था का प्रतिपादन किया और वेदों के माध्यम से जीवन को संचालित करने का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने बताया कि वेदों में धर्म साधना के लिए काल, तंत्र और समय का विशेष महत्व बताया गया है, जिसके ज्ञान हेतु ज्योतिष शास्त्र का निर्माण किया गया।

पंडित आचार्य ने कहा कि ज्योतिष विज्ञान सिद्धांत, संहिता और होरा—इन तीन प्रमुख स्कंधों में विस्तृत रूप से वर्णित है। इनमें काल ज्ञान का आधार सिद्धांत भाग से उत्पन्न होता है। उन्होंने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण—ये पांच अंग मिलकर पंचांग का निर्माण करते हैं, जो व्रत, पर्व और शुभ कार्यों के निर्धारण में मार्गदर्शक होते हैं।

उन्होंने विस्तार से समझाया कि तिथि सूर्य और चंद्रमा की स्थिति के आधार पर निर्धारित होती है। जब चंद्रमा सूर्य से क्रमिक 12 अंश की दूरी तय करता है, तब एक नई तिथि का निर्माण होता है। इसी प्रकार वार सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के समय को कहा जाता है।

नक्षत्रों के विषय में उन्होंने बताया कि आकाश को 360 अंश में विभाजित कर 27 भागों में बांटा गया है, जिन्हें अश्विनी से रेवती तक 27 नक्षत्र कहा जाता है। जिस समय चंद्रमा जिस नक्षत्र क्षेत्र में होता है, वही नक्षत्र पंचांग में माना जाता है।

योग के संबंध में उन्होंने कहा कि सूर्य और चंद्रमा की संयुक्त गति से 13 अंश 20 कला की दूरी तय होने पर एक योग बनता है। कुल 27 योग होते हैं, जिनका जीवन पर सूक्ष्म प्रभाव पड़ता है।

करण को तिथि के आधे भाग के रूप में परिभाषित करते हुए उन्होंने बताया कि प्रत्येक तिथि के दो भाग होते हैं, जिन्हें करण कहा जाता है। करण 11 प्रकार के होते हैं, जिनमें सात चल संज्ञक और चार स्थिर संज्ञक हैं।

पंडित गंगा प्रसाद आचार्य ने कहा कि पंचांग केवल तिथियों का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि मानव जीवन के निर्णयों का आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक आधार है। उन्होंने समाज से ज्योतिष और पंचांग के सही ज्ञान को अपनाने की अपील की।

पंडित गंगा प्रसाद आचार्य अखिल भारतवर्षीय धर्म संघ, मध्य प्रदेश शाखा के धर्माधिकारी भी हैं और वर्षों से धर्म, ज्योतिष एवं वैदिक परंपराओं के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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