


कुछ लोग पद प्राप्त करते हैं, कुछ लोग प्रतिष्ठा, किंतु विरले ही ऐसे होते हैं जो विश्वास अर्जित करते हैं। श्री राजेन्द्र शुक्ल ऐसे ही जननेता हैं, जिनकी पहचान केवल एक जनप्रतिनिधि या मंत्री के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में स्थापित हुई है, जिसने राजनीति को सेवा, संवाद और संवेदना के साथ जोड़ा। रीवा की पावन धरती से आरम्भ हुई उनकी सार्वजनिक यात्रा आज मध्यप्रदेश के विकास विमर्श का एक महत्वपूर्ण अध्याय बन चुकी है। पाँच बार लगातार विधानसभा के लिए निर्वाचित होना मात्र राजनीतिक सफलता नहीं, बल्कि जनता द्वारा व्यक्त उस अटूट विश्वास का प्रमाण है, जो वर्षों की निरंतर उपलब्धता, पारदर्शिता और जनसरोकारों से अर्जित होता है।
सादगी में शक्ति, स्पष्टता में विश्वास
श्री राजेन्द्र शुक्ल का व्यक्तित्व आडंबर से दूर और व्यवहार से निकट है। वे अपनी बात को स्पष्ट शब्दों में रखने के लिए जाने जाते हैं। कठिन प्रशासनिक निर्णय हों या जनसरोकार के प्रश्न, वे संवाद से समाधान खोजने में विश्वास रखते हैं। कार्यकर्ताओं के लिए वे आत्मीय ‘राजेन्द्र भैया’ हैं और प्रशासनिक अधिकारियों के लिए अनुशासन, पारदर्शिता तथा उत्तरदायित्व के पक्षधर मार्गदर्शक। यही कारण है कि उन्होंने राजनीति और प्रशासन के बीच विश्वास का एक स्वस्थ वातावरण निर्मित किया। श्री शुक्ल का सार्वजनिक जीवन जनसेवा, सुशासन और राष्ट्र के प्रति अपना समर्पण सदैव प्रेरणास्पद रहा है। सहज संवादशीलता श्री शुक्ल के व्यक्तित्व की विशिष्ट विशेषता है। वे लोगों की बातें सुनते हैं, समस्याओं को समझते हैं और समाधान खोजने की दिशा में सदैव सक्रिय रहते हैं। स्पष्टवादिता उनके स्वभाव का अभिन्न अंग है।
विकास की वह दृष्टि जिसमें परंपरा भी है और प्रगति भी
अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में उन्होंने ऊर्जा, पर्यावरण, वन, उद्योग, खनिज, आवास, जनसम्पर्क सहित अनेक विभागों की जिम्मेदारी संभाली। प्रत्येक दायित्व में उनकी सोच केवल तात्कालिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि दीर्घकालिक परिवर्तन पर केन्द्रित रही। ऊर्जा क्षेत्र में ‘अटल ज्योति अभियान’ के माध्यम से प्रदेश में निर्बाध विद्युत व्यवस्था की दिशा में किए गए प्रयास आज भी उल्लेखनीय माने जाते हैं। वहीं रीवा का विशाल सौर ऊर्जा परियोजना इस बात का उदाहरण है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। उन्होंने यह भी सिद्ध किया कि किसी क्षेत्र का विकास केवल भवनों और सड़कों से नहीं होता; उसके इतिहास, संस्कृति और जनभावनाओं को सम्मान देना भी उतना ही आवश्यक है। सफेद बाघ को उसके प्राकृतिक क्षेत्र से जोड़ने का प्रयास इसी संवेदनशील सोच का परिचायक रहा।
शिक्षा, संस्कृति और समाज के प्रति प्रतिबद्धता
श्री शुक्ल का मानना है कि किसी भी समाज की वास्तविक शक्ति उसकी शिक्षा और संस्कृति में निहित होती है। संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना, महाविद्यालयों और छात्रावासों के विकास तथा सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए उनके प्रयास इसी सोच को प्रतिबिंबित करते हैं। उन्होंने युवाओं के लिए खेल अधोसंरचना विकसित करने, शहरी क्षेत्रों में हरित उद्यानों का विस्तार करने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने वाले अनेक कार्यों को भी प्राथमिकता दी। गौ-सेवा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनका समर्पण उनकी संवेदनशीलता को और अधिक स्पष्ट करता है। उनकी सोच युवाओं के लिए भी प्रेरणादायी है। वे अक्सर कहते हैं—
“जोश को होश से जोड़िए। अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों को भी समझिए। विचारशील नागरिक ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण करते हैं।” यह संदेश केवल भाषण का हिस्सा नहीं, बल्कि उनके सार्वजनिक जीवन का व्यावहारिक दर्शन है।
नेतृत्व का अर्थ
श्री राजेन्द्र शुक्ल की कार्यशैली का सार यदि एक वाक्य में कहा जाए तो वह यह है कि समस्याओं को अवसर में बदलने की क्षमता ही नेतृत्व की वास्तविक पहचान है। वे अक्सर इस बात पर बल देते हैं कि किसी भी योजना की सफलता उसके अंतिम लाभार्थी के जीवन में आए परिवर्तन से मापी जानी चाहिए। यही सोच उन्हें योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और सतत समीक्षा के लिए प्रेरित करती है। उनकी राजनीति टकराव से अधिक संवाद की राजनीति है। वे प्रशासन और जनता के बीच विश्वास का सेतु बनकर कार्य करने में विश्वास रखते हैं। यही कारण है कि उनके निर्णयों में तकनीकी दक्षता के साथ मानवीय दृष्टिकोण भी दिखाई देता है।
नैतिकता और संयम का पथ
आज जब सार्वजनिक जीवन में तीव्र प्रतिस्पर्धा और कटुता का वातावरण देखने को मिलता है, तब श्री शुक्ल ने सादगी, संयम और शालीनता को अपनी पहचान बनाया है। वे असहमति को संवाद में बदलने, आलोचना को सुधार के अवसर के रूप में देखने और जनहित को सर्वोपरि रखने के पक्षधर हैं। उनका विश्वास है कि जनहित सर्वोपरि होना चाहिए और राजनीति समाज को जोड़ने का माध्यम बने, विभाजित करने का नहीं। उनका जीवन यह संदेश देता है कि पद क्षणिक हो सकता है, किंतु सिद्धांत स्थायी होते हैं। सेवा का भाव ही नेतृत्व को दीर्घकालिक सम्मान प्रदान करता है।
विंध्य क्षेत्र को देश के विकसित क्षेत्र के रूप में दिलाई पहचान
श्री राजेन्द्र शुक्ल रीवा सहित विंध्य क्षेत्र को देश के सबसे विकसित क्षेत्र के रूप में पहचान दिलाने के चौतरफा विकास के लक्ष्य को लेकर चल रहे हैं। श्री शुक्ल का अब तक का सार्वजनिक जीवन जनसेवा और समर्पण का एक अद्भुत उदाहरण रहा है। विशेष रूप से, उपमुख्यमंत्री का दायित्व सँभालने के पश्चात जिस प्रकार उनके कुशल नेतृत्व और प्रयासों से विंध्य क्षेत्र का कायाकल्प हो रहा है, वह अत्यंत उल्लेखनीय है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्र्, मोदी जी के “विकसित भारत” के संकल्प को साकार करने की दिशा में आपकी दूरदर्शी सोच ने रीवा के साथ विंध्य को राष्रीतहय एवं वैश्विक स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई है।
प्रदेश की पहली नागरिक विमानन नीति के जारी होने के उपरांत प्रधानमंत्री जी के विजन के अनुसार हवाई चप्पल से हवाई जहाज के सफर के सपने को साकार किया है। रीवा से दिल्ली, इंदौर, रायपुर सीधे हवाई मार्ग के माध्यम से जुड़ चुके हैं। इसके अतिरिक्त भोपाल एवं कोलकाता के लिए भी हवाई सेवाएं जल्दी शुरू हो जाएंगी।
रीवा में एयरपोर्ट सुविधा के लिए उनके प्रयास फलीभूत हुए हैं विंध्य की देश के अन्य हिस्सों से कनेक्टिविटी बेहतर हुई, विंध्य के रेल और हवाई मार्ग से महानगरों से जुड़ना तथा फ्लाईओवर, सड़कों के विकास से उद्योग, पर्यटन, शिक्षा, पेयजल, सौंदर्यीकरण एवं स्वास्थ्य आदि के क्षेत्र में गति मिलना श्री शुक्ल के प्रयासों का जीता-जागता उदाहरण है।
पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी विशेष अभिरुचि रही है। जगह-जगह वृक्षारोपण और नगर वन वन का निर्माण करवाया है। राजकपूर आडिटोरियम की स्थापना से विंध्य के कलाकारों को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिला है। युवाओं के खेलकूद के लिए उन्होंने विश्व स्तरीय मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण कराया। बीहर नदी में रिवर फ्रंट का निर्माण भी उनके प्रयासों का परिणाम है। श्री शुक्ल के प्रयासों से संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। शिक्षा और संस्कृति के प्रति यह उनका समर्पण प्रदर्शित करता है।
श्री राजेंद्र शुक्ल गौ-सेवा के कार्यों के लिए सदैव प्रयासरत रहे हैं। उनके द्वारा गौ-सेवा में जनमानस की सहभागिता एवं प्रयासों को आर्थिक रूप से लाभकारी बनाने की दिशा में प्रयास किए गये हैं। बसामन मामा गौ अभयारण्य गायों की देखभाल और संरक्षण के उत्कृष्ट प्रयासों का मूर्त मॉडल है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में नया विश्वास
वर्तमान कार्यकाल में उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री के रूप में श्री राजेन्द्र शुक्ल ने जनस्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए अनेक आधुनिक महत्वपूर्ण पहलें प्रारम्भ की हैं। उनका स्पष्ट दृष्टिकोण रहा है कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा प्रत्येक नागरिक तक पहुँचना शासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
• प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार को गति मिली तथा विभिन्न शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में एमबीबीएस सीटों में वृद्धि के प्रयास हुए।
• जिला अस्पतालों के उन्नयन, नई स्वास्थ्य सुविधाओं और आवश्यक पदों की स्वीकृति पर विशेष बल दिया गया।
• आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रदेश में डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में कार्य हुआ।
• मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान और बेहतर उपचार व्यवस्था पर निरंतर ध्यान दिया गया।
• नवजात शिशुओं के उपचार हेतु विशेष इकाइयों के सुदृढ़ीकरण और स्वास्थ्य संस्थानों की गुणवत्ता सुधार की दिशा में प्रयास किए गए।
• चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता बढ़ाने तथा स्वास्थ्य सेवाओं को आमजन के अधिक निकट पहुँचाने के लिए सतत पहल की गई।
• जनस्वास्थ्य संबंधी योजनाओं में पारदर्शिता, समयबद्धता और परिणामोन्मुख कार्य संस्कृति पर विशेष बल दिया गया।
श्री शुक्ल अक्सर कहते हैं कि “स्वास्थ्य सेवा केवल एक विभागीय दायित्व नहीं, बल्कि मानवीय करुणा का विस्तार है।” यही भावना उनके निर्णयों में दिखाई देती है।
चिकित्सा शिक्षा का विस्तार
मध्यप्रदेश में चिकित्सा शिक्षा को नई गति मिली है। विभिन्न शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में एमबीबीएस सीटों की वृद्धि, नवीन चिकित्सा संस्थानों का विकास तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने के प्रयास इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान सहित विभिन्न कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया गया है। गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान और समय पर उपचार की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार समीक्षा की जा रही है।
नवजात एवं बाल स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण
विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाइयों तथा मातृ-नवजात देखभाल सेवाओं के विस्तार के माध्यम से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है कि जन्म के बाद प्रत्येक शिशु को बेहतर चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध हो।
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन
डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के क्रियान्वयन को गति प्रदान की गई है। स्वास्थ्य अभिलेखों के डिजिटलीकरण, स्वास्थ्य संस्थानों के पंजीकरण और नागरिकों को सरल स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य हो रहा है।
आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
‘पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा’ जैसी पहल गंभीर परिस्थितियों में रोगियों को त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आधुनिक तकनीक और त्वरित समन्वय के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास उनके नेतृत्व की पहचान बन रहा है।
जन्मदिवस पर शुभकामना
चलते रहें आप लोकपथ पर, दीपक बन हर द्वार,
सेवा, सद्भाव, सत्य की, बढ़ती रहे पुकार।
जन-जन का विश्वास मिले, कर्म बने पहचान,
दीर्घायु हों, यशस्वी रहें, यही हृदय का गान।
रीवा की माटी का गौरव, मध्यप्रदेश की शान,
जनसेवा में रत रहे सदा, बढ़ता रहे सम्मान।
स्वास्थ्य, शिक्षा, विकास पथ पर, बढ़ते रहें कदम,
आपके शुभ नेतृत्व से, समृद्ध हो हर जन।
उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल के जन्मदिवस पर यही मंगलकामना है कि वे स्वस्थ, दीर्घायु और ऊर्जावान रहें। उनका अनुभव, उनकी संवेदनशीलता और उनकी विकासोन्मुख दृष्टि प्रदेश की प्रगति को निरंतर नई दिशा देती रहे। जनसेवा का यह पथ और अधिक व्यापक हो, तथा उनके नेतृत्व में मध्यप्रदेश विकास, सुशासन और मानवीय मूल्यों की नई ऊँचाइयों को प्राप्त करे।
(लेखक जनसंपर्क के सेवानिवृत्त संयुक्त संचालक हैं)

