MP में UCC बिल पास, अवैध संतान जैसे शब्द पर रोक, निकाह-हलाला और लिव-इन रिश्तों पर संहिता में क्या?

- मौजूदा व्यवस्था के विपरीत, अब महिलाओं को भी यह अधिकार दिया गया है कि यदि उनके पति ने शादी के समय किसी दूसरी महिला को गर्भवती किया है, तो पत्नी शादी को रद्द घोषित करने की मांग कर सकती है।
- साथ ही संहिता में लोगों के लिए शादी और तलाक दोनों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है।
- शहरी क्षेत्रों में ‘MP ई-नगर पालिका पोर्टल’ और ग्रामीण क्षेत्रों में SDM, नगरपालिका या पंचायत के जरिए यह प्रक्रिया पूरी होगी।
- रजिस्ट्रेशन न होने से शादी अमान्य नहीं होगी, लेकिन रजिस्ट्रार द्वारा बिना ठोस लिखित कारण के आवेदन खारिज करने पर जुर्माने का प्रावधान है।
- तलाक के बाद उसी जीवनसाथी से दोबारा शादी करने के लिए ‘निकाह-हलाला’ जैसी अपमानजनक या नीचा दिखाने वाली शर्तों को मानना, बढ़ावा देना या मजबूर करना एक दंडनीय आपराधिक अपराध माना जाएगा।अवैध शब्द पर संहिता में क्या?
बच्चों के अधिकार और कस्टडी को लेकर संहिता में ‘अवैध संतान’ की अवधारणा समाप्त कर दी गई है। विवाह, लिव-इन, गोद लेने, सरोगेसी या असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (एआरटी) से जन्मे सभी बच्चों को समान कानूनी दर्जा मिलेगा। अभिरक्षा के मामलों में अदालत बच्चे के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता देगीउत्तराधिकार अब किस तरह रहेगा?
बेटे और बेटियों को संपत्ति के उत्तराधिकार में समान अधिकार दिए गए हैं, उनकी वैवाहिक स्थिति कुछ भी हो। मृतक की संपत्ति में विधवाओं और विधुरों के साथ भी समान व्यवहार होगा। जीवित माता और पिता दोनों को क्लास-1 का उत्तराधिकारी माना गया है और वे मृतक बच्चे की संपत्ति में जीवनसाथी और बच्चों के साथ बराबर का हिस्सा पाएंगे। कोई भी वयस्क अपनी स्वयं अर्जित या पैतृक संपत्ति की 100 प्रतिशत वसीयत अपनी इच्छा से कर सकेगा। हत्या जैसे गंभीर अपराध में दोषी व्यक्ति उत्तराधिकार का अधिकार खो देगा और यदि कोई कानूनी वारिस नहीं होगा तो संपत्ति राज्य के पास चली जाएगी।लिव-इन के मामलों में रजिस्ट्रेशन कैसे करना होगा?
- लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए साथ रहने की शुरुआत के एक महीने के भीतर रजिस्ट्रार के पास “लिव-इन रिलेशनशिप का बयान” जमा करना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा।
- पार्टनर्स की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए। वे प्रतिबंधित श्रेणी में न हों, पहले से विवाहित न हों और उनकी सहमति स्वतंत्र होनी चाहिए।
- यदि कोई पार्टनर 21 साल से कम उम्र का है, तो लिव-इन के शुरू होने और खत्म होने की जानकारी उनके माता-पिता/अभिभावकों को भेजी जाएगी।
- रजिस्ट्रार यह रिकॉर्ड स्थानीय पुलिस स्टेशन को भी भेजेगा।
- लिव-इन से पैदा हुए बच्चों को वैध माना जाएगा और उन्हें पूर्ण उत्तराधिकार मिलेगा।
- यदि पुरुष पार्टनर महिला को छोड़ देता है, तो वह सक्षम अदालत के माध्यम से कानूनी पत्नी की तरह ही भरण-पोषण (गुजारा भत्ता) का दावा कर सकती है।
सजा के क्या प्रावधान?
बिना रजिस्ट्रेशन एक महीने से ज़्यादा साथ रहने पर 3 महीने तक की जेल या 10,000 जुर्माना हो सकता है। गलत जानकारी देने पर 3 महीने की जेल और 25,000 जुर्माना तथा रजिस्ट्रार के नोटिस के बाद भी बयान न देने पर 6 महीने तक की जेल और 25,000 का जुर्माना हो सकता है। मध्य प्रदेश का यह प्रस्तावित यूनिफॉर्म सिविल कोड आधुनिक सामाजिक आवश्यकताओं, जेंडर इक्वलिटी और संवैधानिक मूल्यों को सुदृढ़ करने वाला एक प्रगतिशील विधिक ढांचा है। यह समाज के सभी वर्गों (अनुसूचित जनजातियों को छोड़कर) में लैंगिक समानता लाने और कमजोर वर्गों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
अनुसूचित जनजाति पर क्या यूसीसी लागू होगा?- संवैधानिक सुरक्षा-कवच का सम्मान करते हुए यह कानून संविधान के अनुच्छेद 342 और अनुच्छेद 366 (खंड 25) के तहत आने वाली अनुसूचित जनजातियों (जैसे भील, गोंड, कोरकू, बैगा, सहरिया और भारिया) पर लागू नहीं होगा।
- इसके अलावा, जिन समुदायों के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा संविधान के भाग XXI के तहत की गई है, उन्हें भी इस कोड से विशेष रूप से बाहर रखा गया है।
- संहिता की परिभाषा वाला हिस्सा इसके अधिकार क्षेत्र को तय करता है। उत्तराधिकार से जुड़े जिन शब्दों की परिभाषा इसमें नहीं है, उनके लिए ‘भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925’ के अर्थ मान्य होंगे।
- डॉ. मोहन यादव ने कहा कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य समाज में विभाजन नहीं, बल्कि विश्वास, समानता, महिला सम्मान और सामाजिक समरसता को मजबूत करना है।
- उन्होंने कहा कि यह संविधान की मूल भावना के अनुरूप सभी नागरिकों के लिए समान न्याय और समान अवसर सुनिश्चित करने वाला कानून है। सरकार को उम्मीद है कि सभी दल और समाज के सभी वर्ग इस पहल का समर्थन करेंगे।
- समान नागरिक संहिता को कितना समर्थन मिला?
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दावा किया कि प्रदेश के 93 प्रतिशत नागरिकों ने समान नागरिक संहिता का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सोच ऐसी है कि वह सीधी बात भी तिरछी नजर से देखती है। इसी संदर्भ में उन्होंने “जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी” चौपाई का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर हमला बोला।मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के नागरिकों के सामाजिक और धार्मिक संस्कार पहले की तरह जारी रहेंगे। हालांकि, प्रदेश में होने वाले सभी विवाहों का शासकीय पंजीयन अनिवार्य होगा। पंजीयन नहीं कराने पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि एक पत्नी के रहते हुए दूसरा विवाह और एक पति के रहते हुए दूसरा विवाह करने की अनुमति नहीं होगी।कांग्रेस के लगातार हंगामे के बीच मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विधेयक महिला सशक्तिकरण, सामाजिक समरसता और सामाजिक समानता का कानून है तथा सभी दलों से इसका समर्थन करने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि 1947 में भारत स्वतंत्र हुआ था, लेकिन भोपाल को तत्काल आजाद घोषित नहीं किया गया था और उसे पाकिस्तान से मिलाने की कोशिश की गई थी। ऐसे लोगों को “डूब मरना चाहिए।”


