बड़े तालाब में उठे दुआ के हाथ, अच्छी बारिश और अमन-खुशहाली की कामना

मध्य प्रदेश में अच्छी बारिश, किसानों की बेहतरी और प्रदेश की खुशहाली के लिए समय-समय पर अलग अलग धर्मों द्वारा प्रार्थना और दुआएं की जाती हैं इस्लामिक परंपरा में बारिश के लिए विशेष रूप से ‘नमाज़-ए-इस्तिस्का अदा की जाती है, जिसमें लोग मैदान या जल स्रोतों तालाब के पास जमा होकरअल्लाह से रहमत की बारिश और पानी की कमी को दूर करने की दुआ करते हैं।भोपाल के मुस्लिम समाज ने भी बड़े तालाब के बीचों बीच सूफ़ी संत शाह अली शाह की दरगाह तकिया टापू मे रहमत की बारिश की दुआ की.
पुरे मध्यप्रदेश में बारिश नहीं होने से अब लोगो मे बेचैनी बढ़ने लगी है इसमें सबसे ज्यादा किसान प्रभावित हो रहा है वही आमजन मे भी उमस से बेचैनी बढ़ने लगी है. ऐसे मे अब विभिन्न समाज के लोग अपने अपने तरीके से ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं. इधर मुस्लिम समाज के युवाओं ने भी बड़े तालाब के बीचों बीच सूफ़ी संत शाह अली शाह की दरगाह तकिया टापू मे रहमत की बारिश के लिए सामूहिक रूप से दुआ की।
इस दौरान मुस्लिम समाज के लोग बोट मे सवार होकर बड़े तालाब के बीच पहुंचे और अल्लाह से रहमत की बारिश की दुआ मांगी।समजसेवी मो. शावर के नेतृत्व में आयोजित इस दुआ में भोपाल सहित पूरे मध्यप्रदेश में अच्छी और ऑफियत की बारिश की कामना की गई। मो. शावर ने कहा की हमने विशेष रूप से किसानों की खुशहाली, फसलों की बेहतर पैदावार और आमजन के जीवन में सुख-समृद्धि की कामना की गई।उन्होंने सभी धर्मगुरुओं से भी निवेदन किया की वह भी अच्छी बारिश के लिए अल्लाह ईश्वर से दुआ करें ताकि प्रदेश का किसान खुशहाल हो सके.मुस्लिम समाज के लोगों ने कहा कि पर्याप्त बारिश किसानों के साथ-साथ प्रदेश के जलस्रोतों और आम जनजीवन के लिए भी बेहद जरूरी है।
मुस्लिम समाज की ओर से की गई इस सामूहिक दुआ का उद्देश्य प्रदेश में अच्छी बारिश, खुशहाली और सभी के लिए बेहतर बारिश की कामना करना है.
बाइट मो.शावर समजसेवी
बता दे की मुस्लिम समाज नमाज़-ए-इस्तिस्का ज़ब पड़ता है ज़ब कम बारिश या सूखे जैसे हालात बना जाते है.अल्लाह से वर्षा मांगने की एक सुन्नत इबादत है।नमाज़ के बाद सभी लोग हाथ उठाकर अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं ताकि अल्लाह गुनाहो को माफ करके रहमत की बारिश कर दे जिससे किसानों की फसलें और आम जनजीवन सुरक्षित रहे इस मौके पर मोलना आसिफ़ साहब नईम ख़ान चांद मियाँ रईस भाई आसिफ़ भाई तालिब अली आदि उपस्थित हुए।




