यूपी में खाकी की तानाशाही: पूछताछ के नाम पर बेकसूर को उठाया, सदमे में गई गर्भवती बीवी की जान; छह पुलिसवाले नपे

यूपी के फिरोजाबाद स्थित शिकोहाबाद के लभौआ गांव में चोरी के शक में पुलिस द्वारा रविवार रात पति गौरव को हिरासत में लिए जाने के सदमे से उसकी गर्भवती पत्नी अंजली (28) की तबीयत बिगड़ गई। सोमवार सुबह प्रसव के बाद निजी अस्पताल में उसकी मौत हो गई। घटना से भड़के ग्रामीणों ने शिकोहाबाद थाने पर प्रदर्शन कर हंगामा किया। मामले में एसएसपी आदित्य लांग्हे ने लापरवाही बरतने पर दो एसआई समेत छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। अग्रिम जांच एएसपी आईपीएस जयबिंद कुमार गुप्ता को सौंपी है।
परचून की दुकान में हुई थी चोरी
लभौआ गांव में बीते शुक्रवार रात जहेश कुमार की परचून की दुकान में चोरी हुई थी। इसी सिलसिले में रविवार रात शिकोहाबाद थाने के पुलिसकर्मी गांव के दो युवक गौरव और अजेंद्र प्रताप को हिरासत में लेकर थाने आ गए। गौरव की 28 वर्षीया पत्नी अंजली निगम, जो कि गर्भवती थीं, पति को पुलिस द्वारा ले जाने की खबर सुनते ही सदमे में आ गईं और उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन उन्हें शिकोहाबाद संयुक्त चिकित्सालय ले गए, जहां सोमवार सुबह करीब 9:30 बजे उन्होंने एक बेटे को जन्म दिया। इसके बाद उनकी हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। परिजन उन्हें शहर के एक निजी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने अंजली को मृत घोषित कर दिया।

थाने में दो घंटे तक चला हाईवोल्टेज ड्रामा, भारी पुलिस बल तैनात
महिला की मौत की खबर फैलते ही आक्रोशित ग्रामीण और परिजन ट्रैक्टरों में भरकर शिकोहाबाद थाने पहुंच गए। महिलाओं ने थाने के भीतर कुर्सियां फेंक दीं और पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। घटना की सूचना मिलते ही भीम आर्मी और किसान नेता भी मौके पर पहुंच गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसपी देहात अनुज चौधरी, एएसपी शिकोहाबाद जयबिंद कुमार गुप्ता और सीओ यातायात अंबरीश कुमार के साथ मक्खनपुर, सिरसागंज, नसीरपुर थाने की पुलिस फोर्स ने मोर्चा संभाला। पुलिस द्वारा गौरव और उसके साथी को रिहा किए जाने व निष्पक्ष कार्रवाई के आश्वासन के बाद ग्रामीण शांत हुए। इसके बाद थाना उत्तर, दक्षिण और रामगढ़ पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था के बीच शव का पोस्टमार्टम कराया गया और देर शाम गांव में अंतिम संस्कार हुआ।
लापरवाही पर दो दरोगा समेत छह पुलिसकर्मी सस्पेंड
एसएसपी आदित्य लांग्हे ने बताया कि मामले में लापरवाही बरतने पर छह पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। जब पुलिसकर्मियों को पता था कि गौरव की पत्नी की तबीयत खराब है और पूछताछ में कुछ सामने नहीं आया था, तो उसे छोड़ दिया जाना चाहिए था। निलंबित पुलिसकर्मियों में एसआई धर्मपाल सिंह, सत्यपाल सिंह, हेड कांस्टेबल मोहन सिंह, अरविंद कुमार और कांस्टेबल भवतोष कुमार व रंगरूट कांस्टेबल कुलदीप कुमार शामिल है।
एक तरफ शिकोहाबाद थाने के बाहर न्याय की मांग को लेकर पुलिस और ग्रामीणों के बीच खींचतान चली तो दूसरी तरफ मेडिकल कॉलेज की बाल रोग गहन चिकित्सा इकाई के बाहर बेबस पिता गौरव अपनी जिंदगी के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा था। पत्नी अंजली (28) की मौत के बाद उसका नवजात बेटा भी जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। गौरव ने बताया कि वह बेटे के साथ आगरा में है।

साथ गए परिजनों का कहना है कि घर में जहां खुशियां आनी चाहिए थीं, वहां एक साथ दो-दो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। एक तरफ घर में अंजली का शव पहुंचा तो दूसरी तरफ मासूम बच्चा अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा है। गांव के लोग और रिश्तेदार अब बस ईश्वर से यही प्रार्थना कर रहे हैं कि कम से कम इस बेकसूर नवजात की सांसें बच जाएं।
डॉक्टर का बयान
महिला में हीमोग्लोबिन का स्तर केवल 5 पॉइंट के करीब था। प्रसव के बाद अचानक बीपी गिर जाने के कारण हालत बिगड़ी, जिसके चलते उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था। – डॉ. आरसी केशव, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, संयुक्त चिकित्सालय, शिकोहाबाद
पुलिस का बयान
चोरी के मामले में पूछताछ के लिए युवक को हिरासत में लिया गया था। परिजनों की शिकायत प्राप्त कर ली गई है। -अनुज चौधरी, एसपी ग्रामीण
रंजिश, दरोगा की हनक और बेकसूर पर जुल्म
साहब! मेरा कोई कसूर नहीं था। एक साल पुरानी गांव की रंजिश में मुझे झूठा फंसाया गया। मेरी पत्नी रोती रही, अपनी नाजुक हालत का वास्ता देती रही, लेकिन पुलिस वाले नहीं माने… और आज मेरी दुनिया उजड़ गई।
गौरव की बात सुन हर कोई हुआ भावुक
शिकोहाबाद थाने के लभौआ गांव में चोरी के आरोप में हिरासत में लिए गए वीडियोग्राफर गौरव ने जब पुलिसिया शक और अपनी आपबीती सुनाई, तो सुनने वालों की आंखें नम हो गईं।

थाने से छूटने और पत्नी की मौत के बाद बदहवास गौरव ने बताया कि वह शिकोहाबाद में वीडियोग्राफी की दुकान चलाता है। गांव में जिस परचून की दुकान में चोरी हुई थी, उस दुकानदार से एक साल पहले उसके पारिवारिक चाचा व ग्राम प्रधान कैलाश बाबू का विवाद हुआ था। उस समय उसने बीच-बचाव कराकर समझौता कराया था, जबकि उसके साथी अजेंद्र के पिता ने भी प्रधान पक्ष का साथ दिया था। इसी पुरानी खुन्नस और रंजिश के चलते दुकानदार ने चोरी के मामले में उसका और अजेंद्र का नाम पुलिस को दे दिया।

गौरव के मुताबिक, रविवार रात करीब 8 बजे वह दुकान बंद कर घर लौटा था। रात 11 बजे अचानक 8 से 10 पुलिसकर्मी उसके घर आ धमके। जब उसने और उसकी गर्भवती पत्नी अंजली ने रात में ले जाने का कारण पूछा, तो पुलिसकर्मियों ने कहा-दरोगा जी सड़क पर खड़े हैं, बस थोड़ी पूछताछ करनी है, फिर घर वापस आ जाना।
किसी ने नहीं सुनी अंजली की गुहार
अंजली ने अपनी साढ़े आठ माह की गर्भावस्था और अपनी तबीयत की दुहाई देते हुए पुलिसकर्मियों से हाथ जोड़कर विनती की कि जो पूछताछ करनी है घर पर ही कर लें। लेकिन पुलिसकर्मी एक न सुने और उसे खींचकर बाहर ले आए।


