श्री विभगूंज वेलफेयर सोसायटी द्वारा काव्य गोष्ठी आयोजित
मन की भाव भरी आंखे अब देख रही परिदृश्य हमारे- मंजुलता श्रीवास्तव


भोपाल। श्री विभगूंज वेलफेयर सोसायटी की ओर से सोमवार, 4 मई को वरिष्ठ गीतकार मयंक श्रीवास्तव के निवास पर कानपुर से पधारी वरिष्ठ गीतकार मंजुलता श्रीवास्तव के आगमन पर काव्य गोष्ठी का आयोजित की गई। गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामवल्लभ आचार्य ने की साथ ही मुख्य अतिथि के रूप में कवयित्री मंजुलता श्रीवास्तव उपस्थित रहीं। इससे पहले श्री विभगूंज वेलफेयर सोसायटी की संस्थापक/ सचिव कीर्ति श्रीवास्तव ने शॉल ओढ़ाकर और संस्था के अध्यक्ष समीर श्रीवास्तव ने गुलदस्ता भेंट कर मंजुलता जी का स्वागत किया। काव्य गोष्ठी का आगाज मंजुलता श्रीवास्तव के गीत ‘मन की भाव भरी आंखे अब देख रही परिदृश्य हमारे’ और ‘खिन्न होकर चुप्पियों ने भींच ली जब मुठ्ठियां’ से हुआ। तदोपरान्त सुनील चतुर्वेदी ने ‘नन्ही पोती जब दौड़ी दौड़ी आती है सच मानो मेरी हर पीड़ा मिट जाती है’, सीमा हरि शर्मा ने ‘कहानी पढ़ चुके कितनी जीये कैसे तुझे जीवन’, मनोज जैन मधुर ने ‘लय में रहना सीख बाबरे लय से दूर ना जा’, राजेश तिवारी ने ‘वो कांधे पे हल लेके जाता है कौन सुबह से गया शाम आता है कौन’, ममता बाजपेयी ने घर की छत बैचेन बहुत है दीवारों की भाषा सुनकर, हरिवल्लभ शर्मा ने हमको हमारे कथ्य पर संशय नहीं रहा, मधु शुक्ला ने सम्भल कर चलना मुसाफिर यह हादसों का शहर है, कीर्ति श्रीवास्तव ने लिखकर दास्तां कागज पे तुझसे मिल ही लेती हूं, किशन तिवारी ने जीतने की धुन में सबकुछ हार बैठे है, महेश अग्रवाल ने जब किये हमने हवन हमने जलाई उंगलियां, अशोक निर्मल ने चढ़ी धूप में छोड़ दिया है किसने मृग क्षणों को, मयंक श्रीवास्तव ने अखबारों में नहीं छपी है, ऐसी कभी खबर, हवा बैठना नहीं चाहती बूढ़े बरगद पर। पत्रकार/ सम्पादक समीर श्रीवास्तव ने बेटियों पर कुछ दोहे सुनाए बेटी घर की शान है, बेटी घर की आन।/ बेटी घर का मान है, बिटिया बिन वीरान। डॉ. रामवल्लभ आचार्य ने आप औरों को चंदन लगाते चलो उंगलियां आपकी महक जाएंगी और मैं तुम्हारी बांसुरी हूं फूंकते हो बज रही हूं रचनाएं प्रस्तुत की। गोष्ठी का कुशल संचालन मनोज जैन मधुर ने किया और आभार कीर्ति श्रीवास्तव ने दिया।




