खबरमध्य प्रदेश

क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (RIE), एनसीईआरटी, भोपाल द्वारा मध्य स्तर के विद्यार्थियों में गणितीय अवधारणाओं को रोचक, सक्रिय एवं अनुभवात्मक ढंग से विकसित करने के उद्देश्य

चन्द्रकला और वैदिक सूत्र आधारित स्पिनिंग गेमिंग डिवाइस” विकसित की गई है जिसे हाल ही में डिजाइन पेटेंट प्राप्त हुआ है। यह अभिनव शिक्षण उपकरण “मध्य प्रदेश राज्य के प्रमुख स्रोत व्यक्तियों हेतु मध्य स्तर पर गणित का प्रयोग करते हुए पर्यावरणीय शिक्षा में खेल/गेम आधारित अधिगम प्रशिक्षण” में विकसित सामग्री के तहत तैयार किया है, जिसका विकास डॉ. रजत कौशिक, सहायक प्रोफेसर एवं प्रो. चित्रा सिंह, प्रोफेसर, क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, एनसीईआरटी, भोपाल द्वारा किया गया है।

इस स्पिनिंग गेमिंग डिवाइस के माध्यम से विद्यार्थियों को चन्द्रमा की 16 कलाओं/अवस्थाओं की पहचान कराते हुए उन्हें भिन्न, प्रतिशत, अनुपात, क्षेत्रफल, कोण, क्रम एवं पैटर्न जैसी विभिन्न गणितीय अवधारणाओं से जोड़ा जाता है। स्पिनर के रुकने पर विद्यार्थी संबंधित चन्द्रकला एवं तिथि की पहचान करते हैं, चन्द्रमा के प्रकाशित एवं अंधकारमय भाग को भिन्न अथवा अनुपात के रूप में व्यक्त करते हैं तथा संबंधित संख्या से जुड़े वैदिक गणितीय सूत्र की पहचान कर उसके आधार पर दिए गए गणितीय प्रश्न को हल करते हैं। इस प्रकार प्रत्येक स्पिन एक क्रमबद्ध अधिगम प्रक्रिया—चन्द्रकला की पहचान, गणितीय अवधारणा की समझ, वैदिक सूत्र की पहचान, सूत्र का प्रयोग और समस्या-समाधान—के रूप में कार्य करता है।

यह गतिविधि केवल गणितीय दक्षता तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों को भारतीय पंचांग, चन्द्रमा की कलाओं तथा भारतीय ज्ञान परंपरा से भी जोड़ती है। 16 चन्द्रकलाओं को 16 वैदिक गणितीय सूत्रों से जोड़ने के माध्यम से विद्यार्थियों में अवलोकन, तार्किक चिंतन, मानसिक गणना, त्वरित निर्णय, गणितीय तर्क एवं समस्या-समाधान जैसे कौशलों का विकास करने का प्रयास किया गया है। साथ ही, चन्द्रमा के प्रकाशित भाग को भिन्न एवं प्रतिशत के रूप में व्यक्त करने तथा उसके क्षेत्रफल और अनुपात का अध्ययन करने से अमूर्त गणितीय अवधारणाओं को एक सहज एवं दृश्य संदर्भ में समझने का अवसर मिलता है।

इस अभिनव शिक्षण उपकरण को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय द्वारा “SPINNING GAMING DEVICE” के रूप में Design No. 487822-001, Class 21-01 में पंजीकृत किया गया है। यह डिजाइन पेटेंट डॉ. रजत कौशिक एवं प्रो. चित्रा सिंह के नाम से पंजीकृत है। यह उपलब्धि गणितीय अधिगम को खेल, भारतीय ज्ञान परंपरा और गतिविधि-आधारित शिक्षण के साथ जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नवाचार के रूप में देखी जा सकती है।

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