आरएनटीयू में कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य में कार्यक्रम, शहीदों के बलिदान को किया गया याद, युवाओं से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की अपील की

भोपाल। रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय (आरएनटीयू) ने कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य में जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र के साथ मिलकर गरिमामयी कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके शौर्य, त्याग और बलिदान को नमन किया गया। साथ ही युवाओं से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान भी किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्य भारत प्रांत संघचालक अशोक पांडे, विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. आर.पी. दुबे, सेवानिवृत्त कर्नल नारायण पारवानी, डॉ. विश्वास चौहान, डॉ. आर.डी. मांडवकर और कुलसचिव डॉ. संगीता जौहरी मुख्यरूप से उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि अशोक पांडे ने कहा कि कोई भी सैनिक केवल वेतन के लिए सीमा पर गोलियां नहीं खाता, बल्कि उसके पीछे राष्ट्रभक्ति का जज्बा होता है। उन्होंने कहा कि देशभक्ति केवल सेना की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। उन्होंने युवाओं से प्रश्न करते हुए कहा कि आज जोश तो है, लेकिन यदि उसके सामने स्पष्ट उद्देश्य नहीं होगा तो जीवन दिशाहीन हो जाएगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण वही युवा कर सकता है, जिसकी पहली प्राथमिकता ‘नेशन फर्स्ट’ हो। श्री पांडे ने कहा कि अधिकार और कर्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। पहले अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए, उसके बाद अधिकारों की बात करनी चाहिए। व्यक्ति और परिवार के हित से ऊपर हमेशा राष्ट्रहित होना चाहिए।
वहीं सेवानिवृत्त कर्नल नारायण पारवानी ने कहा कि भारतीय सैनिकों ने असंभव प्रतीत होने वाली परिस्थितियों में अदम्य साहस और वीरता का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि यह युद्ध किसी ‘सुसाइड मिशन’ से कम नहीं था, क्योंकि सैनिकों को पता था कि शायद वे वापस न लौटें, फिर भी उन्होंने राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा दी। उन्होंने बताया कि भोजन, दवाइयों और संसाधनों की कमी के बावजूद भारतीय सेना ने दुश्मन को परास्त किया। उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध का अध्ययन आज भी दुनिया की आधुनिक सैन्य अकादमियों में किया जाता है। इस दौरान उन्होंने कारगिल युद्ध पर एक विशेष प्रस्तुतीकरण भी दिया।
विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. आर.पी. दुबे ने कारगिल युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि पूरा देश उनके सर्वोच्च बलिदान का सदैव ऋणी रहेगा। उन्होंने कहा कि आज भारत रक्षा क्षेत्र में लगातार सशक्त हो रहा है और यह प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने युवाओं से अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
स्टेट लॉ कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. विश्वास चौहान ने कहा कि कारगिल युद्ध विश्व के सैन्य इतिहास की महत्वपूर्ण लड़ाइयों में से एक है। दुर्गम पर्वतीय परिस्थितियों में भारतीय सैनिकों ने जिस साहस, रणनीति और पराक्रम का परिचय दिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। उन्होंने युवाओं से सैनिकों के त्याग और बलिदान को समझने तथा राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के आखिर में भारत माता जय के नारों से सभा गूंज उठा। सभी ने शहीदों के बलिदान को याद किया। इस दौरान कार्यक्रम में अमिताभ सक्सेना, समीर चौधरी, लेफ्टिनेंट मनोज सिंह मनराल सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी और प्राध्यापक भी मौजूद रहे।


