आरएनटीयू में राष्ट्रीय छात्र अध्ययन यात्रा का भावपूर्ण समापन, देशभर के हिंदितर राज्यों से पहुंचे विद्यार्थियों ने अपनी संस्कृतिक प्रस्तुतियों से बांधा समां
रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय छात्र अध्ययन यात्रा का समापन, देशभर के कई राज्यों से आए विद्यार्थी, हिंदी के साथ-साथ सीखी अन्य भारतीय भाषाएं

भोपाल। रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय में विश्वरंग फाउंडेशन और केंद्रीय हिंदी निदेशालय के सहयोग से आयोजित राष्ट्रीय छात्र अध्ययन यात्रा-2026 का मंगलवार को गरिमामय एवं भावपूर्ण वातावरण में समापन हो गया। नौ दिनों तक चली इस अध्ययन यात्रा में देशभर के हिंदितर राज्यों से आए छात्र-छात्राएं शामिल हुए। इस दौरान विद्यार्थियों को भारतीय भाषा, संस्कृति, इतिहास और राष्ट्रीय एकता के सूत्र में पिरोने का काम किया गया। समापन समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की प्रतिकुलाधिपति एवं विश्वरंग फाउंडेशन की निदेशक डॉ. अदिति चतुर्वेदी वत्स ने की। वहीं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलगुरु डॉ. रविप्रकाश दुबे रहे। विशिष्ट अतिथियों में कुलसचिव डॉ. संगीता जौहरी और केंद्रीय हिंदी निदेशालय की सहायक निदेशक सुश्री तमन्ना रानी मौजूद रहीं।
समापन समारोह का सबसे आकर्षक और भावनात्मक पक्ष देश के विभिन्न राज्यों से आए विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां रहीं। असम, मणिपुर, मिजोरम, पश्चिम बंगाल, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल, ओडिशा सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिभागी अपने-अपने पारंपरिक परिधानों में मंच पर पहुंचे। विद्यार्थियों ने अपने राज्यों के लोकगीत, पारंपरिक नृत्य, सांस्कृतिक गीत और लोक-संगीत प्रस्तुत कर सभागार को भारतीय सांस्कृतिक विविधता के रंगों से भर दिया। प्रत्येक प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और पूरे वातावरण में उत्साह, उल्लास एवं राष्ट्रीय एकता की भावना का संचार हुआ।
कार्यक्रम की एक विशेष बात यह रही कि प्रत्येक राज्य के विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुति का मंच संचालन स्वयं किया। उन्होंने आत्मविश्वास के साथ अपने राज्य की संस्कृति, भाषा, परंपराओं और लोकजीवन का परिचय भी दिया। नौ दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान सीखी गई मंच संचालन कला, भाषा कौशल और आत्मविश्वास की झलक उनकी प्रस्तुतियों में स्पष्ट दिखाई दी।
समारोह के दौरान विद्यार्थियों ने अध्ययन यात्रा के नौ दिनों के अपने अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि यह यात्रा केवल शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि भारतीय संस्कृति, भाषाई विविधता, साहित्य, इतिहास और राष्ट्रीय एकता को निकट से समझने का एक अविस्मरणीय अवसर बनी। विद्यार्थियों ने रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, विश्वरंग फाउंडेशन, केंद्रीय हिंदी निदेशालय तथा आयोजन से जुड़े सभी शिक्षकों, समन्वयकों और स्वयंसेवकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यहां मिला स्नेह, मार्गदर्शन और आत्मीय वातावरण जीवनभर उनकी स्मृतियों में रहेगा।
इस अवसर पर अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. अदिति चतुर्वेदी वत्स ने कहा कि यह अध्ययन यात्रा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत, भाषाई विविधता और मानवीय मूल्यों को समझने की एक जीवंत प्रक्रिया रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे यहाँ से प्राप्त अनुभवों को अपने जीवन और समाज में सकारात्मक परिवर्तन के रूप में आगे बढ़ाएँ।
वहीं मुख्य अतिथि डॉ. रविप्रकाश दुबे ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति संवेदनशील नागरिक बनना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस अध्ययन यात्रा से प्राप्त अनुभव विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
केंद्रीय हिंदी निदेशालय की सहायक निदेशक सुश्री तमन्ना रानी ने कहा कि राष्ट्रीय छात्र अध्ययन यात्रा ने विभिन्न राज्यों के विद्यार्थियों को एक परिवार की तरह जोड़ दिया है। उन्होंने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों में हिंदी के साथ-साथ भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक विविधता के प्रति सम्मान की भावना विकसित करते हैं।
कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों को मुख्य अतिथियों द्वारा प्रमाण-पत्र, स्मृति-चिह्न (मोमेंटो) एवं गिफ्ट किट प्रदान किए गए। सम्मान प्राप्त करते समय विद्यार्थियों के चेहरों पर प्रसन्नता के साथ-साथ बिछड़ने की भावुकता भी स्पष्ट दिखाई दे रही थी। कई विद्यार्थियों और शिक्षकों की आंखें नम थीं। वहीं आयोजकों ने भी सभी प्रतिभागियों, अतिथियों, शिक्षकों, समन्वयकों, स्वयंसेवकों एवं सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया। भारत माता की जय घोष के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
आपको बता दें कि राष्ट्रीय छात्र अध्ययन यात्रा-2026 का यह समापन समारोह भारतीय सांस्कृतिक एकता, भाषाई सद्भाव, पारस्परिक सम्मान और राष्ट्रीय एकात्मता का जीवंत उदाहरण बन गया। नौ दिनों की यह यात्रा विद्यार्थियों के लिए केवल एक अध्ययन कार्यक्रम नहीं, बल्कि जीवनभर संजोकर रखने वाला सांस्कृतिक और मानवीय अनुभव बन गई।


