डॉ. राजकुमार मालवीय का मंत्र: नौकरी नहीं, रोजगार देने वाले बनें युवा

बोले—नरवाई को जलाना नहीं, विज्ञान और नवाचार से उद्योग में बदलें; यही पर्यावरण संरक्षण, किसानों की आय और आत्मनिर्भर भारत का सबसे प्रभावी मॉडल
भोपाल। समाजसेवी, पर्यावरणविद् एवं वैज्ञानिक डॉ. राजकुमार मालवीय ने कहा कि भारत का भविष्य तभी सशक्त होगा, जब युवा नौकरी की कतार में खड़े होने के बजाय रोजगार सृजन की दिशा में आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्यमिता ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति दे सकती है।
ग्राम लसूड़िया कांगर में आयोजित “नरवाई से उद्योग” विषयक प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन अवसर पर उन्होंने कहा कि खेतों में बची नरवाई को जलाना केवल पर्यावरण के लिए नुकसानदायक नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये की संभावित आर्थिक संपदा को नष्ट करना भी है। यदि कृषि अवशेषों का वैज्ञानिक उपयोग किया जाए तो इससे नए उद्योग स्थापित होंगे, किसानों की आय बढ़ेगी और गांवों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार होंगे।
डॉ. मालवीय ने कहा, “पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक समृद्धि एक-दूसरे के पूरक हैं। विज्ञान आधारित सोच और नवाचार को अपनाकर हम गांवों को आत्मनिर्भर और युवाओं को आत्मविश्वासी बना सकते हैं।”
कार्यक्रम में प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। बड़ी संख्या में किसान, युवा, महिला समूहों के सदस्य और ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
“युवाओं का लक्ष्य नौकरी पाना नहीं, बल्कि रोजगार पैदा करना होना चाहिए। विज्ञान और नवाचार ही विकसित भारत की सबसे बड़ी शक्ति हैं।”



