खबरमध्य प्रदेश

सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (सीटू) मध्यप्रदेश राज्य कमेटी

CITU ने न्यूनतम वेतन सलाहकार बोर्ड से प्रमुख ट्रेड यूनियनों को बाहर रखने की निंदा की मोदी सरकार का मज़दूर-विरोधी रवैया उजागर CITU ने देशव्यापी निंदा और विरोध का आह्वान किया

मजदूर विरोधी काली श्रम संहिताएं (लेबर कोड) अब अपने क्रूर रूप में सामने आ रहे हैं । केंद्र की कॉर्पोरेट-परस्त मोदी सरकार ने 21 जुलाई 2026 को लेबर कोड लागू होने के बाद पुनर्गठित ‘केंद्रीय न्यूनतम वेतन सलाहकार बोर्ड’ की अधिसूचना जारी की (हालांकि इसे काफी बाद में सार्वजनिक किया गया) । देश के तीन प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों CITU, AITUC और INTUC, जो देश के मान्यता प्राप्त केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच के प्रमुख घटक भी हैं – को बदले की भावना से न्यूनतम वेतन सलाहकार बोर्ड में प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है । इससे एक त्रिपक्षीय सलाहकार बोर्ड के तौर पर इसकी विश्वसनीयता की जड़ पर ही प्रहार हुआ है । अपनी पसंद के लोगों को चुनकर और दूसरों को बाहर रखकर बनाया गया यह न्यूनतम वेतन सलाहकार बोर्ड “ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस” (व्यापार करने में आसानी) के नाम पर वेतन को दबाने और उसे जायज़ ठहराने के लिए बनाया गया है ।

सीटू ने केंद्र सरकार के इस बदले की भावना वाले रवैये की निंदा की है । लेकिन इस सरकार से ऐसी उम्मीद ही की जा सकती है; यह सरकार देश भर में कामकाजी लोगों की वास्तविक औसत कमाई/आय के स्तर में लगातार गिरावट के लिए ज़िम्मेदार रही है । साथ ही, यह सरकार वैधानिक न्यूनतम वेतन के फ़ॉर्मूले पर भारतीय श्रम सम्मेलन’ की आम सहमति वाली त्रिपक्षीय सिफ़ारिश को लागू करने से अहंकारपूर्ण ढंग से इनकार करती रही है और अपनी कॉर्पोरेट-परस्त नीतियों के ज़रिए रोज़गार की गुणवत्ता को भी बुरी तरह खराब कर रही है । मज़दूर वर्ग के पास इन विनाशकारी नीतियों का मुक़ाबला करने के लिए एकजुट होने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है, क्योंकि इन नीतियों के हर कदम में घोर विकृति दिखाई देती है ।

सीटू की मध्यप्रदेश राज्य कमेटी केंद्र सरकार के इस निर्णय की तीखी निंदा करते हुए इसके खिलाफ समूचे देश के साथ मध्य प्रदेश में भी तीखे जमीनी संघर्ष करने की घोषणा करती है । सीटू ने सभी श्रमिक-कर्मचारी संगठनों से कॉर्पोरेट-सांप्रदायिक गठजोड़ वाले इस सरकार के इस हमले के मूल को समझते हुए इसके विरुद्ध एकजुट संघर्ष में शामिल होने की अपील की है । विरोध और प्रतिरोध की दिशा में मज़बूत देशव्यापी संघर्ष के ज़रिए इन सभी मज़दूर-विरोधी और जन-विरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ एक बड़े संघर्ष की तैयारी की जाएगी ।

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