देवास में होगा ‘स्मरण अफ़ज़ल’ व्याख्यान
देशभर के कला एवं साहित्य विशेषज्ञ होंगे शामिल

वनमाली सृजन केंद्रों के छठवें राष्ट्रीय सम्मेलन के अंतर्गत प्रख्यात चित्रकार अफ़ज़ल की स्मृति में “स्मरण अफ़ज़ल” शीर्षक से अफ़ज़ल स्मृति व्याख्यान का भव्यआयोजन 6 अगस्त 2026 को सायं 4:00 बजे होटल श्री खेड़ापति इंटरनेशनल, देवास में किया जाएगा। इस अवसर पर देश के प्रतिष्ठित चित्रकार, कला गुरु, कला विशेषज्ञ एवं साहित्यकार मालवांचल के विरल चित्रकार अफ़ज़ल के व्यक्तित्व, कृतित्व और भारतीय आधुनिक चित्रकला में उनके योगदान पर विचार व्यक्त करेंगे।
यह कार्यक्रम श्री संतोष चौबे, राष्ट्रीय अध्यक्ष, वनमाली सृजन पीठ, निदेशक, विश्वरंग एवं कुलाधिपति, रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल की अध्यक्षता में आयोजित होगा।
व्याख्यान के प्रमुख वक्ताओं में डॉ. राजेश व्यास (कवि एवं कला समीक्षक, जयपुर), श्री विनय कुमार(आईएएस, निदेशक, बापू टावर, पटना), श्री अशोक भौमिक (वरिष्ठ चित्रकार एवं कला समीक्षक, नई दिल्ली) तथा श्री महावीर वर्मा (चित्रकार एवं लेखक, रतलाम) श्री प्रकाश कांत (वरिष्ठ साहित्यकार, देवास) विशेष रूप से शामिल हैं। सभी वक्ता अफ़ज़ल के कला-संसार, उनकी प्रयोगधर्मिता, अमूर्त चित्रकला और समकालीन भारतीय कला में उनके योगदान पर अपने विचार रखेंगे।
इस अवसर पर अफ़ज़ल ख़ान पर प्रकाशित मोनोग्राफ का लोकार्पण एवं परिचर्चा भी आयोजित की जाएगी। अफ़ज़ल के चित्रों की प्रदर्शनी का भी आयोजन विशेष रूप से किया जाएगा। सम्मेलन के दूसरे सत्र में सायं 6:15 बजे से 7:15 बजे तक स्थानीय रचनाकारों का काव्य-पाठ होगा, जिसका संयोजन श्री चयन कानूनगो करेंगे।
कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय वनमाली सृजन पीठ, वनमाली सृजन केंद्र देवास एवं टैगोर कला केंद्र, रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। आयोजन समिति ने देवास एवं आसपास के सभी कला, साहित्य, संस्कृति तथा मीडिया जगत से जुड़े लोगों से कार्यक्रम में सहभागिता का आग्रह किया है। कार्यक्रम का संचालन- मनीष वैद्यकरेंगे, स्वागत वक्तव्य- कृपाली राणा द्वारा दिया जाएगा। अतिथियों का परिचय तनिष्का द्वारा दिया जाएगा। आभार वक्तव्य एवं कार्यक्रम संयोजन डॉ अर्जुन कुमार सिंह करेंगे।
परिचय– चित्रकार अफ़ज़ल खान
चित्रकार अफ़ज़ल खान का जन्म 1 अगस्त 1936 को देवास में हुआ था। उन्होंने माधव कॉलेज, उज्जैन से ड्राइंग एवं पेंटिंग में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की तथा इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से पेंटिंग में स्नातकोत्तर डिप्लोमा अर्जित किया। जब देवास संगीत और साहित्य के क्षेत्र में अपनी राष्ट्रीय पहचान स्थापित कर रहा था, उसी समय अफ़ज़ल ने चित्रकला के माध्यम से देवास को देश के कला मानचित्र पर विशिष्ट स्थान दिलाया।
उन्होंने औद्योगिक उपयोग के एनामल पेंट को ललित कला के सशक्त माध्यम के रूप में स्थापित करते हुए अनेक अभिनव प्रयोग किए। विभिन्न माध्यमों में सृजन करने के बावजूद उनकी विशेष पहचान अमूर्त चित्रकला रही। वे बाल भवन, भोपाल में निदेशक के रूप में भी कार्यरत रहे। उन्हें राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया तथा उनकी कलाकृतियाँ देश के अनेक प्रतिष्ठित कला-संग्रहों में सुरक्षित हैं। एक समर्पित शिक्षक के रूप में उन्होंने अनेक प्रतिभाशाली कलाकारों का मार्गदर्शन किया, जो आज भारतीय कला-जगत में प्रतिष्ठित स्थान रखते हैं।


