PWD के प्रमुख अभियंता पर सीआर में हेराफेरी और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, फोरेंसिक जांच की मांग

भोपाल। लोक निर्माण विभाग मध्य प्रदेश के वर्तमान प्रमुख अभियंता श्री आर.एल. वर्मा पर पदोन्नति के लिए गोपनीय चरित्रावली यानी सीआर में हेराफेरी करने और शो कॉज नोटिस व आरोप पत्र निपटाने के नाम पर अनियमितता के गंभीर आरोप लगे हैं। राष्ट्रीय अधिमान्य पत्रकार संगठन के पदाधिकारी एन.के. सिंह ने मुख्यमंत्री को लिखित शिकायत भेजकर पूरे मामले की फोरेंसिक जांच और डीपीसी रोकने की मांग की है।
सीआर में किया गया बदलाव
शिकायत में कहा गया है कि श्री वर्मा ने वर्ष 2022 की सीआर में खुद से कांट-छांट कर ग्रेड बदल दिया। आरोप है कि मूल सीआर में उन्हें ‘क’ ग्रेड मिला था, जिसे काटकर ‘क+’ यानी उत्कृष्ट में तब्दील कर दिया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार 2 जुलाई 2026 को तैयार पदोन्नति फोल्डर में यह ग्रेड 8+ दिखाया गया, जबकि मूल दस्तावेज में ऐसा नहीं था। संगठन ने मांग की है कि वल्लभ भवन स्थित स्थापना शाखा के सीआर रजिस्टर की जांच कराई जाए और काट-छांट की हैंड राइटिंग एक्सपर्ट से फोरेंसिक जांच करवाई जाए।
शो कॉज और आरोप पत्र में भी अनियमितता का आरोप
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि गंभीर शिकायतों पर जारी किए गए शो कॉज नोटिस और आरोप पत्र को भारी रकम लेकर निपटा दिया गया। वहीं अपने बैच के कुछ अधिकारियों के मामूली प्रकरणों को भी लंबित रखा गया। शिकायतकर्ता ने कहा कि एसई से ईई तक की डीपीसी के पहले सभी लंबित शो कॉज और आरोप पत्रों की तिथिवार जांच हो कि कब नोटिस दिए गए और कब खत्म किए गए। जिन मामलों को निपटाया नहीं गया, उसके कारण भी स्पष्ट किए जाएं।
जांच तक पदोन्नति रोकने की मांग
एन.के. सिंह ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि जांच पूरी होने तक प्रमुख अभियंता की पदोन्नति प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय, लोक निर्माण मंत्री, लोकायुक्त और आर्थिक अपराध शाखा को भी पत्र की प्रति भेजी है ताकि निष्पक्ष जांच हो सके।
विभाग का पक्ष
इस संबंध में लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनका पक्ष नहीं मिल सका।
विशेषज्ञ की राय: शासकीय दस्तावेजों में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ सेवा नियमों का उल्लंघन है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल अनुशासनहीनता बल्कि भ्रष्टाचार की श्रेणी में भी आएगा।
गौरतलब है कि PWD प्रदेश का सबसे बड़ा निर्माण विभाग है। ऐसे में प्रमुख अभियंता स्तर पर पारदर्शिता और नियमों का पालन बेहद जरूरी माना जा रहा है। अब देखना होगा कि शासन इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है।


