खबर

भारत के शहरों में बसों की 70% भारी किल्लत: 400 से अधिक शहरों में एक भी बस नहीं, CSE रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

भारत के शहरों में सार्वजनिक बस परिवहन प्रणाली की हालत बेहद चिंताजनक है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) और ग्लोबल टेक्निकल फर्म CITIES Forum द्वारा संयुक्त रूप से जारी की गई अध्ययन रिपोर्ट “द इकोनॉमिक्स ऑफ बस ट्रांसफॉर्मेशन्स: ए रोडमैप फॉर विकसित भारत 2047” में सामने आया है कि देश के शहरी इलाकों में बसों की 70 प्रतिशत से अधिक की भारी कमी है।

आंकड़ों के अनुसार, देश के 400 से अधिक छोटे-बड़े शहरों में संगठित बस सेवा पूरी तरह नदारद है। इन शहरों में आम नागरिक पूरी तरह से अनौपचारिक मिनीबसों, ऑटो-रिक्शा और शेयरिंग टू-व्हीलर्स पर निर्भर हैं।

सरकार की वर्तमान ‘पीएम ई-बस’ और ‘पीएम ई-ड्राइव’ योजनाओं की स्थिति क्या है?

केंद्र सरकार ने शहरों में ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए कई प्रमुख पहल शुरू की हैं:

  • PM e-Bus Sewa (2023-27): 20,000 करोड़ रुपये के समर्पित बजट के साथ छोटे और मध्यम शहरों को लक्षित करते हुए 10,000 ई-बसों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 2026 की शुरुआत तक लगभग 5,000 बसें डिलीवर की जा चुकी हैं।
  • PM e-Drive Scheme: बड़े महानगरों पर ध्यान केंद्रित करते हुए 4,391 करोड़ रुपये के बजट के साथ 14,028 ई-बसों को मंजूरी दी गई है।
  • पुराने फेम (FAME) चरण: FAME-I योजना के तहत पायलट आधार पर 425 बसें जोड़ी गई थीं। जबकि FAME-II के तहत मंजूर 6,862 बसों में से लगभग 5,135 बसें सड़कों पर उतारी गईं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button