सांवरिया सेठ आए थे नानी बाई का मायरा भरने- रितु माहेश्वरी
माहेश्वरी महिला मंडल द्वारा नानी बाई का मायरा तीन दिवसीय उत्सव आयोजित

माहेश्वरी महिला मंडल भोपाल द्वारा गुजराती भवन में तीन दिवसीय उत्सव नानी बाई का मायरा का धूमधाम से आयोजन किया गया। कार्यक्रम के बारे में बताते हुए महिला मंडल की रितु माहेश्वरी ने कहा कि उत्सव में कथा का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि तीसरे दिन आज नानी बाई का मायरा उत्सव धूमधाम से मना। वहीं महिला मंडल की पूजा ने कहा कि नानी बाई का मायरा हमारी संस्कृति का प्रतीक है । गुजरात के जूनागढ़ के संत नर्सिंह मेहता भगवान कृष्ण की भक्ति में लीन रहते थे। उनकी बेटी नानी बाई की शादी थी लेकिन मायरा भरने के लिए पैसे नहीं थे और नानी बाई के कोई भाई नहीं थे। मायरा यानी भात का उपहार जो शादी के समय भाई द्वारा भरा जाता है। नरसिंह मेहता की पुकार पर भगवान श्री कृष्ण खुद भाई बनकर आए और मायरा भरा। सांवरिया सेठ यानी श्री कृष्ण बैलगाड़ी में भरकर सोना, चांदी, कपड़े और रुपए लेकर आए थे तथा मायरा भरकर भक्त की लाज बचाई। माहेश्वरी समाज के लोग सावन महीने में मायरा का उत्सव मनाते हैं और सांवरिया सेठ की भक्ति में लीन हो जाते हैं।



