खबरमध्य प्रदेश

54 वर्ष पुरानी ट्रांसमिशन लाइनें भी बनीं विश्वसनीयता की मिसाल, बैतूल जिले की 20 ईएचवी ट्रांसमिशन लाइनों ने 1500 दिन बिना ब्रेकडाउन के की विद्युत आपूर्ति:ऊर्जा मंत्री श्री तोमर

एक इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन लाइन भी शामिल, आधुनिक मेंटेनेंस तकनीकों और सतत मॉनिटरिंग से मिली सफलता

भोपाल । ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) की बैतूल जिले में स्थित 20 एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज (ईएचवी) ट्रांसमिशन लाइनों ने विद्युत पारेषण की विश्वसनीयता का उल्लेखनीय रिकॉर्ड स्थापित किया है। इन ट्रांसमिशन लाइनों पर विगत लगभग 1500 दिनों से एक भी ब्रेकडाउन दर्ज नहीं हुआ है और इनके माध्यम से निर्बाध विद्युत पारेषण जारी है।

इस उपलब्धि की विशेषता यह है कि इनमें शामिल कुछ ट्रांसमिशन लाइनें वर्ष 1972 में ऊर्जीकृत की गई थीं। लगभग 54 वर्ष पुरानी ये लाइनें आज भी पूरी क्षमता और विश्वसनीयता के साथ संचालित हो रही हैं। दशकों पुरानी परिसंपत्तियों का यह उत्कृष्ट प्रदर्शन कंपनी की सुदृढ़ मेंटेनेंस व्यवस्था, आधुनिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग तथा अभियंताओं और तकनीकी कर्मचारियों की सतत निगरानी का परिणाम माना जा रहा है।

ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि बैतूल जिले की इन 20 ट्रांसमिशन लाइनों सहित प्रदेशभर में एमपी ट्रांसको की 593 ईएचवी ट्रांसमिशन लाइनें विगत चार वर्षों से बिना किसी ब्रेकडाउन के सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि कंपनी के अभियंताओं, तकनीकी कर्मचारियों तथा अनुरक्षण कार्यों में लगे आउटसोर्स कार्मिकों की तकनीकी दक्षता, समर्पण और निरंतर प्रयासों का प्रतिफल है।

विद्युत उत्पादन मे भी
बनी रही निरंतरता

सारणी क्षेत्र से जुड़ी इन ट्रांसमिशन लाइनों के निरंतर और निर्बाध संचालन का सकारात्मक प्रभाव विद्युत उत्पादन पर भी पड़ा है। ट्रांसमिशन नेटवर्क में किसी प्रकार का ब्रेकडाउन नहीं होने से सारणी विद्युत गृह से उत्पादित विद्युत की निकासी (पावर एवैक्यूएशन) लगातार सुचारु रूप से होती रही। परिणामस्वरूप ट्रांसमिशन संबंधी बाधाओं के कारण उत्पादन इकाइयों को किसी प्रकार का लोड प्रतिबंध या उत्पादन कटौती नहीं करनी पड़ी और विद्युत उत्पादन की निरंतरता बनी रही। मजबूत एवं विश्वसनीय ट्रांसमिशन नेटवर्क न केवल गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करता है, बल्कि उत्पादन केंद्रों की दक्षता और उपलब्धता बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इन ट्रांसमिशन लाइनों ने हासिल की उपलब्धि–

बैतूल क्षेत्र में यह उपलब्धि हासिल करने वाली ट्रांसमिशन लाइनों में इंटर-स्टेट 220 केवी सारणी-कलमेश्वर ट्रांसमिशन लाइन, वर्ष 1972 में ऊर्जीकृत सारणी पावर हाउस से 220 केवी सबस्टेशन सारणी की दो 220 केवी लाइनें (वर्तमान में हंडिया एवं इटारसी), वर्ष 1980 एवं 1981 में ऊर्जीकृत सारणी पावर हाउस से 220 केवी सबस्टेशन इटारसी की लाइनें, 220 केवी बैतूल से पावर ग्रिड के दो सर्किट, 220 केवी बैतूल-छिंदवाड़ा का एक सर्किट, 132 केवी बैतूल इंटरकनेक्टर के दो सर्किट, 132 केवी बैतूल-मुलताई लाइन, 132 केवी बैतूल रेलवे ट्रैक्शन फीडर के दो सर्किट, 132 केवी मुलताई रेलवे ट्रैक्शन की दो ट्रांसमिशन लाइनें, 132 केवी सारणी-छिंदवाड़ा का एक सर्किट, 132 केवी मुलताई-आमला ट्रांसमिशन लाइन तथा 132 केवी गुड़गांव-विंड जनरेशन कुकरु का एक सर्किट शामिल है।

नियमित मेंटेनेंस से मिली सफलता

ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने कहा कि ट्रांसमिशन नेटवर्क की रिलायबिलिटी बढ़ाने के लिए कंपनी द्वारा थर्मो-विजन इंस्पेक्शन, ड्रोन सर्विलांस, एससीएडीए आधारित रियल-टाइम मॉनिटरिंग, ऑनलाइन कंडीशन मॉनिटरिंग तथा प्रिवेंटिव मेंटेनेंस जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इसके साथ ही नियमित लाइन पेट्रोलिंग, प्री-मानसून मेंटेनेंस, लाइन कॉरिडोर मैनेजमेंट तथा पेड़ों की कटाई-छंटाई जैसे कार्यों के माध्यम से संभावित तकनीकी खामियों की समय रहते पहचान कर उनका निराकरण किया जाता है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों और मैदानी स्तर पर सतत निगरानी के प्रभावी समन्वय से प्रदेश के ट्रांसमिशन नेटवर्क की रिलायबिलिटी लगातार बढ़ रही है।

*

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button