विश्वास सारंग ने दीप प्रज्वलित कर भारत संस्कृति यात्रा का किया शुभारंभ
भारत संस्कृति यात्रा युवा प्रतिभाओं को वैश्विक मंच देने की पहल -डॉ. अखिलेश खंडेलवाल


डॉ. राजकुमार मालवीय बोले, संस्कृति संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण आयोजन
भोपाल, 1 मई 2026, शुक्रवार को प्रातः 9:00 बजे से “नेक्स्ट जेन टैलेंट समिट 2026” का सफल आयोजन जारी रहा, जिसमें देशभर के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 250 प्रतिभागियों ने भारतीय कला एवं संस्कृति की विविध विधाओं में अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुतियां दीं। यह आयोजन 02 मई तक जारी रहेगा। प्रातः सत्र में शास्त्रीय संगीत की उच्च स्तरीय प्रस्तुतियाँ देखने को मिलीं। शास्त्रीय गायन में श्वेता पुराणिक जोशी ने रागदारी संगीत की परंपरा को प्रस्तुत करते हुए विलंबित एवं द्रुत ख्याल में स्वर, आलाप, तान और भाव का उत्कृष्ट संयोजन प्रस्तुत किया। तबला संगत अजय कुलकर्णी एवं हारमोनियम संगत पंडित बलवंत पुराणिक द्वारा प्रभावी रूप से की गई। तबला एकल प्रस्तुति में संकेट जोशी ने तीनताल एवं झपताल में पेशकार, कायदा, रेला एवं गतों के माध्यम से अपनी तकनीकी दक्षता का प्रदर्शन किया। हारमोनियम संगत प्राणकृष्ण साई द्वारा दी गई।
संतूर वादन में डॉ. चंदन मंडल ने राग की विस्तारपूर्ण प्रस्तुति देते हुए मधुरता एवं तार-संतुलन का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। तबला संगत श्री रामसेवक शर्मा द्वारा की गई।
सायं 5:00 बजे से 6:00 बजे तक “युवा उत्सव” आयोजित किया गया, जिसमें युवा कलाकारों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
सायं 6:00 बजे खेल एवं युवक कल्याण मंत्री विश्वास सारंग द्वारा दीप प्रज्वलन कर “भारत संस्कृति यात्रा” का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि “हिंदुस्थान आर्ट एंड कल्चर सोसायटी देशभर के विभिन्न राज्यों के कलाकारों को वैश्विक स्तर पर मंच प्रदान करने का सराहनीय कार्य कर रही है।”
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अखिलेश खंडेलवाल ने अपने वक्तव्य में कहा कि “इस समिट का उद्देश्य नई पीढ़ी की प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना और भारतीय संस्कृति को सशक्त रूप से प्रस्तुत करना है।”
सह समन्वयक डॉ. राजकुमार मालवीय ने कहा कि “इस प्रकार के आयोजन भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”
हिंदी साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि “भारतीय कला परंपरा को नई पहचान देने और युवा कलाकारों को प्रोत्साहन देने की दिशा में यह आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
शुभारंभ अवसर पर हिंदी साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे, अलाउद्दीन अकादमी के निदेशक प्रकाश सिंह ठाकुर, उप निदेशक शेखर, समन्वयक डॉ. अखिलेश खंडेलवाल एवं सह समन्वयक डॉ. राजकुमार मालवीय सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। सायंकालीन सत्र में भी उच्च स्तरीय प्रस्तुतियों का क्रम जारी रहा। कोलकाता के अर्नब एवं एनी द्वारा राजल गायन प्रस्तुत किया गया, जिसमें शास्त्रीयता एवं लोक तत्वों का सुंदर समन्वय देखने को मिला। तबला संगत रामेन्द्र सोलंकी एवं सारंगी संगत शीरन खान द्वारा की गई। प्रख्यात बाँसुरी वादक पद्मश्री पं. रोनु मजूमदार ने अपनी विशिष्ट शैली में बाँसुरी वादन प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। तबला संगत श्री रामेन्द्र सोलंकी द्वारा की गई। अर्ध-शास्त्रीय (स्वास्त्रीय) गायन में विदुषी सुलेखा ने ठुमरी एवं दादरा शैली में भावपूर्ण प्रस्तुति दी। तबला संगत अशेष उपाध्याय एवं हारमोनियम संगत मुनी मालवीय द्वारा की गई। कार्यक्रम का समापन समूह कथक नृत्य से हुआ, जिसकी प्रस्तुति सदाशिब संगीत नाट्य कला अकादमी, भोपाल द्वारा दी गई। नृत्य-निर्देशन गुरु संगमिता तैवड़े द्वारा किया गया, जिसमें तत्कार, चक्कर, अभिनय एवं समन्वित समूह प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। यह आयोजन भारतीय सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में निरंतर आगे बढ़ रहा है। आगामी दिवसों में भी विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन किया जाएगा।




