डूब गई दिल्ली!: गलियों में तैरते नजर आए बच्चे, सड़कों पर रेंग रहीं गाड़ियां; बारिश में बह गए सरकारी दावे


दिल्ली और एनसीआर के इलाकों में लगातार हो रही तेज बारिश ने आम जनजीवन को व्यापक रूप से प्रभावित किया है। मानसून की इस सक्रियता से जहां लोगों को उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत मिली है, वहीं जगह-जगह जलभराव और भारी ट्रैफिक जाम ने शहर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। रेड अलर्ट और सड़कों का हाल
राजधानी में गुरुवार सुबह से शुरू हुआ बारिश का सिलसिला शुक्रवार को भी लगातार जारी रहा। बारिश की तीव्रता को देखते हुए मौसम विभाग ने शुक्रवार को दिन में दो बार रेड अलर्ट भी जारी किया। संगम विहार की गलियों में बच्चे पानी में तैरते हुए नजर आए। इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर के कई प्रमुख इलाकों में भारी जलभराव देखने को मिला। सड़कों पर पानी भर जाने के कारण वाहन रेंगते हुए नजर आए और लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए लंबे ट्रैफिक जाम से जूझना पड़ा।कहां कितनी हुई बारिश?
शुक्रवार सुबह 8:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक दिल्ली के विभिन्न मौसम केंद्रों पर दर्ज की गई बारिश के आंकड़े इस प्रकार हैं।
| मौसम केंद्र | दर्ज बारिश (मिमी में) |
| आयानगर | 87.4 (सर्वाधिक) |
| पालम | 73.5 |
| पूसा | 59.5 |
| सफदरजंग | 57.2 |
| रिज | 49.6 |
| 49.3
लगातार हो रही इस बारिश के कारण तापमान में भी भारी गिरावट आई है। अधिकतम तापमान सामान्य से 6.7 डिग्री लुढ़ककर 27.5 डिग्री सेल्सियस पर आ गया, जबकि न्यूनतम तापमान सामान्य से 1.3 डिग्री कम होकर 25.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सफदरजंग मानक केंद्र के अनुसार, अगस्त महीने में अब तक कुल 127 मिमी वर्षा दर्ज की जा चुकी है (अगस्त माह का सामान्य बारिश का स्तर 233.1 मिमी निर्धारित है, जबकि बीते साल अगस्त में 400.81 मिमी बारिश हुई थी)। ![]() दिल्ली में बारिश
इस वजह से तेज हुआ बारिश का दौर ![]() दिल्ली में बारिश
कल के लिए यलो अलर्ट जारी
मौसम विभाग के अनुसार 9 और 10 अगस्त को दिल्ली-एनसीआर में हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं। विभाग ने शनिवार के लिए बारिश का यलो अलर्ट भी जारी किया है। अगले सप्ताह बुधवार के बाद चक्रवाती सिस्टम के कमजोर होने के कारण बारिश का दौर कम होगा। हालांकि हल्की बारिश 13 अगस्त तक होगी। इसके बाद मौसम के साफ होने की संभावना है। ![]() गलियों में भरा पानी –
तीन साल बाद भी अधूरी ड्रेनेज योजना
दिल्ली में बारिश ने केवल जलभराव की समस्या ही उजागर नहीं की, बल्कि दिल्ली हाई कोर्ट के आदेशों के बाद भी अधूरी पड़ी ड्रेनेज योजना की सच्चाई सामने ला दी। साल 2023 में हाई कोर्ट ने आसोला ड्रेन और उससे जुड़ी जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे, लेकिन तीन साल बाद भी परियोजना अधूरी है। नतीजा यह रहा कि कुछ घंटों की बारिश में पूरा गांव पानी में डूब गया और लोगों को एक बार फिर वही पुरानी परेशानी झेलनी पड़ी। ![]() गलियों में भरा पानी
बारिश में बह गए सरकारी दावे
दिल्ली हाई कोर्ट में सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग (आईएंडएफसी) ने साल 2025 की अपनी स्टेटस रिपोर्ट में दावा किया था कि आसोला ड्रेन की नियमित सफाई, गाद निकालने, रुकावट हटाने और मानसून के दौरान पंप लगाने जैसे व्यापक इंतजाम किए गए हैं। विभाग ने अदालत को यह भी बताया था कि इन उपायों के कारण इस मानसून में आसोला ड्रेन की वजह से कोई बड़ी जलभराव की घटना सामने नहीं आई। लेकिन शुक्रवार को फतेहपुर बेरी की तस्वीरें इन दावों के बिल्कुल उलट नजर आईं। स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि जब अदालत में जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने के दावे किए गए थे, तब फिर इतनी मामूली अवधि की बारिश में पूरा इलाका जलमग्न कैसे हो गया। ![]() जलभराव –
बारिश ने खोल दी सरकारी तैयारियों की परतें
शुक्रवार को हुई बारिश के कुछ ही घंटों में फतेहपुर बेरी की मुख्य सड़कें और अंदरूनी गलियां पानी में डूब गईं। याचिकाकर्ता ऋषि पाल महाशय ने बताया कि आईएंडएफसी विभाग के दावों की पोल खुल गई। उन्होंने बताया कि हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद गांव में जलनिकासी को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उनके मुताबिक, हर साल मानसून में यही हाल होता है। बारिश होते ही गांव तालाब में बदल जाता है। कई घरों के बाहर घंटों तक पानी जमा रहता है। बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी होती है और नौकरीपेशा लोगों को काम पर पहुंचने में घंटों की देरी होती है। स्थानीय निवासियों के मुताबिक, शुक्रवार को बारिश के कारण कई जगह सड़क और नालियों का अंतर तक दिखाई नहीं दे रहा था। गांव में घुटनों तक भरे पानी से होकर लोगों को निकलना पड़ा। उनके अनुसार, गंदे पानी के कारण संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। जलभराव के दौरान सांप और अन्य जहरीले जीव भी निकल आते हैं, जिससे हादसे का डर बना रहता है। ![]() जलभराव
हाई कोर्ट में पेश स्टेटस रिपोर्ट में किए गए थे बड़े दावे
दिल्ली हाई कोर्ट में सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग (आईएंडएफसी) ने अदालत में दावा किया था कि- -आसोला ड्रेन की नियमित सफाई की गई। -ड्रेन से गाद निकाली गई।सभी रुकावटों को हटाया गया। -मानसून के दौरान अतिरिक्त पंप लगाए गए। -जल निकासी व्यवस्था की लगातार निगरानी की जा रही है। – इस मानसून में आसोला ड्रेन के कारण कोई बड़ी जलभराव की घटना नहीं हुई।लेकिन शुक्रवार की बारिश ने इन सभी दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। |








