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बच्चों की मौत के बाद भी स्वास्थ्य व्यवस्था बेपटरी,परासिया अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं; 58% पद रिक्त

कोल्ड्रिफ कफ सिरप कांड में 19 बच्चों की मौत के बाद भी परासिया की स्वास्थ्य व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। सरकार ने डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए छिंदवाड़ा जिले के परासिया सिविल अस्पताल में छह संविदा विशेषज्ञ डॉक्टरों की पोस्टिंग की थी।

इनमें एक शिशु रोग विशेषज्ञ भी शामिल था, लेकिन विधानसभा में सरकार ने स्वीकार किया कि छह में से एक भी डॉक्टर ने कार्यभार ग्रहण नहीं किया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब नियुक्ति के बाद भी डॉक्टर अस्पताल नहीं पहुंच रहे हैं, तो स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार कैसे होगा?  स्थिति तब और गंभीर हो जाती है, जब पूरे प्रदेश में शिशु रोग विशेषज्ञों की भारी कमी सामने आती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, शिशु रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रिशियन) के 958 स्वीकृत पदों में केवल 404 पदों पर ही डॉक्टर कार्यरत हैं, जबकि 554 पद खाली हैं। यानी करीब 58 प्रतिशत पद अब भी रिक्त हैं।

नवंबर 2025 से बिना स्थायी शिशु रोग विशेषज्ञ के चल रहा अस्पताल
परासिया सिविल अस्पताल नवंबर 2025 से स्थायी शिशु रोग विशेषज्ञ के बिना संचालित हो रहा है। उस समय अस्पताल में पदस्थ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण सोनी को बच्चों की मौत के मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने गिरफ्तार किया था। बाद में इसी मामले में सरकारी चिकित्सक डॉ. अमन सिद्दीकी और सेवानिवृत्त शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. एस.एस. ठाकुर को भी गिरफ्तार किया गया। तीनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। स्थिति यह है कि परासिया में वर्तमान में कोई निजी प्रैक्टिस करने वाला स्थायी शिशु रोग विशेषज्ञ भी उपलब्ध नहीं है। इससे बच्चों के इलाज की समस्या और गंभीर हो गई है। विधानसभा में उठा मामला
परासिया से कांग्रेस विधायक सोहनलाल वाल्मीक ने विधानसभा में यह मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि 7 मई 2026 को स्थायी शिशु रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति की मांग को लेकर धरना भी दिया गया था। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्थायी व्यवस्था के तहत छिंदवाड़ा जिला अस्पताल के दो शिशु रोग विशेषज्ञों को सप्ताह में तीन दिन परासिया भेजने की व्यवस्था की। सरकार ने क्या कहा?
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने विधानसभा में स्वीकार किया कि परासिया सिविल अस्पताल में अभी तक स्थायी शिशु रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति नहीं हो सकी है। उन्होंने बताया कि अप्रैल 2026 में स्वास्थ्य संचालनालय ने एक संविदा शिशु रोग विशेषज्ञ सहित छह संविदा विशेषज्ञ डॉक्टरों की पोस्टिंग की थी, लेकिन किसी ने भी कार्यभार ग्रहण नहीं किया। सरकार का कहना है कि रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है, हालांकि स्थायी नियुक्ति कब होगी, इसकी कोई समय-सीमा नहीं बताई गई।

क्या है पूरा मामला?
सितंबर और अक्टूबर 2025 में परासिया तथा छिंदवाड़ा और बैतूल जिले के अन्य क्षेत्रों में कथित रूप से दूषित कोल्ड्रिफ कफ सिरप के सेवन के बाद कम से कम 19 बच्चों की मौत हुई थी। जांच में सामने आया कि बच्चों को यह सिरप उपचार के दौरान सरकारी चिकित्सकों और एक सेवानिवृत्त बाल रोग विशेषज्ञ द्वारा दिया गया था। कई बच्चों की मौत तीव्र किडनी क्षति (Acute Kidney Injury) के कारण हुई, जबकि कुछ ने नागपुर के अस्पतालों में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

गंभीर मरीजों को आज भी बाहर ले जाना पड़ता है
परासिया में स्थायी शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं होने के कारण गंभीर रूप से बीमार बच्चों को आज भी करीब 30 किलोमीटर दूर छिंदवाड़ा या लगभग 150 किलोमीटर दूर नागपुर ले जाना पड़ता है। विशेषज्ञों की कमी का असर केवल परासिया तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश में बाल स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका प्रभाव साफ दिखाई देता है।

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