साधना के बाद प्राप्त शक्ति का उपयोग लोकमंगल में करना ही सच्ची आराधना है उपासना, साधना के बाद आराधना का संकल्प लिया

गायत्री शक्तिपीठ पर सवा लक्ष अनुष्ठान की सामूहिक पूर्णाहुति)
सच्चा साधक वह है जो अपने सुख-दुख से ऊपर उठकर समाज के दुख – दर्द को अपना समझे और उसके निवारण में जुड़ जाए। अर्थात साधना के बाद प्राप्त शक्ति का उपयोग लोकमंगल में करना ही सच्ची आराधना है।यह जानकारी श्री राजेश पटेल समन्वयक मध्य प्रदेश झोन एवं व्यवस्थापक गायत्री शक्तिपीठ भोपाल ने गायत्री शक्तिपीठ पर आयोजित सवा लक्ष गायत्री मंत्र अनुष्ठान की सामूहिक पूर्णाहुति पर आयोजित यज्ञ में साधकों को दी। गायत्री जयंती से आरंभ हुए 40 दिवसीय अनुष्ठान में भोपाल नगर में करीब 150 साधक यह अनुष्ठान कर रहे थे। इनमें से करीब 120 साधकों ने सपरिवार..(.250. परिजनों) 24 कुंडीय.. गायत्री महायज्ञ में 24000 हजार आहुतियां समर्पित कीं। साधकों ने अपनी साधना को लोक आराधना नियोजित करने के लिए नियमित जन संपर्क,का संकल्प लिया।
इस अवसर पर साधकों ने अनुष्ठान के दौरान हुए अनुभवों को भी आपस में साझा किया।
यहां पर युवा प्रकोष्ठ द्वारा माह के प्रथम रविवार को आयोजित गर्भोत्सव के अंतर्गत 24 भावी माताओं का पुंसवन संस्कार कराया गया।इसकी विषेश आहुतियां भी यज्ञ भगवान को समर्पित की गई।संस्कार के साथ इन्हें गर्भावस्था में रहन – सहन,आहार- विहार की विस्तृत जानकारी विषय विशेषज्ञों द्वारा दी गई। जिसमें गर्भ के रूप में हम दिव्य चेतना को धारण कर रहे हैं, स्वस्थ एवं प्रसन्न रहने, परिवार को कलह और मनोमालिन्य न उभरने देंने,आपना आचरण – व्यवहार अनुकरणीय बनाने आदि संकल्प कराएं गये।भावी माताओं को आशीर्वाद स्वरूप सद्साहित्य भी प्रदान किया गया। कार्यक्रम का नियोजन एवं संचालन जिला सह समन्वयक श्री देवेंद्र श्रीवास्तव जी वरिष्ठ परिवराजक श्री वासुदेव डांगे जी की टीम के द्वारा किया गया।। कार्यक्रम में युवा प्रकोष्ठ एवं महिला मंडल की बहनों और व्यवस्थापक कार्यालय के वरिष्ठ कार्यकर्ता श्री विजय गुप्ता जी श्री रामराव चढ़ोकर जी की पूरी टीम का विशेष सहयोग रहा।। जिला समिति सदस्य साधना प्रभारी श्री विनोद मालवीया जी ने सभी का आभार व्यक्त किया



