प्राचीन कमाली मंदिर को बचाने समाज हुआ एकजुट, सांसद आलोक शर्मा के नेतृत्व में सौंपा ज्ञापन

पुराने भोपाल के घोड़ा नक्कास स्थित लगभग 100 वर्ष से अधिक प्राचीन कमाली मंदिर को तोड़कर मंदिर परिसर में प्रस्तावित शॉपिंग कॉम्प्लेक्स निर्माण के विरोध में शनिवार को विभिन्न सामाजिक, व्यापारिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि एकजुट हुए। सभी ने भोपाल सांसद श्री आलोक शर्मा के नेतृत्व में जिला कलेक्टर श्री प्रियंक मिश्रा एवं नगर निगम आयुक्त श्रीमती संस्कृति जैन को ज्ञापन सौंपकर मंदिर की धार्मिक गरिमा एवं ऐतिहासिक स्वरूप को सुरक्षित रखने की मांग की।
ज्ञापन में मांग की गई कि मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार के व्यावसायिक निर्माण पर तत्काल रोक लगाई जाए, मंदिर का संरक्षण एवं भव्य स्वरूप विकसित किया जाए तथा परिसर से हटाई गई सभी देवी-देवताओं की मूर्तियों को पुनः सम्मानपूर्वक उनके मूल स्थान पर स्थापित किया जाए, ताकि श्रद्धालु पूर्व की भांति विधिवत दर्शन एवं पूजा-अर्चना कर सकें।
इस अवसर पर जिला कलेक्टर कार्यालय में आयोजित बैठक में पूरे विषय पर विस्तार से चर्चा हुई। उपस्थित सभी सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों ने एक स्वर में कहा कि कमाली मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि पुराने भोपाल की आस्था, संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है। मंदिर परिसर में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा।
सांसद श्री आलोक शर्मा ने कमाली मंदिर परिसर का निरीक्षण कर कहा कि यह मंदिर पिछले एक शताब्दी से अधिक समय से लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मंदिर परिसर में व्यावसायिक निर्माण धार्मिक भावनाओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मंदिर परिसर में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण नहीं होने दिया जाएगा तथा समाज के विभिन्न संगठनों के सहयोग से मंदिर को संरक्षित एवं और अधिक भव्य बनाया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से यह भी आग्रह किया कि हटाई गई सभी मूर्तियों को सम्मानपूर्वक पुनः स्थापित किया जाए, जिससे श्रद्धालुओं को पुनः माताजी एवं अन्य देवी-देवताओं के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हो सके।
बैठक में यह भी बताया गया कि इब्राहिमगंज बस स्टैंड, घोड़ा नक्कास, सिलावटपुरा, मंगलवारा, हनुमानगंज, जुमेराती सहित पुराने भोपाल के अनेक क्षेत्रों के सनातन धर्मावलंबी विवाह से पूर्व माता पूजन तथा विवाह संपन्न होने के बाद नवविवाहित जोड़े के साथ इसी मंदिर में पूजा-अर्चना करने की परंपरा निभाते हैं। ऐसे में मूर्तियों के हटाए जाने से श्रद्धालुओं की धार्मिक परंपराएं प्रभावित हुई हैं। इसलिए मूर्तियों की शीघ्र पुनर्स्थापना आवश्यक है।
बैठक में प्रमोद नेमा, गोपाल मुखरैया, विष्णु राजोरिया, राजकुमार वर्मा, कैलाश मिश्रा, सुनील सूद, मनमोहन अग्रवाल, गोविंद गोयल, चंद्रशेखर तिवारी, अजय श्रीवास्तव, नरेश राव जाधव, अनिल कुमार साहू ‘अकेला’, नारायण सिंह कुशवाह, श्यामबाबू अग्रवाल, परमवीर सिंह, डॉ. सतपति,सुनील अग्रवाल,विवेक साहू, अवनि शर्मा, विजय साहू सहित विभिन्न सामाजिक, व्यापारिक एवं धार्मिक संगठनों के पदाधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
बैठक के अंत में सभी संगठनों ने प्रशासन से मांग की कि कमाली मंदिर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक पहचान को अक्षुण्ण रखते हुए उसके संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं, मंदिर परिसर से हटाई गई मूर्तियों को तत्काल पुनः स्थापित किया जाए तथा मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार के व्यावसायिक निर्माण पर स्थायी रूप से रोक लगाई जाए।

