नमोस्तु नमोस्तु के स्वर के साथ आचार्य श्री के दर्शन कर रहे श्रद्धालु,,संसार में हर व्यक्ति स्वयं का परिचय देने में लगा है लोगों न धर्म का परिचय कोने में रखाहै,, आचार्य समय सागर महाराज,,

भोपाल वस्तु का स्वभाव धर्म हो सकता है सम्यक दर्शन सम्यक ज्ञान सम्यक चारित्र को धर्म की संख्या भगवान ने दी है और इसको छोड़कर इसके विपरीत मिथ्या दर्शन मिथ्या ज्ञान और मिथ्या चरित्र यह धर्म के अतत्व सिद्धांत हैं यह उद्गार आचार्य समय सागर महाराज ने रविवार विशेष धर्म सभा में धर्म का वर्णन बताते हुए कहा संसार में सभी धर्म कर रहे हैं या धर्म करना चाहते हैं पर धर्म के मूल स्वभाव से सब अनभिज्ञ हैं,धर्म अतुलनीय है संसार के परिणमन में कारण नहीं धर्म संसार में उठाने का कारण है गिराने का नहीं धर्म का स्वरूप ज्ञान विचार शील बुद्धि का विषय है संसार का प्रत्येक प्राणी स्वयं का परिचय देखने में और परिचय देने ओर पाने में लगा है पर धर्म का परिचय लोगों ने कोने में रख दिया है आचार्य श्री ने कहा दुनिया में बहुत सारे धर्म है जो विभिन्न प्रकार और व्यवस्थाओं में अलग अलग हे धर्म का स्वरूप एक है धर्म देखने में नहीं आता धर्म भावनात्मक है,, धर्म बाजार में नहीं बिकता पर अपने अंदर कण कण में धर्म हे जिसे अपने परिणामों के निर्मल आचरण से पा सकते हे,, धर्म सभा का शुभारंभ आचार्य श्री विद्या सागर महाराज के चित्र अनावरण दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, संचालन अध्यक्ष पंकज सुपारी ने किया समाज के श्रेष्ठी पुण्यर्जक समाज सेवी अशोक पाटनी राजस्थान प्रभात जैन मुंबई सुधीर जैन विनोद बड़जात्या दुर्ग आशीष पूना अतुल काका पुणे रेशु सिंघाई दमोह गौरव कुंडलपुर विशेष रूप से मौजूद थे सभी पुण्यर्जक परिवार का बहुमान पंकज सुपारी मनोज बांगा राकेश ओ एस डी ने किया, प्रवक्ता अंशुल जैन ने बताया श्री समय सागर महाराज के दर्शन हेतु अनेक शहरों से श्रद्धालु आए,, आचार्य श्री के दर्शन के लिए एक झलक के लिए श्रद्धालु लालियत थे,, आचार्य श्री की छवि को देख सभी हे स्वामी नमोस्तु हे स्वामी नमोस्तु के स्वर गूंजने लगते आज भी अनेक श्रद्धालु द्वारा श्री फल भेट कर संयमित जीवन जीने के संकल्प लिए गए,,,,



