
जब भगवान को अपने भक्तों का मान रखने के लिए स्वयं को निरुत्तर होना पड़ा। पहला प्रसंग त्रेता युग का है जिसमें श्री राम ने बालि का बध किया तो उन्होंने प्रभु से सवाल किया कि मैं आपका दुश्मन और सुग्रीव प्यारा है जो आपने मुझे छिपकर मारा । इस पर श्री राम ने कहा कि बालि आपने अपने भाई को राज्य से निकालकर अधर्म किया उसकी पत्नी भी छीन ली इसलिए तुम्हें सजा मिली लेकिन जो मांगों तुम्हारी इच्छा पूरी करूंगा। इसी प्रकार द्वापर में श्री कृष्ण कालिया नाग के सवालों पर निरुत्तर हो गए थे। यह बात कथा वाचक विदुषी ऋचा गोस्वामी ने राजधानी यादव समाज द्वारा श्री राधा कृष्ण मंदिर में आयोजित कथा में कहीं। ऋचा गोस्वामी ने कहा कि पहला प्रसंग किष्किन्धा के राजा बालि का। जब मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने छिपकर बालि का वध किया, तो बालि ने पूछा – “हे राम, आप धर्म की स्थापना के लिए आए हैं, फिर आपने कायरों की तरह मुझ पर वार क्यों किया?” बालि के इस धर्म-संगत सवाल पर श्रीराम मौन हो गए। दूसरा प्रसंग द्वापर का है। वृंदावन में कालिया नाग ने यमुना को विषाक्त कर दिया। श्रीकृष्ण ने उसे दंड दिया, पर जब कालिया की पत्नियों ने शरण मांगी, तो करुणानिधान कृष्ण को भी क्षमा करनी पड़ी।इन दोनों कथाओं का सार यही है – तर्क और शक्ति से नहीं, समर्पण और भक्ति से ही प्रभु प्रसन्न होते हैं।
श्री कृष्ण रुक्मिणी विवाह पर झूमे श्रद्धालु
इसके अलावा कथा में शाम को कथावाचक द्वारा श्री कृष्ण रुक्मिणी विवाह के प्रसंग का वर्णन किया गया जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। राजधानी यादव समाज के अध्यक्ष रामस्वरूप यादव ने बताया कि 7 अगस्त से चल रही श्रीमद्भागवत कथा का 13 अगस्त को समापन होगा। इस अवसर पर प्रसादी का वितरण किया जाएगा। ददन यादव, विमलेश यादव और गुलाब यादव सहित काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया।




