राष्ट्रीय वनमाली विशिष्ट कथा सम्मान 2026
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. कृष्णा अग्निहोत्री, डॉ. रमेश दवे और श्री सूर्यकांत नागर हुए सम्मानित

सुप्रसिद्ध कथाकार, शिक्षाविद् एवं विचारक जगन्नाथ प्रसाद चौबे ‘वनमाली’ जी की 114 वीं जयंती के अवसर पर आयोजित वनमाली सृजन केंद्रों के छठवें राष्ट्रीय सम्मेलन के अंतर्गत वर्ष 2026 के राष्ट्रीय वनमाली विशिष्ट कथा सम्मान से हिंदी साहित्य के तीन प्रतिष्ठित रचनाकार डॉ. कृष्णा अग्निहोत्री, डॉ. रमेश दवे तथा श्री सूर्यकांत नागर को उनके उत्कृष्ट साहित्यिक अवदान के लिए सम्मानित किया गया। समारोह में सम्मानित साहित्यकारों को शॉल, श्रीफल, प्रशस्ति-पत्र तथा ₹51,000 की सम्मान राशि प्रदान कर सम्मानित किया गया।
सम्मान समारोह 7 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति, इंदौर में पूर्ण भव्यता से आयोजित किया गया। यह आयोजन राष्ट्रीय वनमाली सृजन पीठ, विश्व रंग फाउंडेशन, रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी एवं डॉ. सी. वी. रामन विश्वविद्यालय, खंडवा के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
सम्मान समारोह की अध्यक्षता करते हुए श्री संतोष चौबे, राष्ट्रीय अध्यक्ष, वनमाली सृजन पीठ, निदेशक, विश्व रंग एवं कुलाधिपति, रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल ने कहा कि वनमाली कथा सम्मान समकालीन कथा परिदृश्य में जनतांत्रिक एवं मानवीय मूल्यों की तलाश में लगे कथा साहित्य के पुनर्प्रतिष्ठा करने तथा उसे सम्मान प्रदान करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया हैं। यह एक ऐसे कथाकार की याद में स्थापित किया गया है जो साहित्य और कर्म के माध्यम से इन्हीं मूल्यों की गरिमा बचाए रखने के लिए जीवन भर संघर्ष करते रहे। इसके अंतर्गत एक विशिष्ट समय में हिंदी साहित्य में प्रकाशित कथा एवं उपन्यास साहित्य को दृष्टिगत रखकर रचनाकार का चयन किया जाता है।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय वनमाली विशिष्ट कथा सम्मान से सम्मानित डॉ. कृष्णा अग्निहोत्री जी, डॉ. रमेश दवे जी और श्री सूर्यकांत नागर जी की रचना धर्मिता में जनपक्षता, संवेदना से आलोकित सुख-दुख, उम्मीद, उत्साह और लोक की विरल बानगी है। इन रचनाकारों के विषय वैविध्य, खुलेपन का आग्रह, यथार्थ में पगी नाटकीयता और करुणा के भाव से संसार संजीव होता है।
समारोह के मुख्य अतिथि श्री रघुनंदन शर्मा, पूर्व सांसद एवं कार्याध्यक्ष, तुलसी मानस संस्थान, भोपाल, हिंदी भवन, भोपाल ने सभी सम्मानित रचनाकारों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि इनके साहित्य में मालवांचल की गहन गंभीर माटी की सौंधी महक हम सभी को सामाजिक और राष्ट्रीयता के मूल्यों से जोड़ती चलती हैं।
सम्मान समारोह में आत्मिय सान्निध्य श्री मुकेश वर्मा, वरिष्ठ कथाकार एवं अध्यक्ष, वनमाली सृजन पीठ, भोपाल का प्राप्त हुआ। श्री प्रमोद त्रिवेदी (उज्जैन), श्री प्रकाश कांत (देवास) एवं श्री कैलाश मंडलेकर (खंडवा) ने सम्मानित रचनाकारों के कृतित्व और व्यक्तित्व पर अपने विचार व्यक्त किए।
युवा कथाकार एवं वनमाली कथा पत्रिका के संपादक श्री कुणाल सिंह ने ‘नई कहानी का परिदृश्य’ पर अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर ‘वनमाली कथा’ एवं ‘वनमाली वार्ता’ पत्रिका के नवीन अंकों एवं वनमाली जी की संपूर्ण कहानियाँ पुस्तक का लोकार्पण भी किया गया। सम्मान समारोह का संचालन विनय उपाध्याय, वरिष्ठ उद्घघोष एवं संपादक, रंग संवाद द्वारा किया गया। आभार सुश्री ज्योति रघुवंशी, राष्ट्रीय संयोजक, वनमाली सृजन पीठ द्वारा व्यक्त किया गया।
सम्मानित रचनाकारों का परिचय
डॉ. कृष्णा अग्निहोत्री
जन्म- 8 अक्तूबर 1934 को नजीराबाद, राजस्थान में।
शिक्षा- अंग्रेज़ी साहित्य एवं हिन्दी साहित्य में एम.ए. एवं पीएच.डी. की डिग्री प्राप्त की है।
प्रमुख प्रकाशित कृतियाँ उपन्यास बात एक औरत की, बौनी परछाइयां, टपरेवाले, कुमारिकाएँ, अभिषेक, टेसू की टहनियाँ, निष्कृति, नीलोफर, बित्ता भर की छोकरी। कहानी संग्रह टीन के घेरे, विरासत, गलियारे, याही बनारसी रंग बा, पारस, नपुंसक, दूसरी औरत, जिंदा आदमी, जै सियाराम, सर्पदंश आदि। बाल साहित्य-बुद्धिमान सोनू, नीली आँखों वाली गुड़िया, संतरंगी बौने रिपोर्ताज- भीगे मन रीते तन आत्मकथा- लगता नहीं है दिल मेरा पुरस्कार व सम्मान- कृष्णा अग्निहोत्री को रत्नभारती पुरस्कार’, ‘अक्षरा सम्मान’, वाग्मणि सम्मान सहित कई राष्ट्रीय एवं पंजाब, हरियाणा, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान से कई राज्य स्तरीय पुरस्कार एवं सम्मान मिल चुके हैं। फिलहाल वे इंदौर में रहकर साहित्य की सेवा कर रही हैं।
डॉ. रमेश दवे
जन्म : 08 जून 1936, शाजापुर (म.प्र.)।
प्रमुख कृतियाँ : काँच के दख्त का डर (कविता संग्रह), देह दीक्षा (कहानी संग्रह), प्रेमचंद की रूह, रोम का मां प्रश्न- युग, खेल गुरु (उपन्यास), समकालीन अफ्रीकी साहित्य, शरद जोशी आलोचनात्मक मोनोग्राम, अंत का आरंभ, समय और साहित्य (आलोचना), एक नहीं था अफलातून, चीख (नाटक)। सम्मान : नंद दुलारे वाजपेयी आलोचना सम्मान, म.प्र. साहित्य अकादमी, भोपाल, शताब्दी संदर्भसारस्वत सम्मान, श्री मध्य भारत, हिन्दी साहित्य समिति, इंदौर, श्रेष्ठ कला आचार्य, मालवरत्न, अभिनव शब्द शिल्पी, राष्ट्रीय शिक्षा पुरस्कार (भारत सरकार), अक्षर साहित्य सम्मान (म. प्र. लेखक संघ), कुसुमांजलि साहित्य सम्मान, कुसुमांजलि फाउंडेशन।
सूर्यकांत नागर
जन्म : 03 फरवरी 1933, शाजापुर (म.प्र.)
मुख्य कृतियाँ – उपन्यासः युद्ध जारी रहे, यह जग काली कूकरी, कहानी संग्रहः गलत होते संदर्भ, सूखते पोखर की मछली, दरिंदे, बिना चेहरे का पेट, शान्तिनिकेतन में डॉन, प्रतिनिधि कहानियाँ, कोहरे से लिपे चेहरे, श्रेष्ठ कहानियाँ, लघुकथा संग्रहः विषबीज, व्यंग्य संग्रहः गुदड़ी के लाल, निबंध संग्रहः अपने ही जाये दुःख, सड़क जो है, सेक्यूलर है आत्मकथ्यः सरे राह चलते-चलते, अन्यः आईना।



