स्वयं से ब्रह्मांड की एकता की चेतना यात्रा

कार्यक्रम के संयोजक ध्रुव शर्मा ने विषय की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि आत्मबोध से विश्वबोध की यात्रा स्वयं को पहचानने से शुरू होकर संपूर्ण ब्रह्मांड और प्रकृति के साथ एकात्मता का अनुभव करने की एक चेतना यात्रा है। इस आयोजन श्रृंखला में विदिशा का नाम प्रमुखता से शामिल है।
साहित्य में हो रहे परिवर्तनों पर दृष्टि रखना जरूरी
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं मध्य प्रदेश शासन के मुक्तिबोध सृजन पीठ के निदेशक ऋषि कुमार मिश्रा ने मानव सभ्यता के क्रमिक विकास पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समाज और साहित्य में लगातार हो रहे परिवर्तनों पर सजग दृष्टि रखना आवश्यक है। अपने सारगर्भित व्याख्यान में श्री मिश्रा ने स्पष्ट किया कि प्रकृति से सच्चा जुड़ाव ही वास्तव में आत्मबोध से विश्वबोध की ओर ले जाता है।
युवा पीढ़ी करे साहित्य का अध्ययन
परिषद के प्रांत महामंत्री आशुतोष शर्मा ने युवा पीढ़ी से भारतीय साहित्य और संस्कृति के गहन अध्ययन का आह्वान किया। वहीं, वरिष्ठ साहित्यकार दिनेश याग्निक ने आत्मबोध और विश्वबोध के विभिन्न व्यावहारिक पहलुओं पर विचार साझा किए।
मेधावी विद्यार्थियों का हुआ सम्मान
व्याख्यान के पश्चात नगर के प्रतिभावान व मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।
कार्यक्रम का सफल संचालन कार्यक्रम प्रभारी कवि सत्येंद्र सत्यज ने किया तथा आभार प्रदर्शन अनुज भार्गव द्वारा किया गया।
इस अवसर पर साहित्यकार विष्णु दुबे, लायन अरुण कुमार सोनी, शिवराज दांगी, योगेंद्र राजपूत, दीपक रघुवंशी, अभिषेक भार्गव, शिखा रघुवंशी सहित नगर के अनेक गणमान्य नागरिक और प्रबुद्धजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

