राजनीतिक

सीजेपी में भाई-भतीजावाद हावी?: कोर कमेटी के गठन पर फूटा गुस्सा, अभिजीत दीपके के घर के बाहर अनशन पर बैठे युवा

भारतीय राजनीत में परिवारवाद और भाई-भतीजावाद कब किस संगठन में हावी हो जाए पता ही नही चलता। अमूमन राज्य के सभी राजनीतिक दलों पर ये आरोप लगते रहते हैं। अब हाल ही में बने छात्रों के हित में सीजेपी संगठन पर भी यही आरोप लग रहे हैं। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की कोर कमेटी को लेकर विवाद सामने आया है। अभिजीत दीपके के घर के बाहर पहुंचे कुछ युवाओं ने पार्टी नेतृत्व पर परिवारवाद और पक्षपात के आरोप लगाए हैं। इसके साथ ही जंतर-मंतर छात्र आंदोलन से जुड़े सभी कोऑर्डिनेटर्स को प्रतिनिधित्व देने की मांग की है।

प्रदर्शन कर रहे युवाओं का दावा है कि वे जंतर मंतर पर हुए छात्र आंदोलन की शुरुआत से ही सक्रिय रहे और आंदोलन में कोऑर्डिनेटर की भूमिका निभाई। आरोप है कि हाल ही में आयोजित कोर कमेटी की बैठक में केवल अभिजीत दीपके के करीबी और पहचान वाले लोगों को बुलाया गया जबकि आंदोलन से जुड़े कई कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर दिया गया।

युवाओंं ने बताया कब तक जारी रहेगा अनशन?

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे देश के युवाओं का आंदोलन था। उनका दावा है कि जंतर मंतर आंदोलन से करीब 450 लोग कोऑर्डिनेटर के रूप में जुड़े थे लेकिन उन्हें बैठक में शामिल नहीं किया गया। युवाओं ने यह भी आरोप लगाया कि देर रात तक पार्टी प्रवक्ता आशुतोष रांका से बैठक और आंदोलन को लेकर बातचीत होती रही लेकिन उन्होंने इस संबंध में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि वे अभिजीत दीपके के घर के बाहर अनशन पर बैठेंगे और जब तक आंदोलन से जुड़े सभी युवाओं को उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाता, तब तक उनका धरना और अनशन जारी रहेगा।

सीजेपी कार्यकर्ता मनीष ने क्या कुछ कहा?

सीजेपी कार्यकर्ता मनीष ब्रह्मभट्ट ने मीडिया से बातचीत में कहा,”एक ग्रुप बनाया गया है और सभी इस बात से सहमत हैं कि अगर चीजें लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ें, तो इससे देश का भला होगा। हमें आपके सामने यह बयान देने की जरूरत नहीं थी, हमें इसका बुरा लग रहा है। लेकिन जब तक हम आवाज नहीं उठाते, हमारी बात सुनी नहीं जाती। हमें यह बात देर रात करीब 1:00 बजे महसूस हुई और तभी हमें यह कदम उठाना पड़ा। आज से हम तब तक अन्न-जल त्याग रहे हैं जब तक कि लोकतांत्रिक तरीके से टीम बनाकर सभी फैसले पारदर्शी रूप से नहीं लिए जाते। तब तक हम इस आंदोलन को देश का सच्चा आंदोलन नहीं कह सकते।

धरने पर बैठने की वजह क्या?

  • मनीष ब्रह्मभट्ट ने कहा, “मेरा मकसद और वहां बैठे 100, 200 या 500 लोगों समेत हमारे सभी साथियों का मकसद साफ है। हर कोई पूछ रहा है कि फैसले सिर्फ कुछ चुनिंदा लोग ही क्यों ले रहे हैं? अगर हम सच में लोकतंत्र में यकीन रखते हैं, तो फैसले लोकतांत्रिक तरीके से होने चाहिए। बैठकों में अपने परिवार के सदस्यों और दोस्तों को बिठाना और दूसरों को अंदर आने से रोकना या जरूरी मुद्दों पर बात न सुनना मंजूर नहीं है। इस आंदोलन में शुरू से ही भाई-भतीजावाद और पक्षपात की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।”
  • मनीष ब्रह्मभट्ट ने कहा, “जो भी हो, उन्हें मीटिंग करने दें। जो लोग इसमें शामिल हुए, उन्हें समझना होगा, राहुल गांधी ने कल उन पांच लोगों को बुलाया जो आंदोलन से जुड़े अहम चेहरे थे। अब, ये हमारे आंदोलन के चेहरे हैं। अगर उन्हें मीटिंग में बुलाया जाता या शामिल किया जाता, वे कोई नेता भी नहीं थे। बहुत से लोग आहत हैं, उन्हें बुलाया जाना चाहिए था, उनसे सलाह ली जानी चाहिए थी। अगर हम इसी तरह काम करते रहे, तो यह आंदोलन कब तक चलेगा?”
  • मनीष ब्रह्मभट्ट ने कहा, “जो भी हो, उन्हें बैठक करने दें। जो लोग इसमें शामिल हुए, उन्हें समझना होगा कि राहुल गांधी ने कल उन पांच लोगों को बुलाया जो आंदोलन से जुड़े अहम चेहरे थे। अब, ये हमारे आंदोलन के चेहरे हैं। अगर उन्हें मीटिंग में बुलाया जाता या शामिल किया जाता, वे कोई नेता भी नहीं थे। बहुत से लोग आहत हैं, उन्हें बुलाया जाना चाहिए था, उनसे सलाह ली जानी चाहिए थी। अगर हम इसी तरह काम करते रहे, तो यह आंदोलन कब तक चलेगा?

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