मजदूर संघ के समर्पण का पूरी दुनिया में नाम, कठोर परिश्रम से स्थापित की पहचान

– कृष्ण प्रताप सिंह सिंह ने कहा कि श्रमिक हित में मजदूर संघ की परिश्रम गाथा का पूरी दुनिया ने लोहा माना
भोपाल। कोई आधी शताब्दी पूर्व शून्य से शुरू हुए भारतीय मजदूर संघ ने आज शिखर पर पहुंचते हुए विश्व भर में हिंदुस्तान के गौरव का परचम लहराया है। भारतीय मजदूर संघ के राष्ट्रीय नेता कृष्ण प्रताप सिंह सिंह कहते हैं कि भारत दुनिया का विशाल प्राचीनतम राष्ट्र है, जहां पर हमारे ऋषि मुनियों ने मनुष्य के लिए भौतिक एवं ऐतिहासिक प्रगति के साथ-साथ आध्यात्मिक शिक्षा और ” वसुधैव कुटुंबकम” की कल्पना को साकार करते हुए, यह पूरा विश्व भी हमारा परिवार है, की संकल्पना की है। हमारे प्राचीन वेदों ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद एवं अर्थवेद के आधार पर दुनिया के लोग आज तरह-तरह के आविष्कार कर रहे है। इसी तरह हमारे देश का श्रम संघ भी अति प्राचीन है इसे हम चार भागों में बांट सकते हैं। जैसे अर्वाचीन कॉल, रामायण काल, महाभारत काल और आधुनिक काल शामिल है।
गत शताब्दी के पांचवें छठे दशक में वामपंथ का मजदूर क्षेत्र में वर्चस्व था। लाल किले पर लाल निशान एवं विदेशी विचारो से प्रेरित संकल्प के साथ वह द्रुत गति से आगे बढ़ रहे थे, राष्ट्र शक्ति के लिए यह चिंता का विषय था। परम पूजनीय श्री गुरु जी (द्वितीय सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) की प्रेरणा से नागपुर संघ कार्यालय पर संपन्न हुई एक बैठक में यह निश्चित हुआ कि मजदूर क्षेत्र में राष्ट्रहित, मजदूर हित को दृष्टिगत राष्ट्रवादी श्रमिक संगठन का गठन किया जाए। परिणाम स्वरूप उस बैठक में उपस्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय के सुझाव पर सर्वसम्मति से नए संगठन निर्माण की जिम्मेदारी दत्तोपंत ठेंगड़ी जी को सौंप दी गई। तदनुसार 23 जुलाई 1955 को भोपाल में दत्तोपंत ठेंगड़ी जी ने भारतीय मजदूर संघ नाम से नए अखिल भारतीय श्रमिक संगठन के निर्माण की घोषणा की, घोषणा के समय संगठन के पास कार्यालय, कार्यकर्ता, धनकोष एवं सदस्यता आदि कुछ भी नहीं था। अर्थात यह शुद्ध रूप में शून्य से सृष्टि निर्माण की घोषणा थी। इस निर्माण की घोषणा के साथ भारत के मजदूर क्षेत्र में एक नए युग का सूत्रपात हुआ। शून्य से संगठन यात्रा प्रारंभ करने वाले भारतीय मजदूर संघ के साथ आज लगभग तीन करोड़ से भी अधिक सदस्यता तथा सभी उद्योगों, विभागों, संघठित-असंघठित कामगार क्षेत्रो में 6000 से अधिक श्रमिक-कर्मचारी यूनियन तथा लाखों कार्यकर्ता सक्रिय है। भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त भारतीय मजदूर संघ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय श्रमिक संबंधी समस्त समितियों, परिषदों और आयोग का सदस्य है।
भारतीय मजदूर संघ इस समय भारत ही नहीं, विश्व का सबसे बड़ा स्वायत्य स्वतंत्र मजदूर संगठन है। संगठन के संस्थापक दत्तोपंत जी ने इसकी स्थापना के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए लिखा है कि भारतीय मजदूर संघ सर्वकल्प राष्ट्र निर्माण का एक अंग है और राष्ट्रहित चौखट के भीतर मजदूर हित की कल्पना साकार करना इसका उद्देश्य है। यह मज़दूरो का मजदूरों द्वारा मजदूरों के लिए चलने वाला संगठन है, जो सभी प्रकार के प्रभावों यथा सरकार का प्रभाव, नियोजकों का प्रभाव. राजनीतिक दलों का प्रभाव, विदेशी विचारधारा का प्रभाव और व्यक्तिगत नेतागिरी के प्रभाव से ऊपर उठकर कार्य करेगा। राष्ट्रहित, उद्योगहित व मजदूर हित कि त्रिसूत्रीय इसके विचार चिंतन की धुरी होगी। शोषित, पीड़ित वंचितजन के भाग्य जगाने वाले हम का मूलमंत्र लेकर भारतीय मजदूर संघ का अवतरण हुआ ।
भारत माता की जय के उद्घोष के साथ “देश के हित में करेंगे काम, काम के लेंगे पूरे दाम” यानि राष्ट्रवाद को प्रखरता से लाना और राष्ट्रहित चौखट में रहकर मजदूरों का हित करना हमारा ध्येय है। भारतीय मजदूर संघ ने तमाम ऐसे ऐतिहासिक आंदोलन के जरिए बोनस, आंगनबाड़ी, आशा कर्मियों तथा सभी के लिए सामाजिक सुरक्षा एवं न्यूनतम वेतन आदि के लिए प्रभावी आंदोलन किया है। असंगठित तथा संगठित क्षेत्रों के श्रमिकों-कर्मचारियों हेतु आंदोलनों के जरिये उनके अधिकारों को सुरक्षित रखने में अभूतपूर्व सफलता अर्जित की है, जो कि अविस्मरणीय है। आज भारतीय मजदूर संघ सारे संगठनों को पीछे छोड़ते हुए देश का सबसे बड़ा श्रम संगठन ही नहीं तो पिछले लगभग 30 वर्षों से अंतर्राष्ट्रीय श्रमसंगठन (आईएलओ) में भारत का प्रतिनिधित्व लगातार करता आ रहा है। अभी भारत को जी 20 की अध्यक्षता करने का अवसर प्राप्त हुआ। इसी जी 20 के अर्न्तगत भारतीय मज़दूर संघ को एल 20 एवं ब्रिक्स सम्मेलन की भी अध्यक्षता करने का अवसर मिला है, जो देश एवं मजदूर जगत के लिए गौरव का विषय है।




